10 April 2024

WISDOM -------

  पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---- " जीवन  में  यदि  सुख  है , तो  दुःख  भी  आएगा  l  यदि  दुःख  है , तो  सुख  भी   निश्चित  रूप  से  मिलेगा  l  यदि  आज  यश -सम्मान  , प्रतिष्ठा   है , तो  कभी  अपयश  भी  मिल  सकता  है  l  इसलिए  अपनी  मन: स्थिति  को   इन  सब  अवस्थाओं  के  लिए   तैयार  रखना  चाहिए   और  जीवन  में  ऐसे  कर्म  करने  चाहिए   कि  जिनसे  हम   इन  परिस्थितियों  को   बेहतर  समझ  सकें   और  इन्हें  सहन  कर  सकें  l "   आचार्य श्री  आगे  लिखते  हैं ---' किसी  भी  तरह  के  समय  को   परिवर्तित  करना  हमारे  हाथ  में  नहीं  होता  , यह  परिवर्तन  स्वत:   होता  है  , जिसे  हमें  स्वीकार  करना  पड़ता  है   l  जिस  तरह  रात्रि  को  हम  दिन  में  नहीं  बदल  सकते  , लेकिन  विद्युत  के  माध्यम  से   बल्ब  जलाकर   अंधकार  को  दूर  कर  सकते  हैं  ,   उसी  तरह  हम   दुःख , पीड़ा , कष्ट  , अपयश  आदि  के  आने  पर   इन्हें  तुरंत  दूर  नहीं  कर  सकते  ,  लेकिन  इन  परिस्थितियों  में   ईश्वर  का  स्मरण  करते  हुए  ,  शुभ  कर्म  कर  के   और   तप  कर  के   हम  इनसे  लाभान्वित  हो  सकते  हैं  l "   अकबर - बीरबल  की  कहानियों  का  एक  प्रसंग  है ---- एक  बार  सम्राट  अकबर  ने  सभासदों  से  पूछा ----"  इस  संसार  में  ऐसा  क्या  है  ,  जिसको  जान  लेने  के  बाद   सुख  में  दुःख  का   अनुभव  हो   और  दुःख  में  सुख  का   l "  सभा  में  सन्नाटा  छ  गया  , सबकी  नजरें  बीरबल  पर  टिकीं  थीं  l  बीरबल  ने  कहा ---- "  यह  केवल   एक  वाक्य  है   जिसके  स्मरण  से   व्यक्ति  को   सुख  में  दुःख  का  और  दुःख  में   सुख  का  अनुभव  होता  है   और  यह  वाक्य  है ---- ' यह  समय  भी  गुजर  जायेगा  l "  बीरबल  के  इस  जवाब  से  अकबर  बहुत  प्रसन्न  हुए  l 

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