7 March 2026

WISDOM ------ आखिरी दांव

 लघु कथा ---- प्राचीन  काल  की  बात  है    एक नगर  सेठ  था  l  उसके  पास  अपार  धन  संपदा  थी  l  सुख -वैभव  की  कोई  कमी  नहीं  थी  l  लेकिन  उस  सेठ  को  संतोष  नहीं  था  l  जब  तक  वह  दूसरे  सेठों  का  कुछ  छीन  न  ले  ,  उसे  चैन  की  नींद  नहीं  आती  थी  l  वह  दूसरों  का  केवल  धन  ही    नहीं  ,  सब  कुछ   छीनना  चाहता  था ,  दूसरों  का  सुख -चैन   छीनकर  ही  उसे   आनंद  आता  था  l  वह  अपने  जासूसों  को  भेजकर  यह  जानकारी  लेता  था  कि  किसके  पास  क्या  सबसे  अच्छा  है  ?   किसी  के  पास  खुश  होने  के  लिए  और  गर्व  अनुभव  करने  के  लिए  क्या  है  ?  वही  उससे  छीन  लिया  जाये  l  उसके  जासूसों  ने  उसे  बताया  कि  उसके  नगर  से  कुछ   दूरी    पर  एक  नगर  है   , वहां  एक  बहुत  सुन्दर  बगीचा  है  ,  वहां के  सभी  लोग  उस  बगीचे  को  देवता  मानकर  पूजते  हैं  और  वहां  सैर  कर  के  इतने  प्रसन्न  होते  हैं  कि  उनकी  ख़ुशी  का  वर्णन  नहीं  किया  जा  सकता  l  यह  सुनकर  उस  लालची  सेठ  की  नींद  उड़  गई  l  वह  दिन -रात  यही  सोचने लगा  कि  कैसे  उस  बगीचे  पर  अपना   कब्जा    किया  जाए  l  साम , दाम , दंड , भेद  हर  तरीके  से  उसने  सेठ  को  अपने  वश  में  कर  लिया   और  उससे  कहा  कि  इस  सुन्दर  बगीचे  पर  वह  अपना  अधिकार  चाहता  है  l  बगीचे  के  मालिक  उस  सेठ  ने  कहा  ---यदि  बगीचे  का  अधिकार  मैं  तुम्हे  दे  दूंगा   तो  मेरी  प्रजा  मेरा  सम्मान  नहीं  करेगी  और  मेरा  जीवन  जीना  मुश्किल  हो  जाएगा  l  लालची  सेठ  ने  अगली  चाल  चली  , उसने  कहा  ---तुम  गुपचुप  रूप  से   मुझे  इस  बगीचे  का   अधिकार  सौंप  दो  ,  किसी  को  पता  न  चलेगा  ,  मेरे  मन  को  संतोष  हो  जायेगा  और  तुम्हारा  सम्मान  भी  बना  रहेगा  l  सेठ  आखिर  राजी  हो  गया  ,  उसने  बड़े  गोपनीय  तरीके  से  उस  सुन्दर  बगीचे  का  मालिकाना  हक  लालची  सेठ  को  सौंप  दिया  l  कुछ  ही  दिन  बाद   उस  लालची  सेठ  ने   उसको  मरवा  दिया  और   उस  बगीचे  पर  अपना  अधिकार   सबके  सामने  दिखा  दिया l   इस  कथा  से  हमें  क्या  शिक्षा  मिलती  है  ?   हमें  अपना  आखिरी  दांव  कभी  किसी  को  नहीं  बताना  चाहिए  l  जब  शेर  जंगल  का  राजा  बना  तब  बिल्ली  ने  उसे   सारे  गुर  सीखा  दिए  l  शेर  ने  बिल्ली  से  कहा  --कोई  और  हुनर  हो  तो  वह  भी   सिखा  दो  ताकि  मैं  एक  कुशल  प्रशासक  बन  सकूँ  l  बिल्ली  ने  कहा  -- मैंने  तुम्हे  वह   सब  कलाएं  सिखा  दीं   जो  मुझे  ज्ञात  हैं  l  शेर  के  मन  में  कुटिलता  आ  गई  ,  उसने  सोचा  क्यों  न  मैं  पहला  शिकार  इस  बिल्ली  का  ही  करूँ  ,  यह  सोचकर  वह  बिल्ली  पर  झपटा  l  बिल्ली  सतर्क  थी  वह और  तुरंत  पेड़  पर  चढ़  गई  l  शेर  को  पेड़  पर  चढ़ना  नहीं  आता  है  l  अब  उसने  बिल्ली  से  प्रार्थना  की  कि  वह  उसे  पेड़ पर  चढ़ना  भी  सिखा  दे  l  बिल्ली  होशियार  थी   , उसने  कहा  ,  नहीं  1  यह  मेरा  आखिरी  दांव  है   यदि  मैंने  इसे  तुम्हे  सिखा  दिया  तो  तुम  मुझे  ही  खा  जाओगे  l