लघु कथा ----मुकुन्दी नामक एक व्यक्ति की नसीर नामक एक नाई से गहरी मित्रता हो गई l संयोगवश मुकुन्दी को उन्ही दिनों जुआ खेलने की लत पड़ गई l इसका पता जब नसीर को लगा तो उसे बहुत दुःख हुआ और वह पांच -छह दिन उससे मिलने नहीं गया तो एक दिन मुकुन्दी उससे मिलने उसकी दुकान पर गया l वहां उसे पता चला कि नसीर दरवाजे के पीछे बैठा रो रहा है l मुकुन्दी ने अपने मित्र से उसके रोने का कारण पूछा l नसीर ने उत्तर दिया --- " मित्र ! मेरे रोने का कारण यही है कि तुमने जुआ खेलना आरंभ कर दिया है l अब लोग तुम्हे नहीं , मुझे धिक्कारेंगे कि एक नाई से दोस्ती होने के कारण मुकुन्दी ने गलत राह पकड़ ली l इसलिए या तो तुम मुझसे मित्रता तोड़ दो या फिर जुआ खेलना छोड़ दो l " मुकुन्दी पर नसीर की बातों का गहरा प्रभाव पड़ा और उसने उसी दिन से जुआ खेलना छोड़ दिया l सच्चे मित्र का यही कर्तव्य है कि वह अपने मित्र को सही राह दिखाए और सुख -दुःख में सका साथ दे l