16 August 2020

WISDOM ----

     संत  तुकाराम   ने  सेवा  धर्म  को  भी  ईश्वर  भक्ति माना  l   उन्होंने  सबसे  पहले  पूर्वजों  द्वारा  स्थापित   बिट्ठल  मंदिर  का   जीर्णोद्धार  कराया  l   तुकाराम  के  पास  धन  तो  था  नहीं  ,  उन्होंने  श्रमदान  के  द्वारा  इस  कार्य  को  पूर्ण  किया   और  इसी  को  भगवान   की  कायिक  सेवा  मान  लिया  l   इसके  लिए  तुकाराम  ने  स्वयं  पहाड़  से  पत्थर  लाकर  एकत्र   किए ,  मिटटी  भिगोकर  गारा  तैयार  किया   और  फिर  उसकी  दीवार  बनाई  l   यह  सब  कार्य  उन्होंने  अपना  पसीना  बहाकर   किया  l   अपने  इस  उदाहरण  से  उन्होंने  यह  सन्देश  दिया  कि   केवल  कीर्तन  और  नाम  जप   ही  भगवान  की  भक्ति  के  चिन्ह  नहीं  हैं  ,  वरन  किसी  प्रकार  की   प्रत्यक्ष  सेवा   भगवद् भक्ति   का  ही  दूसरा  रूप  है  l 

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