29 July 2022

लघु -कथा

   लघु -कथा ----- 1.  एक  तपस्वी  थे   l  वन  में  रहकर  घोर  तप  करने  लगे  l  इंद्र देव  घबराए , इतना  कठोर  तप  करने  वाला    इन्द्रासन  का  हक़दार  बन  सकता  है   l  ऐसा  उपाय  करना  चाहिए  कि  तपस्वी  का  व्रत  खंडित  हो   l  इसके  लिए  इंद्र  ने  अप्सराएँ  भेजीं  ,  डराने  के  लिए  राक्षस  भेजे  ,  पर  तपस्वी  ज्यों के  त्यों  रहे  , जरा  भी  डगमगाए  नहीं   l  अब  इंद्र  ने  दूसरी  तरकीब   अपनाई  ,  वे  परी   का  रूप  धारण  कर  पकवान , मिष्ठान  लेकर  पहुँचने  लगे   l  तपस्वी  ने  पहले  तो  उपेक्षा   दिखाई ,  फिर  उनकी  जीभ  चटोरी  हो  गई   l  रोज  उस  भक्त  की  प्रतीक्षा  करने  लगे   l  एक  दिन  वन परी   अपने  घर  छप्पन  भोग   पकवान  खिलाने    का  निमंत्रण  देने  आई   l  उसे  खाकर  तपस्वी  बहुत  प्रसन्न  हुए   l  परी  ने  कहा ---- " आप  मेरे  घर  ही  निवास  करें  l  इससे  बढ़कर  भोजन  कराया  करुँगी   l  "  तपस्वी  सहमत  हो  गए   l  रोज -रोज  पकवान  खाते  थे   l  परी  पर  मुग्ध  हो  गए  l  गंधर्व  विवाह  करने  पर  सहमत  हो  गए   l  तप  भ्रष्ट  हुआ  ,  इंद्र  बहुत  प्रसन्न  हुए  ,  बोले  ----- " अन्य  रस  छोड़े  जा  सकते  हैं  ,  पर  स्वाद  बड़े  बड़ों  की  साधना  चट  कर  जाता  है   l  "  

2.  एक  सेठ जी  खाँसी  से  बहुत  परेशान  थे   l  वैद्य  जी  के  पास  गए  ,  तो  वैद्य  जी  ने  परहेज  करने  को  कहा  l  सेठ जी  ने  कहा ---- "  आप  दवा  चाहे  जितनी  कड़वी  दे  दें  ,  पर  मैं  परहेज  नहीं  कर  सकता   l  "  वैद्य जी  ने  कहा ---- " फिर  आप  परहेज   भी  मत  कीजिए   और  दवा  भी  मत  लीजिए  ,  क्योंकि  खाँसी  से  तीन  लाभ  आपको   होंगे  ही   l  एक  तो  यह  कि  रात  भर  आप  खाँसते  रहोगे  ,  तो  घर  में  चोर  नहीं  आयेंगे   l     दूसरा   आपको  कुत्ते  नहीं  काटेंगे  ,  क्योंकि  कमजोरी  के  कारण  आप  बिना  लाठी  के   नहीं  चल  सकेंगे   l    तीसरा  लाभ  यह  है  कि   बुढ़ापा  नहीं  आएगा  ,  क्योंकि  खाँसी  के  कारण  जीवन  जल्दी  समाप्त  हो  जायेगा   l  "  यह  सुनकर   सेठ जी  की  समझ  में  बात  आ  गई   और  उन्होंने  खाने - पीने  का  नियंत्रण  कर   अपने  को  स्वस्थ  कर  लिया   l  हकीम   लुकमान  कहते  थे   कि   भोजन   का  असंयम  कर   मनुष्य  अपनी  जीभ  से   अपनी  कब्र  खोदता  है   l   

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