लघु कथा ---- प्राचीन काल की बात है एक नगर सेठ था l उसके पास अपार धन संपदा थी l सुख -वैभव की कोई कमी नहीं थी l लेकिन उस सेठ को संतोष नहीं था l जब तक वह दूसरे सेठों का कुछ छीन न ले , उसे चैन की नींद नहीं आती थी l वह दूसरों का केवल धन ही नहीं , सब कुछ छीनना चाहता था , दूसरों का सुख -चैन छीनकर ही उसे आनंद आता था l वह अपने जासूसों को भेजकर यह जानकारी लेता था कि किसके पास क्या सबसे अच्छा है ? किसी के पास खुश होने के लिए और गर्व अनुभव करने के लिए क्या है ? वही उससे छीन लिया जाये l उसके जासूसों ने उसे बताया कि उसके नगर से कुछ दूरी पर एक नगर है , वहां एक बहुत सुन्दर बगीचा है , वहां के सभी लोग उस बगीचे को देवता मानकर पूजते हैं और वहां सैर कर के इतने प्रसन्न होते हैं कि उनकी ख़ुशी का वर्णन नहीं किया जा सकता l यह सुनकर उस लालची सेठ की नींद उड़ गई l वह दिन -रात यही सोचने लगा कि कैसे उस बगीचे पर अपना कब्जा किया जाए l साम , दाम , दंड , भेद हर तरीके से उसने सेठ को अपने वश में कर लिया और उससे कहा कि इस सुन्दर बगीचे पर वह अपना अधिकार चाहता है l बगीचे के मालिक उस सेठ ने कहा ---यदि बगीचे का अधिकार मैं तुम्हे दे दूंगा तो मेरी प्रजा मेरा सम्मान नहीं करेगी और मेरा जीवन जीना मुश्किल हो जाएगा l लालची सेठ ने अगली चाल चली , उसने कहा ---तुम गुपचुप रूप से मुझे इस बगीचे का अधिकार सौंप दो , किसी को पता न चलेगा , मेरे मन को संतोष हो जायेगा और तुम्हारा सम्मान भी बना रहेगा l सेठ आखिर राजी हो गया , उसने बड़े गोपनीय तरीके से उस सुन्दर बगीचे का मालिकाना हक लालची सेठ को सौंप दिया l कुछ ही दिन बाद उस लालची सेठ ने उसको मरवा दिया और उस बगीचे पर अपना अधिकार सबके सामने दिखा दिया l इस कथा से हमें क्या शिक्षा मिलती है ? हमें अपना आखिरी दांव कभी किसी को नहीं बताना चाहिए l जब शेर जंगल का राजा बना तब बिल्ली ने उसे सारे गुर सीखा दिए l शेर ने बिल्ली से कहा --कोई और हुनर हो तो वह भी सिखा दो ताकि मैं एक कुशल प्रशासक बन सकूँ l बिल्ली ने कहा -- मैंने तुम्हे वह सब कलाएं सिखा दीं जो मुझे ज्ञात हैं l शेर के मन में कुटिलता आ गई , उसने सोचा क्यों न मैं पहला शिकार इस बिल्ली का ही करूँ , यह सोचकर वह बिल्ली पर झपटा l बिल्ली सतर्क थी वह और तुरंत पेड़ पर चढ़ गई l शेर को पेड़ पर चढ़ना नहीं आता है l अब उसने बिल्ली से प्रार्थना की कि वह उसे पेड़ पर चढ़ना भी सिखा दे l बिल्ली होशियार थी , उसने कहा , नहीं 1 यह मेरा आखिरी दांव है यदि मैंने इसे तुम्हे सिखा दिया तो तुम मुझे ही खा जाओगे l
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