31 January 2020

WISDOM -----

' अहंकार  एक  भयानक  रोग  है   l   इसकी  खास  बात  यह  है  कि   यदि  व्यक्ति  सफल  होता  है   तो  उसका  अहंकार  भी  उसी  अनुपात  में  बढ़ता  जाता  है    और  वह  विशाल  चट्टान  की  भांति  जीवन  के  सुपथ ,   सत्यपथ  या  आध्यात्मिक  पथ  को  रोक  लेता  है  l
  इसके  विपरीत  यदि  व्यक्ति  असफल  होता  है   तो  उसका  अहंकार  एक  घाव  की  भांति  रिसने  और  दुखने  लगता  है   l   साथ  ही  धीरे - धीरे  मन  में  हीनता  की  ग्रंथि  बन  जाती  है  ,  जो  सदा - सर्वदा  डराती   रहती  है   l   अहंकार  भक्ति  और  ज्ञान  दोनों  के  लिए  ही  बाधक  है  l   हमारा  आध्यात्मिक  उत्थान ,  आत्मिक  उत्थान  ,  अपने  ही  अहंकार  के  कारण  अवरुद्ध  है   l 

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