3 June 2026

WISDOM -------

  यह  स्रष्टि  कर्मफल  विधान  से  ही  संचालित  है  ,  यदि  आम  बोया  है  तो  आम  ही  मिलेगा  और  यदि  बबूल  बो  दिया  तो  कांटे  ही  मिलेंगे  l  स्वयं  ईश्वर  भी  इस  विधान से  बंधे  है  l  किसी  को  अपने  अच्छे -बुरे  कर्मों  का  फल  इसी  जन्म  में  मिल  जाता  है  लेकिन  कभी  -कभी  किसी  को  अपने  कर्मों  का  फल  कई  जन्मों  के  बाद  मिलता  है  l  हमारे  द्वारा  किए   गए   अच्छे -बुरे  कर्मों  का  फल  हमें  कब , कैसे  और  किस  रूप  में  मिलेगा  , इसे  काल  निश्चित  करता  है  l  इस  विधान  को  समझना  बहुत  कठिन  है  l    हम  महाभारत  में  देखें  तो     धृतराष्ट्र   और  भीष्म पितामह    को  अपने  पिछले  किसी  जन्म  में  किए  पापकर्म  का  यह  परिणाम  यह  मिला  कि  धृतराष्ट्र  नेत्रहीन  हुए  और  भीष्म पितामह  को  शर -शैया   का  कष्ट  सहन  करना  पड़ा  l  महारानी  द्रोपदी  को   भरी  सभा  में  अपमानित  करने  वाले   दु :शासन  को  कठोर  दंड  भोगते  हुए  देखने  के  लिए  तेरह  वर्ष  तक  अपने  खुले  केशों  के  साथ  इंतजार  करना  पड़ा  l  व्यक्ति  संसार  के  किसी  भी  कोने  में  छुप  जाये  , अपने  किए  गए  कर्मों  के  परिणाम  से  वह  बच  नहीं  सकता  l  जो  पापकर्म  व्यक्ति   छिपकर , अँधेरे  में  करता  है  , योजनाबद्ध  तरीके  से  लोगों  को  उत्पीड़ित  करने  के  लिए  करता  है   और  सोचता  है  कि  उसे  किसी  ने  नहीं  देखा   , तो  यह  उसकी  भूल  है  l  यह  सम्पूर्ण  प्रकृति   और  कण -कण  में     ईश्वर  है    जो  उसे  देख  रहे  हैं  l  उनके  पास   प्रत्येक   प्राणी  के  कर्मों  का  हिसाब  है  l  कलयुगी  संसार  में  तो  न्याय  पर  बड़ा  प्रश्न चिन्ह  है   लेकिन   भगवान   के  दरबार  में  ' देर  है  , पर  अंधेर नहीं  l '  ऋषि  कहते  हैं  -- ' जैसे  हजारों  गायों  के  मध्य  बछड़ा  अपनी  माँ  को  स्वत:  ढूंढ  निकालता  है  , वैसे  ही  अपने  किए  गए  कर्म   आपको  किसी  भी  योनि  में  सहजता  से  ढूंढ  निकालते  हैं  l  इसलिए  सदा  शुभ  कर्म  ही  करना  चाहिए  l "