16 February 2025

WISDOM ------

  पं . श्रीराम  शर्मा जी  के  विचार हमें  जीवन  जीने  की  कला  सिखाते  हैं  l    आचार्य श्री  लिखते  हैं ---- "  हमारे  मार्गदर्शन  के  लिए , दिशाबोध  के  लिए  , परेशानियों  व  कठिनाइयों  को  सहने  के  लिए   जीवन  में  कोई  न  कोई  तो  होना  चाहिए  l  यह  स्थान  यदि  भगवान  का  स्थान  हो   तो  मनुष्य  आसानी  से  कठिन  और  जटिल  परिस्थितियों   से  लड़ना  सीख  जाता  है  l  ईश्वर  से    --- माँ , पिता , भाई  , मित्र ,  बाबा , बालक ---किसी  भी  रूप  में  रिश्ता  रखा  जा  सकता  है  l  श्रद्धा  और  विश्वास से  जब  हम  उन्हें  पुकारेंगे   तो  अपनी   अंतरात्मा   से , या  कहीं  न  कहीं  से  हमें  अपनी  समस्या  का  समाधान , सकारात्मक  नजरिया  अवश्य  मिल  जाता  है  l "                  आचार्य श्री  लिखते  हैं  ---- " विपदाएं  तो  हर  किसी  के  जीवन  में  आती  हैं  ,  यदि  इन  विपदाओं  में  हम  अकेले  होते  हैं  ,  तो  यही  विपदाएं  हमारे  लिए   समस्या  बन  जाती  हैं  ,  हमारा  जीवन  तहस -नहस  कर  देती  हैं  ,  हम  से  हमारा  बहुत  कुछ  छीन  लेती  हैं  l  परन्तु  यदि  इन  विपदाओं  में   भगवान  के  प्रति  समर्पण  का  भाव  हमारे  साथ  है  ,  तो  ये  विपदाएं  हमारे  लिए  वरदान  बन  जाती  हैं   l   भगवान  का  हमारे  साथ  होना   एक  ऐसा  विश्वास  है  ,  जो  हमें  कठिन  पलों  में  जबरदस्त  संबल  देता  है  ,  सकारात्मकता  से  जोड़ता  है  ,  जीवन  को  आशा  भरी  नजरों  से  देखने   और  इन  जटिल  पलों  में  भी   बेहतर  करने  के  लिए  प्रेरित  करता  है   l  जीवन  का  बहुत  कुछ  दांव  पर   लगे  होने  पर  भी   भगवान  के  साथ   होने  का  भाव  का  होना  ,  ऐसा  मानसिक  एहसास   देता  है  कि  भले  ही   जीवन  में  बहुत  कुछ  गंवाया  जा  रहा  है  ,  लेकिन  फिर  भी  बहुत  कुछ  हमारे  पास  है  ,  जो  बेशकीमती  है  l  "     आचार्य  श्री  के  इन  कथन  के  एक -एक  शब्द  की  सत्यता  केवल  वही  अनुभव  कर  सकता  है    जिसे  ईश्वर  पर  अटूट  श्रद्धा   और  विश्वास  हो   और   जो  ईश्वर  के  दिखाए  मार्ग  पर  चलने   के  लिए  प्रयत्नशील  हो   l  

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