23 August 2021

WISDOM -----

  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ------ " महान  व्यक्तित्व संपन्न  जीवन  का  मूल्य   व्याख्यान , प्रवचन   एवं  उपदेश  देने  में   निहित  नहीं  होता  ,  बल्कि  सर्वप्रथम  उसे  अपने  जीवन  में  उतारने   एवं  हृदयंगम    करने  में  होता  है   l   वे  अपने  आचरण  से  शिक्षा  देते  हैं  l  "      भगवान   बुद्ध  के  जीवन  का  प्रसंग  है  ----   बौद्ध  भिक्षुक   गाँव - गाँव  में   उपदेश   देने  और  लोगों  के  कल्याण  के  लिए  भ्रमण  करते  थे   l  भगवान  बुद्ध  भी  उसी  गाँव  में  पहुंचे  , उन्होंने  भिक्षुओं  से  पूछा  --- " गाँव  में  जाकर  आपने  क्या  किया   ? "   सभी  भिक्षुओं  ने  कहा  ----   हे  प्रभु  !  ग्रामीण  जनों  ने  हमारी  कोई  बात  नहीं  सुनी  ,  हमारी  किसी  बात  पर  ध्यान  नहीं  दिया  , इसलिए  हम  कोई  सेवा  नहीं  कर  सके  l  "  भगवान  बुद्ध  ने  उनकी  बातों  को  ध्यान  से  सुना   और  उठकर  गाँव  की  ओर   चल  पड़े  l   उनके  साथ  उनके  शिष्य  भी  थे   l   गाँव  पहुंचकर  भगवान  बुद्ध  उस  गाँव  की  सफाई  करने  लगे  , अपने  हाथ  से  कूड़ा  उठाया   l   फिर  अपने  शिष्यों  के  सहयोग  से   गाँव  में  भोजन  बनाया    और  सभी  गाँव  के  लोगों  को  बुलाकर  प्यार  से  भोजन  कराया   l  भगवान  बुद्ध  स्वयं  भोजन  करा  रहे  हैं  ,  यह  सुनकर  आसपास  के  गाँव  के  लोग  भी  एकत्रित  हो  गए  ,  उत्सव  जैसा   उमंग  भरा  वातावरण  निर्मित  हो  गया   l   भगवान  बुद्ध  ने  गाँव  के  लोगों  से  उनका  सुख - दुःख   पूछा   l  उनके  भोजन , मकान  ,  स्वास्थ्य  आदि   विभिन्न   मदों  पर  आत्मीयता  से  बात  की  ,  उनकी  समस्याओं  को  सुना   और  उनका  समाधान  किया   l  प्रेम  और  आत्मीयता  का  एक  दिव्य  और   स्वर्गीय  वातावरण  बन  गया   l   जब  भगवान  बुद्ध  वापस  संघ  की  ओर   जाने  लगे    तो  सब   लोगों   ने  आँखों  में  आँसू   भरकर  उन्हें  विदा  किया   l   बुद्ध  उनके  हृदय  में  बस   गए  थे  l  भिक्षुओं  ने  भगवान  बुद्ध  से  कहा ---- " प्रभु  !  आपने  लोगों  को   न  तो  ध्यान  की  बात  बताई  और  न  ही  कोई  गूढ़  बात  कही   l   फिर  भी   वे  कैसे  आपको  समर्पित  हो  गए   l  "  भगवान  बुद्ध  बोले --- " वत्स  !  सेवा  का  अर्थ   उपदेश  देना  नहीं ,  वरन  लोगों  को  उनके  कष्टों  से  मुक्ति  दिलाना  है   l   जिसको  भूख  लगी  है  वह  भला   भोजन  के  अलावा   और  क्या  सोच  सकता  है   ?  जिसके  सिर   पर  छत  नहीं  है , वह  ध्यान  की  बात  कैसे  समझ  सकता  है   ?  उनके  कष्टों  का  समाधान  करना  ही   उन्हें  ध्यान  की  ओर   ले  जायेगा   l  "  भगवान  बुद्ध  ने   अपने  उपदेशों  को  जीवन  में  उतारकर  कर्म  के  माध्यम  से  व्यक्त  किया   l