10 February 2025

WISDOM ------

   पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---- "  संसार  में  वैभव  रखना ,  धनवान  होना  कोई  बुरी  बात  नहीं  ,  बुराई  तो  धन  के  अभिमान  में  है  l  वैभव  असीम  मात्रा  में  कमाया  तो  जा  सकता  है  ,  पर  उसे  एकाकी  पचाया  नहीं  जा  सकता  l  धन -संपत्ति   और  ज्ञान  में  वृद्धि  के  साथ -साथ   यदि  मनुष्य  का  ह्रदय  विकसित  हो  ,  चिन्तन  परिष्कृत  हो  ,  उसमें  ईमानदारी  , उदारता  ` सेवा  आदि  सद्गुण  हो  तभी  वह  धन  और  ज्ञान  सार्थक  होगा  l  अन्यथा  पैनी  अक्ल   और  अमीरी  विनाश  के  साधन  होंगे  l "  आध्यात्मिक  मनोवैज्ञानिक    कार्ल  जुंग  की  यह  स्पष्ट  मान्यता  थी  कि  मनुष्य  की  धर्म , न्याय , नीति  में  अभिरुचि  होनी  चाहिए   l  यदि  इस  दिशा  में   प्रगति  न  हो  पाई  तो   अंतत:  मनुष्य  टूट  जाता  है   और  उसका  जीवन  निस्सार  हो  जाता  है  l "  

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