24 February 2026

WISDOM ----

 प्रसिद्ध  कवि  अब्दुर्रहीम  खानखाना  के  पास  एक  व्यक्ति  आया  और  उनसे  पूछने  लगा  कि  जीवन  में  सबसे  महत्वपूर्ण  कौन  सा  संयम  है  ?  उन्होंने  कविता  के  माध्यम  से  उत्तर  दिया  --- " रहिमन  जिह्वा  बावरी  , कही  गई  सरग  पताल  l  खुद  कह  भीतर  घुस  गई  , जूती  पड़े  कपाल  l l   अर्थात  सारे  संयमों  में  वाणी  का  संयम   अत्यंत  महत्वपूर्ण  है  l  जीभ  खुद  तो  बात  कहकर  मुँह  के  अन्दर  चली  जाती  है  , परन्तु  कहने वाले  को   उसका  परिणाम  भुगतना  पड़ता  है  l                                                                                                           वाणी  का  संयम  न  होने  से  महाभारत   का  महायुद्ध  हुआ  l  द्रोपदी  ने  कहा  था  ---' अंधे  का   बेटा  अँधा  होता  है  l '  दुर्योधन  को  पांडवों  से  ईर्ष्या  तो  पहले  से  ही  थी  ,  अब  बदले  की  आग  और   इतनी  तेज  हो  गई   कि   स्वयं  भगवान  श्रीकृष्ण  भी  दुर्योधन  को  समझा  न  सके  l  हर  युग  में  यही  सब  रहा  है  l  जिसके  पास  ताकत  है , शक्ति  है ,  धृतराष्ट्र  का  अँधा  मोह  और  पूरा  समर्थन  है  ,  वह  अपनी  शक्ति  का  दुरूपयोग  करता  है   और  उसका  परिणाम   निर्दोष  व  बेकसूरों  को  भी  भुगतना  पड़ता  है   l  पहले  तो  युद्ध  ऐसे  होते  थे  कि  महिलाएं  व  बच्चे  सुरक्षित  रहते  थे  जैसे  महाभारत  का  महायुद्ध  कुरुक्षेत्र  के  मैदान  में  हुआ  l  खेती  और  सामान्य  जनजीवन  सुरक्षित  रहा  लेकिन  अब  कोई  सीमित  क्षेत्र  नहीं  है  l  कलियुग  में  लोगों  का  नैतिक  पतन  हो  गया  है  ,  युद्ध  व  दंगे  आदि  के  माध्यम  से  वे  अपनी  दमित इच्छाओं  की  पूर्ति  करते  हैं , किसी  से  बदला  लेने  का  उन्हें  यह  सुनहरा  मौका  लगता  है ,  महिलाओं  , छोटे  बच्चों , गर्भस्थ  शिशु  की  जो  दुर्दशा  होती  है  , जैसे  भूत -पिशाच  धरती  पर  नाच  रहे  हों  l  सच्चा  इन्सान  कहाँ  छुपा   है  ?  

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