3 April 2020

WISDOM ------ गायत्री महाविज्ञान ---- पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी

 आचार्य जी  ने  लिखा  है  कि -- गायत्री  मन्त्र  सद्बुद्धि दायक  है  और  यह  आत्मबल  बढ़ाने  का  अचूक  आध्यात्मिक  व्यायाम  है 
 हमारे  जीवन  में  9  अंक  बहुत  महत्वपूर्ण  है  l  आचार्य श्री  ने  गायत्री  महाविज्ञान  में  लिखा  है --- गायत्री  मन्त्र  को  सूक्ष्म  दृष्टि  से  देखें   तो  इसमें  24  अक्षर  हैं ,  और  नौ ( 9 ) पदों  की  श्रंखला  है  l 
 गायत्री मन्त्र में   एक  प्रणव ( ॐ )   इसके   तीन  विभाग  हैं --- भू:   भुव:  स्व:
नौ   अक्षर  व  उनका  तात्पर्य   इस प्रकार हैं ---- 1.  तत -- जीवन विज्ञान   2. सवितुः --- शक्ति संचय 
3. वरेण्यं --- श्रेष्ठता    4. भर्गो ---- निर्मलता    5. देवस्य ---- दिव्य  दृष्टि    6. धीमहि --- सद्गुण 
7. धियो --- विवेक   8. यो न: ---- संयम      9. प्रचोदयात ----- सेवा  
  गायत्री  गीता   के  अनुसार  यज्ञोपवीत  के  नौ  तार  , इन्ही  नौ  गुणों  को  धारण  करने  का  आदेश  देते  हैं   जो  नवरत्न  के  समान   हैं  l 
 विपरीत  परिस्थितियों  में  लोग  निराशा , भय , निरुत्साह व घबराहट  से  रोने - कलपने  लगते  हैं   जिससे  कष्ट  और  अधिक  बढ़  जाते  हैं  l   गायत्री  मन्त्र  का  जप  करने  से   मनुष्य  की  सद्बुद्धि  जाग्रत  होती  है  वह  धैर्य , साहस  और  विवेक  से   संकट  का  सामना  करता  है  और  जीवन  में  सफल  होता  है  l
  हमारे  धर्मशास्त्रों   ने    हमें   जीवन  जीने  का  रास्ता  बता  दिया   और   मनुष्य  को  चुनाव  का  अधिकार  दिया  है   कि  वह   कौन  सा  रास्ता  चुने  l 

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