समय परिवर्तनशील है l विज्ञान की नवीन खोजों के साथ लोगों की रूचि , तौर -तरीके भी बदलते जाते हैं जैसे कुछ वर्षों पहले तक लोग पिक्चर हाल में फिल्म देखने जाया करते थे l उसके बाद घर में ही टीवी पर देखना शुरू हुआ तो अनेक पिक्चर हाल बंद हो गए , अब सब कुछ मोबाइल पर ही उपलब्ध है l विज्ञानं ने इतनी सुविधा दी है कि हम अपनी कुर्सी पर बैठे -बैठे सारे संसार से जुड़ सकते हैं l यदि कोई क्षेत्र इन परिवर्तनों से बहुत कम प्रभावित हुआ है तो वह है --कथा , साधु -संतों के प्रवचन , धर्म पर आधारित मेले आदि l सभी कथावाचकों , संतों के वचन , कथाएं मोबाइल पर ही उपलब्ध हैं , कई संतों का छुपा हुआ रूप भी समाज के सामने है , फिर भी लाखों की भीड़ इकट्ठी हो जाती है l कई ऐसे धार्मिक उत्सव हैं जहाँ भीड़ की वजह से लोगों का बुरा हाल हो जाता है लेकिन फिर भी भीड़ उमड़ी पड़ती है इसका एक कारण है --भेड़ चाल और दूसरा सबसे बड़ा कारण है कि लोग धर्म भीरु होते हैं और चालाक और शातिर व्यक्ति उनकी इस भीरुता का फायदा उठाने में माहिर होते हैं l कहते हैं कलियुग में दैवी शक्तियां बहुत ही सीमित क्षेत्र में होती हैं लेकिन आसुरी शक्तियां रावण के साम्राज्य की तरह बहुत विशाल होती है l आसुरी शक्तियों के प्रमुख अस्त्र हैं सम्मोहन , वशीकरण , बहकाना , मन को डांवाडोल कर देना l विभिन्न तरीकों से मन को इतना कमजोर कर देना कि व्यक्ति थक -हार जाये , उस भेड़ चाल का हिस्सा बन जाए l रावण ने सूर्पनखा को इसी लिए भेजा था कि वह अपनी माया से राम , लक्ष्मण को अपने वश में कर ले लेकिन वह भगवान थे , उन पर माया नहीं चली l सामान्य व्यक्ति के लिए मायावी विद्या से बचना बहुत मुश्किल है l तंत्र आदि मायावी शक्तियां प्राचीन काल से इस पृथ्वी पर है , विभिन्न देशों में यह सब भिन्न नामों से है l अब इस तंत्र के साथ विज्ञान मिल गया तो यह भयावह हो गया l मनुष्य अपनी आसीमित कामनाओं के कारण अपनी बुद्धि का दुरूपयोग करता है l
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