30 September 2021

WISDOM--------

   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ----- ' विश्व  के  शक्ति  भंडार  में  आत्मबल  सर्वोपरि  है   l   अध्यात्मबल  से  आत्मबल   उभरता  है   l  अध्यात्मबल  का  संपादन  कठिन  नहीं ,   वरन  सरल  है   l   उसके  लिए   आत्मशोधन   एवं  लोकमंगल  के  कार्यों   को  जीवनचर्या  का   अंग  बना  लेने  भर  से   काम  चलता  है  l   व्यक्तित्व  में  पैनापन  और  प्रखरता  का  समावेश  इन्ही  दो  आधारों  पर   होता  है   और  इतना  होने  पर   दैवी  अनुग्रह  अनायास  बरसता  है   और  आत्मबल   भीतर  से  उभरता  है   l  '  आचार्य श्री  लिखते  हैं ---- ' केवट , शबरी ,  अंगद , नल - नील ,  रीछ - वानर , सुग्रीव  की  निज  की  भौतिक  सामर्थ्य  बहुत  कम  थी  ,  पर  वे   ईश्वरीय  शक्ति  से  जुड़  गए   और  अपने  में  देवत्व  की  मात्रा   बढ़ा  लेने  पर  ही   इतने  मनस्वी  बन  सके   l  "      चन्द्रगुप्त  जब  विश्व विजय   की  योजना  सुनकर  सकपकाने  लगे     तो  चाणक्य  ने  कहा ---- " तुम्हारी  दासी -पुत्र  वाली  मनोदशा  को  मैं  जानता   हूँ  l   उससे  ऊपर  उठो   और   चाणक्य  के   वरद  पुत्र   जैसी  भूमिका  निभाओ   l  "  छत्रपति  शिवजी   जब  अपने  सैन्यबल   को  देखते  हुए   असमंजस  में  थे  कि   इतनी  बड़ी  लड़ाई  कैसे  लड़ी  जाएगी  ,  तो  समर्थ  रामदास  ने  उन्हें   भवानी  के  हाथों   अक्षय  तलवार  दिलाई  थी   और  कहा  था ---- "  तुम  छत्रपति  हो  गए  ,  पराजय  की  बात  ही  मत  सोचो   l  "    बड़े - बी अड़े  कार्य  देवत्व  की  शक्ति  के  बिना  असंभव  हैं   l 

29 September 2021

WISDOM ------

   भक्ति  में   जाति   का  नहीं   ,  हृदय  का स्थान  होता  है  ,  यही  वजह   है    कि   मजहब  की  दृष्टि  से  मुसलमान   होते  हुए  भी   अब्दुल  रहीम  खानखाना   कृष्ण  के  परम  भक्त  थे   l    बादशाह  अकबर   रहीम दास   जी  को  बहुत  सम्मान  देते  थे   l   अकबर  के  पुत्र  जहांगीर  ने    रहीम  को   बादशाह  के  विरुद्ध    विश्वासघात  करने  में   साथ  देने  का  प्रलोभन    दिया  कि  बादशाह  बनने  के  बाद   वह  उन्हें  मंत्री पद  सौंपेगा  l   रहीम  ने  यह  बात  नहीं  मानी   और  जब  जहांगीर  बादशाह  बना   तो  उसने    रहीम दास  जी  से  भारी  बदला  लिया   l   उसने  रहीम  के  दोनों  पुत्रों  की  हत्या  कर   के  दरवाजे  के  पास  फिंकवा  दिया   l   रहीम  के  सारे   अधिकार  छीन  लिए   और  उन्हें  दर -दर   की  ठोकरें  खाने  को    छोड़  दिया   लेकिन  रहीम  तो  भगवान  के  भक्त  थे  ,  सुख - दुःख  से  परे  !   वे  तब  भी  भक्त  थे  जब   अपरिमित  संपदाओं   के  स्वामी  थे   और  बादशाह  के  दरबार  में  श्रेष्ठ  लोगों  को   बेशकीमती   रत्नों  का  उपहार   दिया  करते  थे  ,  और  अब  इस  स्थिति  में  भी  मस्ती  में  डूबे   रहते  थे  ,  जब  उनके  पास  कुछ  नहीं  था   l     एक  दिन  रहीम  अपने  जीवकोपार्जन  हेतु  बैठे  थे   और  सामने  बेचने  के  लिए  चीजें   पड़ी  हुई  थीं  l   उसी  समय  जहांगीर  अपनी  सेनाओं  के  साथ  वहां  से  गुजरा   और  उन  पर  कटाक्ष  किया   ----- "  देखा  रहीम  !   मेरे  साथ  न  होने  का  परिणाम    l  "    रहीम  को  तनिक  भी  दुःख  नहीं  था   अपनी  करनी  पर    और  कोई  शिकवा  भी  नहीं  था  बादशाह  के   इस    कटाक्ष   व  अपमान   पर   l   इकहत्तर  वर्ष  की  उम्र  में    बड़े  ही  फक्र  के  साथ   इस  नश्वर  देह  को  छोड़ने  से  पूर्व   उन्होंने  अनेक  उल्लेखनीय  कार्य  किए  ,    उन्होंने  ज्योतिष  शास्त्र  में   खेत खोतुकम   एवं  द्वाविशद   योगावली   की  रचना  की   ,  इसके  अतिरिक्त  उन्होंने  अनेक  महान  कार्य  किये   l   ऐसी  मान्यता  है  की  अंतिम  समय  में   उन्होंने   अपने  इष्ट    भगवान  कृष्ण  के  सामने      ही  देह  का  त्याग  किया   और  उन्ही  में  विलीन  हो  गए   l                                                                                                                                                                                                                                                                                                                      

28 September 2021

WISDOM -----

   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  कहते  हैं ----  ' गुरु  तीन  तरह  के  होते  हैं   l   इनमे  पहली  श्रेणी  है   शिक्षक  की ,  जो    बौद्धिक  ज्ञान  देता  है  , इसके  पास  तर्कों  का , शब्दों  का  मायाजाल  होता  है   l   बोलने  में  प्रवीण   ऐसे  लोग  कई  बार  अपने   आप  को  गुरु  के  रूप  में  प्रस्तुत  करते  हैं   l  उनके  कथा -प्रवचन , लच्छेदार   वाणी   अनेकों  को  अपनी   ओर   आकर्षित  करती  है   l   ऐसों  का  मंतव्य   एक  ही  होता  है   कि   लोग  उनकी  सुने , उनकी  पूजा  करें   l  "  ऐसे  ही  एक  गुरु  की  कथा  आचार्य श्री    सुनाते   हैं  ------- एक  उच्च  शिक्षित  गुरु  ,  किसी  ख्यातिप्राप्त   संस्था  के  संचालक  थे   l  देश - विदेश  में  उन्हें    प्रवचन  के  लिए  आमंत्रित  किया  जाता  था  l   एक  बार  वे  विदेश   में  किसी  पागलखाने  में  गए   l   वहां  उन्हें  सुनने  वालों  में   कर्मचारियों  और  चिकित्सकों  के  साथ  पागलखाने  के  पागल  भी  थे   l   प्रवचन  करते  समय  इन  गुरु  महोदय  को   उस  समय   भारी  अचरज   हुआ  ,  जब  उन्होंने  देखा  कि   पागलखाने  के  सारे  पागल  उन्हें  बड़े  ध्यान  से  सुन  रहे  हैं   l   उन्होंने  इस  संबंध   में   अधीक्षक  से  कहा   कि   वे  जरा  इन  पागलों  से   पूछकर  बताएं  कि   उन्हें  मेरी  कौन  सी  बात    पसंद  आई   l  उनके  निर्देशानुसार  उन्होंने  पागलों  से  बात  की  और   उनके  पास  आए  l   गुरु  महोदय  में  भारी  उत्सुकता  थी  , बोले  बताइये  न   क्या  बातें  हुईं  l  " अधीक्षक  थोड़ा  हिचकिचाते  हुए  बोले  ----- " महोदय  !  आप  मुझे  क्षमा  करें  ,  ये  सभी  पागल  कह  रहे  थे   कि   ये  प्रवचन  करने  वाले   तो  बिलकुल  हम  लोगों  जैसे  हैं  ,  फरक  सिर्फ  इतना  है   कि   हम  लोग   यहाँ  भीतर  हैं   और  ये  बाहर  घूम  रहे  हैं   l  "   आचार्य श्री  कहते  हैं  दूसरे  प्रकार  के  गुरु   वे  होते  हैं  जिन्हे  भगवान   अपने  प्रतिनिधि  के  रूप  में  नियुक्त  करते  हैं   जैसे  रामकृष्ण  परमहंस ,  रमण  महर्षि ,  महर्षि  अरविन्द   l   और  तीसरी  श्रेणी  में  ईश्वर  स्वयं  हमारे  गुरु  होते  हैं   l 

WISDOM ------

  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं  ------ "  '  दक्ष '   को  देवाधिदेव  महादेव  ने   उसकी  कुमार्गगामिता  का  दंड   उसका  मानवीय  सिर  काटकर  ,  बकरे  का  सिर   लगाकर  दिया  था   l   दक्ष  की  चतुरता  का  वास्तविक  स्वरुप  यही  था   l   आज  भी  ' दक्षों  '  ने  ---- चतुरों  ने  यही  कर  रखा  है   l   ये  तथाकथित  चतुर  लोग  समाज  के    मूर्द्धन्य    बने  बैठे    तिकड़म  को  ही   अपना  आधार  बनाये   हुए  हैं   l   दूसरों  के  सहारे  वे  छल - बल  से   आगे  बढ़ते   हैं  ,  ऊँचा  उठते  हैं   l   तप  और  त्याग  का  नाम  भी  नहीं  है   l   ऐसे  मूर्द्धन्य   लोगों  का  बाहुल्य   व्यक्ति  और  समाज  की   आत्मा  को  कुचल - मसल  रहा  है   l   यह  स्थिति  महाकाल  को  असह्य  है   l   आज  का  मानवीय  चातुर्य  ,  जो  सुविधा  - साधनों  के   अहंकार  में   अपनी  वास्तविक  राह   छोड़  बैठा  है  ,  वैसी  ही  दुर्गति  का  अधिकारी  बनेगा  ,  जैसा  की  दक्ष  का  सारा  परिवार  बना  था   l  "                                                 आचार्य  श्री  लिखते  हैं  ---- " कभी - कभी  ऐसा  समय  आता  है   कि   छूत   की  बीमारी  की  तरह  अनाचार  भी  गति  पकड़  लेता  है   और  अपने  आप  अमर  बेल  की  तरह  बढ़ने  लगता  है    l   गलतियां  दोनों  ओर   से  होती  हैं  -- अनाचारी  अपनी  दुष्टता  से  बाज  नहीं  आता  है   और  सताए  जाने  वाले   कायरता , भीरुता   अपनाकर   टकराने  की  नीति   नहीं  अपनाते   l   तब  स्रष्टा  को  भी  क्रोध  आता  है     और  जो  मनुष्य  नहीं  कर  पाता ,  उसे  स्वयं  करने  के  लिए  तैयार  होता  है   l  "      मनुष्य  सन्मार्ग  पर  चले  अन्यथा  शिवजी   का  तृतीय  नेत्र  खुलने  और  भगवान  कृष्ण   के  हाथ  में  सुदर्शन चक्र  आने  में  देर  नहीं  लगती   l 

27 September 2021

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   मधुसूदन  सरस्वती   भारत  के  ऐसे  प्रकांड  पंडितों  में  गिने  जाते  हैं  ,  जिनने   काशीधाम  में  बैठकर   सारी  विश्व - वसुधा  को   अपने  ज्ञान  और  भक्ति  से  प्रभावित  किया   l  उनने  वेदांत  का  अध्ययन   किया  l  ' अद्वैत  - सिद्धि '  नामक   उनका  ग्रन्थ  बड़ा   प्रसिद्ध  है   l  वे  यात्रा  पर  थे   ,  अपने  गुरु   विश्वेश्वर  सरस्वती   के  आदेश  पर   यमुना   तट  पर  आसन  जमाया   l   इस  बीच   एक  अलौकिक  घटना  घटी  l --- सम्राट  अकबर   की राजमहिषी  शूल  रोग  से   बहुत  त्रस्त  थीं   l  एक  रात  उन्होंने   स्वप्न   देखा  कि   यमुना  के  किनारे  एक  संन्यासी  तप  कर  रहे  हैं  l  उनकी  औषधि   मिलते  ही  वे  स्वस्थ  हो  गईं l   उनने  सम्राट  को  बताया   l   अकबर  ने  पता  लगाया  , समाचार  सही  था  l  एक  तरुण  तपस्वी  चारों  ओर   से  बालू   से  ढका   तप  कर  रहा  था   l   राजमहिषी  वहां  गईं   और  अपने  रोग  के  बारे  में    मधुसूदन   सरस्वती  को  बताया   l   वे  बोले ---- " माँ  !  तुम  घर  जाओ  ,  तुम  शीघ्र  ही  रोगमुक्त   हो  जाओगी   l  "  ऐसा  ही  हुआ   , भेंट  में  मिली  दौलत  उन्होंने  स्वीकार   नहीं  की   l   इसके  बदले  में     हिन्दू  संन्यासियों  पर   मुस्लिमों  के  बढ़ते  अत्याचार   को  रोकने   व  संन्यासियों  की  रक्षा  करने   की  बात  कही   l   इसके  बाद   शासन  ने  उनकी  रक्षा  की   और  नागा  संन्यासियों     ने     आत्मरक्षा    का  प्रशिक्षण    मधुसूसन   के  मार्गदर्शन    में  लिया  l                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                

26 September 2021

WISDOM -------

  ' भगवान  जिसकी   रक्षा  करते  हैं   वह  व्यक्ति   बिना  किसी  रक्षा  के  साधनों   के  भी  जीवित  है   और  उनके  द्वारा     अरक्षित    व्यक्ति    सारी   सुरक्षा  के  बाद  भी  जीवित  नहीं  रहता   ,  तभी  तो  वन  में  छोड़ा  हुआ  अनाथ  भी   जीवित  रहता  है  ,  जबकि  घर  पर   हर  प्रकार  की  देख -रेख  एवं      बचाव  के  प्रयत्नों  के  उपरांत  भी   व्यक्ति  मृत्यु    को  प्राप्त  होता  है   l '