24 June 2021

WISDOM ------

 अपने  युग  के  सर्वश्रेष्ठ  चिकित्सा  विज्ञानी   ' जीवक '  औषधियों  के  साथ   आध्यात्मिक  जीवनशैली   एवं  आध्यात्मिक   साधनाओं  के  प्रबल  पक्षधर  थे   l   उनकी  चिकित्सा  से  स्वस्थ  हुए   सम्राट  आजातशत्रु   ने  उनसे  पूछा   ---- "  क्या  अकेली  औषधियाँ   पर्याप्त  नहीं  हैं   ,  उनके  साथ   आध्यात्मिक  जीवनशैली   एवं   आध्यात्मिक   साधनाएं  जरुरी  हैं   ? "  जीवक  ने  उत्तर  दिया  ---- " यदि  कोई  सम्पूर्ण  स्वस्थ  होना  चाहता  है   तो  उसके  लिए  यह  अति  अनिवार्य  है   l    मनुष्य  का  जीवन  पदार्थ  एवं   चेतना  के  संयोग  के  कारण  है   l   इसलिए  इसकी  सफल  चिकित्सा  के  लिए    विज्ञानं  एवं   अध्यात्म  का   संयोग  चाहिए   l   चिकित्सा  विज्ञानं  एवं  अध्यात्म  ज्ञान  मिलकर  ही   मनुष्य  जीवन  को  सम्पूर्ण  सुखी   व  स्वस्थ  कर  सकते  हैं   l  "

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   एक  पादरी  जहाज  से  यात्रा  कर  रहे  थे   l   जहाज  ने  एक  द्वीप  के  पास  लंगर  डाला  l  पादरी  ने  सोचा  कि   इस  द्वीप  पर  कोई  होगा   तो  उसे  प्रार्थना   सिखा    आएं   l   वहां  उन्हें  केवल  तीन  साधु  मिले  ,  उनसे  पूछा  ---- कुछ  प्रार्थना , उपासना  करते  हो   ?  उन्होंने  बताया  --- हाँ  !   हम  तीनों  ऊपर  हाथ  उठाकर  कहते  हैं  ,  हम  तीन  हैं , तुम  तीन  हो  l   तुम  तीनो  हम  तीनों  की  रक्षा  करो  l   पादरी  हँसे ,  बोले  यह  क्या  पागलपन  करते  हो  ,  तुम्हे  प्रार्थना  करनी  भी  नहीं  आती   l   उन  भोले  साधुओं  के  आग्रह  पर   पादरी  ने  उन्हें   बाइबिल  के  आधार  पर  प्रार्थना  करना  सिखाया   ,  और  अभ्यास   हो  जाने  पर  वैसा  ही  करने  को  कहकर  जहाज  पर  आ  गए   l   दूसरे  दिन  पादरी  जहाज  के  डैक  पर  टहल  रहे  थे  l   पीछे  से  आवाज  सुनाई  दी  ---- ' ओ   पवित्र    आत्मा    रुको   l  "  पादरी  ने  देखा  वे  तीनों  साधु   पानी  पर  बेतहाशा   दौड़ते   पुकारते  चले   आ  रहे  हैं  l   आश्चर्य चकित  पादरी  ने  जहाज  रुकवाया   और  उनसे  इस  प्रकार   आने  का  कारण  पूछा   l   वे  बोले  ----- " आप  हमें  प्रार्थना  सिखा   आये  थे  ,  रात  में  हम  सोये  तो  भूल  गए   l   सोचा    आपसे  ठीक  विधि  पूछ  लें  इसलिए  दौड़े  आए   l  "  पादरी  ने  पूछा  --- पर  आप  पानी  पर   कैसे  दौड़  सके   ?   उन्होंने  कहा  ---- " हमने  भगवान  से  प्रार्थना  की  ,  कहा  -- हम  अनजान  हैं  ,  पवित्र  पादरी  जो  सिखा   गए  थे  ,  हम  भूल  गए  l   अब  दौड़  हम  लेंगे , डूबने  तुम  मत  देना   l   बस ,  इतना  ही  कहा  था   l  "  पादरी  ने   घुटने  तक  कर  उनका  अभिवादन  किया   और  कहा  -- आप  जैसी  प्रार्थना  करते  हैं  वही  सही  है  l  प्रभु  आपसे  प्रसन्न  हैं   l   सर्वव्यापी  ईश्वर  सबके  भाव  समझता  है  ,  उसी  आधार  पर  मान्यता  देता  है   l