7 February 2025

WISDOM -----

  इस  संसार  में  जितनी  भी  समस्याएं  हैं  उनका  मूल  कारण  ---' आर्थिक  समस्या  l '   हर  प्राणी  के  भोजन -पानी  का  प्रबंध  ईश्वर  किसी न किसी  माध्यम  से  करते  हैं  ,  कोई  भूखा  नहीं  रहता  है   लेकिन  संसार  में  रहकर  प्रत्येक  व्यक्ति  अधिक -से अधिक  सुख  सुविधाएँ  जुटाना  और  धन  एकत्रित  करना  चाहता  है  l  यह  इच्छा  बलवती   इसलिए  भी  हो  जाती  है  क्योंकि  अमीर  लोग   हर  समय  अपनी  अमीरी  का   और  अमीरी  से  हासिल  किए  प्रभुत्व  का  , ख़रीदे  हुए  सम्मान  का    दिखावा  करता  है   l  इस  कारण  अब  प्रत्येक  व्यक्ति  धन  कमाने  की  अंधी  दौड़  में  सम्मिलित  हो  गया  है  l   रोजगार   की  इतनी  व्यवस्था  नहीं  है  l  रोजगार  के  साधन  तो  बहुत  हैं  लेकिन  यदि  सबको  रोजगार  मिल  जायेगा  तो    धन , पद  और  शक्ति  के  अहंकारियों   की  सनक ,  अनुत्पादक  शौक  कैसे  पूरे  होंगे  ?    युग  के  साथ  इस  तरह  के  शौक  या  सनक  का  रूप  भी  बदल  गया  है   l  धर्म ,  जाति    के  आधार  पर  होने  वाले  दंगे , आन्दोलन , नारे  बाजी , जय-जयकारा  ,  भगदड़  ,  सामूहिक  रूप  से  विरोध  करना  , कीचड़  उछालना  ,  अपना  शक्ति  प्रदर्शन  करना  ---यह  सब  ऐसे  शौक  के  कुछ  रूप  हैं  l  अमीरों  के  पास  अपार  धन  हैं ,  उन्हें  अपने  ऐसे   अनुत्पादक    शौक  को  पूरा  करने  के  लिए  पर्याप्त   मानव -संसाधन  मिल  जाते  हैं   l  सबका  काम  चलता  जाता  है  ,  उसका  परिणाम  समाज  में  चाहे  जैसा  हो  !   अब  लोगों  ने  कर्मफल  से  डरना  छोड़  दिया  है   और  अपने  हर  गलत  कार्य  को  सही  सिद्ध  करते  हैं   l  प्रत्यक्ष  रूप  से  कोई  स्वीकार  नहीं  करता   कि यह  सब  ---- हैं   लेकिन  मन  में  तो  यही  बात  रहती  है  कि  हर  कार्य  का  पैसा  दिया  जा  रहा  है  l  और  जो  लोग  बेरोजगारी  के  कारण  यह  सब  कार्य  करते  हैं   वे  तर्क  देते  हैं  कि  आखिर  मेहनत  तो  कर  रहे  हैं   l  यह  कलियुग  की  सबसे  बड़ी  समस्या  है  कि   लोग  नैतिक  नियम , मर्यादा  भूलते  जा  रहे  हैं  l  सबसे  बड़ा  संकट   मानवता  पर  है  l  धर्म  का  रूप  चाहे  जो  हो  ,  सबसे  जरुरी  है  कि   मनुष्य  ' इनसान  ' बने  l