4 February 2025

WISDOM ----

 एक  मनुष्य  किसी  महात्मा  के  पास पहुंचा   और  कहने  लगा ---- " महाराज जी  !  जीवन  थोड़े  समय  का  है  ,  इसमें  क्या -क्या  करें  ?  बाल्यकाल  में  ज्ञान  नहीं  रहता   और   युवावस्था  में  कुटुंब  का  भरण -पोषण   की  जिम्मेदारी  और  सांसारिक  समस्याएं  रहती  हैं   और  बुढ़ापा   ऐसा  कि  नींद नहीं  आती  और  रोगों  का  उपद्रव  बना  रहता  है  ,  ऐसे  में  लोक -सेवा  कब  करें  ?  समय  ही  नहीं  मिलता  !  ऐसा  कहकर  वह  उदास  होकर  रोने  लगा  l  उसे  रोता  देख  महात्मा  भी  रोने  लगे  l  उस  व्यक्ति  ने  महात्मा  से  पूछा  ---"  आप   क्यों  रोते  हैं  ? "  महात्मा  ने  कहा --- "  क्या  करूँ  /  खाने  के  लिए  अन्न  चाहिए  ,  अन्न  उगाने  के  लिए  जमीन  चाहिए  l  भगवान  ने  जो  पृथ्वी   बनाई  उस  पर  पहाड़  हैं , समुद्र  , है , नदियाँ  हैं , जंगल  जो  थोड़ी -बहुत  शेष  है  उस  पर  भू -माफियों  का  कब्ज़ा  है , मेरे  लिए  कोई  जमीन  नहीं  है  , मैं  क्या  करूँ  ?  भूखा  न  मरूँगा  !  "  उस  व्यक्ति  ने  कहा  --- "  यह  सब  होते  हुए  भी  तुम  जिन्दा  हो , अच्छी  सेहत  है  !  फिर  रोते  क्यों  हो  ?  "  महात्मा  तुरंत  बोले  ---- "  तुम्हे  भी  तो  यह  बहुमूल्य  जीवन  मिला  l  समय  ही  जीवन  है  ,  जो  समय  का  उचित  प्रबंधन  करते  हैं  , वे  उसी  24  घंटे  में  बहुत  कुछ  हासिल  कर  लेते  हैं  l   जो  आलसी  हैं  , काम  से  जी  चुराते हैं  ,  वे  ही  ' समय  नहीं  मिलता  ' की  रट   लगाते  हैं  l "   तुम  समय  का  प्रबंधन  कर  उसका  सदुपयोग  करो  l