23 February 2025

WISDOM ----

  एक  कथा  है  ---- महाराज  तुर्वस  ने  राजसूय  यज्ञ  किया  , उसके  समापन  के  अवसर  पर   सांस्कृतिक    समारोह  का  आयोजन  किया  l  इस   समारोह   में   महर्षि  जैमिनी   भी  सम्मलित  हुए  l  देवपूजन  के   बाद  राजकुमारी  अर्णिका  ने  भावभरी  नृत्य -नाटिका  प्रस्तुत  करनी  आरम्भ  की  l  पूरी  सभा  इस  प्रस्तुति  को  मुग्ध  होकर  देख  रही  थी  लेकिन  महर्षि  की  आँखों   से  अविरल  अश्रुधार  बह  निकली   l  राजकुमारी  ने  महर्षि  से  पूछा  ---- "क्या  मुझसे कोई  भूल  हुई  महर्षि  ?  आपकी  आँखों  से  गिरते  हुए  इन  आंसुओं  का  कारण  पूछ  सकती  हूँ  ? "  महर्षि  बोले ---- "  नहीं  पुत्री  !  तुम्हारी  प्रस्तुति  तो  त्रुटिहीन  है  l  ये  अश्रु  तो  भविष्य  की  आशंका  के  हैं  l  मुझे  दिखाई  पड़ता  है  कि  आज  जो  संगीत  शास्त्रों  पर  आधारित  है   और  मानवीय  चेतना  में  संस्कार  जाग्रत  करने  का  माध्यम  है  ,  वही  एक  दिन   कामुकता  और   अश्लीलता  भड़काने  का   साधन  बनेगा  l  कलियुग  में  ऐसा  समय  भी  आएगा  कि  जब  लोग   संगीत  को  दैवी  गुणों  के  लिए  नहीं  ,  दूषित  भावनाओं  के  विस्तार  के  लिए   उपयोग  करेंगे  l  "  राजकुमारी  अर्निका  ने  प्रश्न  किया  ---- "  क्या  कोई  उपाय  है   जिससे  संगीत  की  परंपरा   अक्षुण्ण  रहे   और  इसकी  मर्यादा   को  चोटिल  न  होना  पड़े  ? '    महर्षि  ने  उत्तर  दिया ---- "  उपाय  एक  ही  है  कि  भारतीय  चिन्तन  में   उस  वैदिक  संस्कृति  के    गुण  बीज  रूप  में  सुरक्षित  रहें  ,  जो  आज  इसे    गौरवान्वित  करने  का  आधार  बने  हैं  l  "  महर्षि  जैमिनी  की  आशंका  आज  स्पष्ट  रूप  से  सत्य  ही  दिखाई  पड़  रही  है  l  न   केवल  संगीत    बल्कि    फिल्म , साहित्य  ,  कला  में   कलाकार  अश्लीलता  के  प्रदर्शन  पर  उतारू  हैं  ,  अपनी  संस्कृति  को  भूल  गए  हैं  l  कामुक  और  भड़कीला  प्रदर्शन  समाज  की  मानसिकता  को  प्रदूषित  करता  है  l  कोई  भी  धर्म  और  संस्कृति  चिरकाल  तक  अक्षुण्ण  बनी  रहे  ,  इसके  लिए  अनिवार्य  है  ---श्रेष्ठ  चरित्र  निर्माण  l  सभी  को  जागने  की  जरुरत  है  कि  कौन  स्वेच्छा  से  अश्लीलता  का  प्रदर्शन  कर  रहा  है  और  कौन  अपनी  दमित  कामना , वासना  की  पूर्ति  के  लिए  अश्लीलता  को  बढ़ावा  दे  रहा  है  ,  लोगों  की   कमजोरियों  का  फायदा  उठाकर   उन्हें   संस्कृति  का  हनन  करने  वाले  कार्यों  को   करने  की  लिए  बाध्य  कर  रहा  है  l  चारित्रिक  पतन  के  कारण  ही  भगवान  श्रीकृष्ण  का  यादव  वंश  आपस  में  ही  लड़कर  नष्ट  हो  गया  ,  द्वारका  समुद्र  में  डूब  गई   l  भगवान  श्रीकृष्ण  का  संसार  को  एक  सन्देश  है  ,  उन्होंने  संसार  को  चेताया  है  कि  जब  उनकी  द्वारका  डूब  सकती  है   तो  इन  कमजोरियों , विकृतियों  को  लेकर  कोई  कैसे  बच  सकता  है  l 

No comments:

Post a Comment