15 June 2020

WISDOM -----

   प्रकृति    की  मर्यादाओं ---- नियत  नियमों  की  अनुकूल  दिशा  में  चलकर  ही   सुखी  और  शांत  रहा  जा  सकता  है  ---- पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य  l
 ग्रह - उपग्रह ,  नक्षत्र , तारे   एक  नियम  मर्यादा  के  अनुसार  चलते  हैं  l   वे  अपने  निश्चित  विधान  का  कभी  उल्लंघन  नहीं  करते  l   कीड़े - मकोड़े  और  पक्षियों  में  यह  विशेषता  पाई  जाती  है   कि   वे  अपने  भीतर  की   किसी  अज्ञात  घड़ी   के  मार्गदर्शन  से   अपनी  गतिविधियाँ   व्यवस्थित  रखते  हैं  l   केवल  मनुष्य  ही  ऐसा  है   जो  बार - बार   प्रकृति  के  नियमों  के  विरुद्ध  जाने  की  धृष्टता  करता  है  l
        आज  संसार  में  जो  समस्या  है  वह  मनुष्य  की  धृष्टता  का  ही  परिणाम  है  l   यदि  हम  जागरूक  नहीं  हैं  और  हमने   विज्ञान   की  आधुनिक  तकनीकों  और   आविष्कारों   से  प्राप्त  सुख - सुविधाओं  को  स्वीकार  कर  लिया  है    तो  हमें  उसके  विनाशकारी  परिणाम  भी  स्वीकार  करने  पड़ेंगे   l   जैसे  फ्रिज , टीवी ,   ए.सी. ,  मोबाइल , रासायनिक  खाद , बीज , कीटनाशक  आदि  का  हम  उपयोग  करते  हैं  l   इनके  दुष्प्रभावों  को  विशेषज्ञ  अनेकों  बार  बता  चुके  हैं   लेकिन  हम   जागरूक  नहीं  हैं  ,  इन  सुविधाओं  की  हमें  आदत  हो  गई  है   तो  इनके  दुष्परिणाम  भी  हमें  भुगतने  पड़ते  हैं  l   विज्ञान   इसके  बहुत  आगे  बढ़  गया  है  l   हजारों  की  संख्या  में  कृत्रिम  उपग्रह  हैं ,   संचार  के  साधनों  में  नित्य   नई   तकनीक  आ  रही  है  l   जब  ए.सी.  और  मोबाइल  से  निकलने  वाली  तरंगे  हमारे  शरीर  को  नुकसान  पहुंचाती   हैं   तो    इनसे  और  अधिक  विकसित  तकनीक   से  निकलने  वाली  तरंगे   क्या  हमें  जीवित  रहने  देंगी  ?   इस   आधुनिकता  के  बीच     मनुष्य    का  दम   घुटने  लगेगा  l   जब  पक्षियों  की , पेड़ - पौधों  , वनस्पतियों   की  प्रजाति  लुप्त  हो  रही  है  तो  अब  मनुष्य  के  अस्तित्व  पर  भी  खतरा  है  l
  विज्ञान  बुरा  नहीं  है  ,  लेकिन  जिनके  पास  असीम  धन - सम्पदा  है   और  कभी  न  मिटने  वाली  तृष्णा  है   वे  इन  तकनीकों  का  उपयोग   अपने  स्वार्थ  के  लिए  ,  दुनिया  पर  राज  करने  के  लिए  करते  हैं  l   कुछ  लोगों  की  इस  लोभ - लालसा  का  दुष्परिणाम  सारा  संसार  भुगतता  है   और  इसलिए  भुगतता  है  क्योंकि  जागरूक  नहीं  हैं  l  हम  अपने  स्वाभिमान  को  जगाएं ,  इससे  हम  निर्भय  होंगे  l    निर्भय  और  आत्मविश्वासी    व्यक्ति  से  बीमारी ,  भूत - प्रेत  सब  डर  कर  भागते  हैं   l

WISDOM ------

 जिस  प्रकार   सूखे  बांस  आपस  की  रगड़  से  ही  जलकर  भस्म  हो  जाते  हैं  ,  उसी  प्रकार  अहंकारी  व्यक्ति  आपस  में  टकराते  हैं  और  कलह  की  अग्नि  में  जल  मरते  हैं  l ---- पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य 
      अहंकार  ज्ञान  के  सारे  द्वार  बंद  कर  देता  है   l   अहंकार  यदि  धन  का  हो   तो  व्यक्ति  धन  के  माध्यम  से  सब  कुछ  हथियाना  चाहता  है  l   जिनके  पास  असीम  धन - सम्पदा  है  ,  वे  उस  धन  के  बल  पर  संसार  पर  शासन  करना  चाहते  हैं  l    समय  के  साथ  शासन  का  तरीका  भी  बदल  जाता   है  ,  अब  वे  लोगों  के  मन  में  भय  पैदा  कर  के  ,  उन्हें  मानसिक  रूप  से  कमजोर  बना  कर ,  उनके  दैनिक  जीवन  पर  भी   नियंत्रण  करना  चाहते  हैं  l   महत्वाकांक्षा  यहीं  नहीं  रूकती  l     वे  धन  के  बल  पर  प्रकृति  को  जीतना  चाहते  हैं  l   इसी  महत्वाकांक्षा  के  कारण   अनेक  सभ्यताएँ    धूल  में  मिल  गईं  l  लेकिन  अहंकार  के  कारण  व्यक्ति  इनसे  सबक  नहीं   सीखता  l 
  विज्ञान   की  आधुनिक  तकनीकों , आविष्कारों   से   ही  आज   नियम - संयम  से  रहने  वाला  व्यक्ति  भी  स्वस्थ  नहीं  है  l     अधिक    धन  कमाने   का  लालच   संसार  को  नई - नई  बीमारियाँ   देता  है ,  फिर  उनके  इलाज  देता  है  ,  फिर  नई  बीमारी  !  यह  चक्र  कभी  ख़त्म  नहीं  होता  l
  यह  चक्र  तभी  रुकेगा  जब  व्यक्ति  जागरूक  होगा ,   आधुनिक  सुविधाओं  को  छोड़कर  एक  सरल  जीवन  जियेगा ,   प्रकृति  के  साथ  तालमेल  रखेगा  ,  संवेदनशील  बनेगा  l
 अभी  लोग  क्रूरता  और  छल - छद्म     के  आधार  पर  संसार  को   अपने  ढंग  से  चलाना   चाहते  हैं  ,  लेकिन  यदि  वे  संवेदनशील  बन  जाएँ , '  जियो   और  जीने  दो '  के  सिद्धांत  पर  चलें  ,  अपना  स्वार्थ  छोड़  दें   तो  बिना  किसी  प्रयास  के  संसार  उनके  क़दमों  में   झुकेगा   l