एक संत नदी में स्नान कर रहे थे , उन्तहोंने देखा कि एक बिच्छू पानी में डूब रहा है l उन्हें दया आ गई और उन्होंने उसे बचाने के लिए अपनी हथेली में लिया तभी उस बिच्छू ने उन्हें काट लिया l l संत के हाथ से बिच्छू छिटक कर पानी में जा गिरा l संत ने उसे बचाने के लिए पुन" हथेली पर लिया , बिच्छू ने उन्हें पुन: काट लिया l ऐसा तीन बार हुआ l संत उसे बचाने की कोशिश करते और वह बार -बार उन्हें काट लेता l इस घटना से संत ने अपने शिष्यों को समझाया कि दया और करुणा भी जरुरी है लेकिन हमें होश के साथ जीना चाहिए l जो दुष्ट प्रवृत्ति के लोग हैं , छल , कपट , धोखा , षड्यंत्र करते हैं , बिना किसी कारण के केवल अहंकार और ईर्ष्यावश दूसरों को सताते हैं , उनसे आप कितना भी प्रेम का व्यवहार करोगे , वे अपनी दुष्टता नहीं छोड़ेंगे , जब भी मौका मिलेगा वे आपका अहित करने से नहीं चूकेंगे l ऐसे लोगों से न ही मित्रता करे और न ही बैर रखे l ऐसे दुष्ट प्रवृत्तियों के व्यक्तियों से दूरी बना के रखे l मनुष्य क्योंकि एक बुद्धिमान प्राणी है , वह जब किसी के साथ धोखा , छल , षड्यंत्र करते हैं तो इसके मूल में उनका कोई बहुत बड़ा स्वार्थ और लालच छिपा होता है l इनसे आप चाहे दूरी बना लो लेकिन अपने स्वार्थ और लालचवश वे आपका पीछा नहीं छोड़ते l इसलिए ऐसे लोगों से बहुत सावधान रहने की जरुरत है l ये लोग समाज में मुखौटा लगाकर रहते हैं ताकि इनकी असलियत कोई जान न सके l इनसे पीड़ित किसी व्यक्ति को यदि उनकी असलियत का पता चल जाये तो उसकी खैर नहीं , अपनी गलतियों पर परदा डालने के लिए वे उस पीड़ित पर ही सारा दोष मढ़ने लगते हैं , उसे ही दोषी ठहराते हैं l इनसे बचने के लिए जागरूकता बहुत जरुरी है l
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