12 January 2022

WISDOM ----

   मनुष्य  के  अस्तित्व   के लिए   पेड़ - पौधे , पशु - पक्षी , वनस्पति , जल, वन   आदि  सभी   कुछ अनिवार्य  है   l  ' हम  सब  एक  माला  के  मोती  हैं  l   सबका  हित  , सबकी  सुरक्षा   और  सब की  ख़ुशी  में  ही   स्वयं  का  आनंद  है  l -------- याकूब  ने  सुना  था  कि   संत  तालसुद   पहुंचे  हुए  फकीर   हैं   l   उनकी  दुआ  से   दुःखी   लोग  भी  आनंदित  होकर  लौटते  हैं   l   याकूब  उन्हें  खोजता  हुआ    एक  बियावान  में  जा  पहुंचा  l   वहां  पर  उसने  देखा   कि   वे  संत   एक  टोकरी  में  दाना  लिए  चिड़ियों  को   चुगा  रहे  हैं   और  चिड़ियों  की  चहचहाहट ,व  उनकी  फुदकन  के  देखकर  आनंदविभोर  हो  रहे  थे  l   याकूब  बहुत  देर  तक  बैठा    रहा    ,  पर  जब  संत  का  ध्यान   उसकी  ओर   नहीं  गया  तो  वह  झल्लाया   l   तालसुद   ने  उसे  ऊँगली  के  इशारे  से  बुलाया   और  हाथ  की टोकरी  उसके  हाथ  में  थमाते   हुए  कहा  --- " लो  अब  तुम  चिड़िया  चुगाओ   और  उनकी    प्रसन्न्ता  देखकर  स्वयं  आनंद  लो  l  "  फिर  थोड़ा  गंभीर  स्वर  में  बोले  ---- " अपना  दुःख  भूलकर   दूसरों  को  जहाँ  तक  संभव  हो   आनंद  की  अनुभूति  दे  पाना  ,  उनके  दुःख  के  क्षणों  में   स्वयं  को  उनका  सहभागी  बना   लेना  ही   संसार  की   सबसे  बड़ी  सेवा  है   l   मैंने  जीवन  भर  यही  किया  ,  तुम  भी  यही  करो  और  अपने  जीवन  को  धन्य  बनाओ   l  "

WISDOM-----

    बात  उन  दिनों   की है  जब  स्वामी  विवेकानंद   एल. एल. बी.  के  अंतिम  वर्ष  में  थे  l   उन्हें  लक्ष्य  कर  के  स्वामी  रामकृष्ण परमहंस  ने   आत्मीयता पूर्वक  कहा  था  ---- " क्यों  रे  नरेन  !  तू  कब  तक  भटकता  रहेगा  l  वकालत  कर  के  झूँठ - मूँठ   पैसा  कमाने   के  चक्कर  में  पड़ा   तो  तेरे  हाथ  का  छुआ  पानी  नहीं  पीऊंगा  l  "  उनकी  बात  स्वीकार  कर  वे   पूरी  तरह  विद्या  के  क्षेत्र  में   कूद  पड़े   l   विद्या  में   प्रवीण  होकर    चमत्कारी  व्यक्तित्व  के  स्वामी  बन  जाने  पर    किसी ने  ठाकुर  से  पूछा --- " उनसे  क्या  कराएँगे   l  "  गले  में  कैंसर  हो  जाने  के  कारण ठाकुर  बोल  नहीं  सकते  थे  , उन्होंने  कोयले  का  टुकड़ा  उठाकर  जमीन  पर  लिखा  --- " नरेन   शिक्षा  दिबे  l "    नरेंद्र  विद्या   का  शिक्षण  देगा   l     स्वामी  विवेकानंद  कहते   थे ---- " मेरे  गुरु  ने  मुझे  विद्या  दी  है   l   इसको  पाकर  मैं  दार्शनिक  नहीं  हुआ  ,  तत्ववेत्ता  भी  नहीं  बना  हूँ   l   संत  बनने  का  दावा   नहीं  करता   l   परन्तु  मैं  इन्सान   हूँ   और  इन्सानों   को  प्यार  करता  हूँ   l  "

WISDOM -----

   स्वामी  विवेकानंद  अपने   परामर्श  प्रसंगों  में  कहते  हैं  --- " ध्यान  करना  हो  तो  अपने  कमरे  का  एक  कोना   सकारात्मक  बना  लें  l   सभी  सिद्धों - महापुरुषों   को  नमन  कर   वहां  आमंत्रित  करें  l   उनके  विचार  - सूक्तियों  में  खो  जाएँ   l   उस  कोने  में   एक  आसन   या    कुर्सी  पर  बैठकर   जितना  समय  मिले  ,  सकारात्मक  भावनाएं  बिखरायें   l  वे  सभी  लौटकर  आएँगी   l   सारी   उदासी  दूर  कर   मन  को  प्रसन्न  करेंगी   और  ध्यान  को  सशक्त  बनाएंगी  l   कुछ  न  करें  ,  बस   द्वेषमुक्त   व  प्रसन्नचित्त  चिंतन   करते  रहें   l  "