14 April 2022

WISDOM------

   भगवान  श्रीकृष्ण  की  लीला  कथाएं  अद्भुत  हैं   l  भगवान  की  एक  लीला  है   जिसमे  देवर्षि  नारद  उसके  साक्षी  बने ------- भगवान  श्रीकृष्ण  द्वारका  में  अपनी  रानियों , पटरानियों  के  साथ   थे   l  भगवान  ने  उस   दिन  बीमार  होने  की  लीला  रची  l  बीमारी  का  समाचार  सुनकर  राजवैद्य  आ  गए  नाड़ी   देखी  लेकिन  क्या  रोग  है  कुछ  पता  ही  नहीं  चला  l  भगवान  के  पलंग  के  पास   रुक्मिणी , सत्यभामा  आदि  रानियां  खड़ी  थीं ,  सभी  चिंतित  थे  कि   प्रभु  को  अचानक  क्या  हो  गया  l  भगवान  श्रीकृष्ण  ने   नारद जी  का  स्मरण  किया  तो  नारद जी  तुरंत   वहां  पहुँच  गए  l   भगवान  की  मुस्कान  से  वे  समझ  गए   कि   भगवान  आज  भक्तों  को  भक्ति  का  मर्म  समझाना  चाहते  हैं   l  नारद जी  के   वहां पहुँचने  पर   सबने  उनसे  कहा  --- " देवर्षि  !  आप  परम   ज्ञानी हैं  , भगवान   की  बीमारी     उपाय  सुझाएँ   l   '   नारद    जी   ने  कहा ---- ' उपाय   तो    बहुत      सरल  है  ,  यदि  भगवान  श्रीकृष्ण   का कोई  भक्त   अपने  चरणों   की  धूल  को   इनके माथे   पर लगा  दे   तो  ये  अभी  और  तुरंत  ठीक    जायेंगे  l "  यह  उपाय  सुनकर   सभी आश्चर्यचकित   रह   गए ,  सब  रानियों   ने और  सब   ने    मना   कर  दिया   कि   वे  तो  साक्षात्  भगवान  हैं   , ऐसा  करने  से   हम    नरक  में  जायेंगे  l    भगवान  के    संकेत  पर   नारद जी     हस्तिनापुर   गए   वहां  भी   द्रोपदी    आदि    सबने   बीमारी  का  दुःख  तो  प्रकट  किया   लेकिन  नरक   के डर   से   चरण धूलि  देने   से     मना   कर  दिया  l  अब  भगवान  की  प्रेरणा  से  नारदजी  वृंदावन   गए  l   भगवान  की   बीमारी  का  सुनकर   गोपियाँ  बहुत  व्याकुल  हो  गईं   और   पोटली   में  अपनी   चरणधूलि  ले  आईं  l  नारदजी  ने  उन्हें  समझाया  कि   श्रीकृष्ण   भगवान  हैं   उन्हें  चरणधूलि  देकर  तुम  सब  नरक   में   जाओगी  ,  सब  गोपियों   ने    कहा  ---- अपने  कृष्ण   के  लिए   हम  सदा -सदा  के  लिए  नरक  भोगने  को  तैयार  हैं   l "  नारदजी  द्वारका  आ  गए     और सब  अनुभव  कथा  वहां  सुनाई    l   कृष्णजी  ने  कहा  ---- ' यही  है  भक्ति  ,  और  यही  हैं  वे  भक्त  जिनके  वश  में  मैं  हमेशा  रहता  हूँ    l "