प्रसिद्ध कवि अब्दुर्रहीम खानखाना के पास एक व्यक्ति आया और उनसे पूछने लगा कि जीवन में सबसे महत्वपूर्ण कौन सा संयम है ? उन्होंने कविता के माध्यम से उत्तर दिया --- " रहिमन जिह्वा बावरी , कही गई सरग पताल l खुद कह भीतर घुस गई , जूती पड़े कपाल l l अर्थात सारे संयमों में वाणी का संयम अत्यंत महत्वपूर्ण है l जीभ खुद तो बात कहकर मुँह के अन्दर चली जाती है , परन्तु कहने वाले को उसका परिणाम भुगतना पड़ता है l वाणी का संयम न होने से महाभारत का महायुद्ध हुआ l द्रोपदी ने कहा था ---' अंधे का बेटा अँधा होता है l ' दुर्योधन को पांडवों से ईर्ष्या तो पहले से ही थी , अब बदले की आग और इतनी तेज हो गई कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण भी दुर्योधन को समझा न सके l हर युग में यही सब रहा है l जिसके पास ताकत है , शक्ति है , धृतराष्ट्र का अँधा मोह और पूरा समर्थन है , वह अपनी शक्ति का दुरूपयोग करता है और उसका परिणाम निर्दोष व बेकसूरों को भी भुगतना पड़ता है l पहले तो युद्ध ऐसे होते थे कि महिलाएं व बच्चे सुरक्षित रहते थे जैसे महाभारत का महायुद्ध कुरुक्षेत्र के मैदान में हुआ l खेती और सामान्य जनजीवन सुरक्षित रहा लेकिन अब कोई सीमित क्षेत्र नहीं है l कलियुग में लोगों का नैतिक पतन हो गया है , युद्ध व दंगे आदि के माध्यम से वे अपनी दमित इच्छाओं की पूर्ति करते हैं , किसी से बदला लेने का उन्हें यह सुनहरा मौका लगता है , महिलाओं , छोटे बच्चों , गर्भस्थ शिशु की जो दुर्दशा होती है , जैसे भूत -पिशाच धरती पर नाच रहे हों l सच्चा इन्सान कहाँ छुपा है ?
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