19 June 2026

WISDOM -----

हमारे  महाकाव्य  हमें  बहुत कुछ  सिखाते  हैं  l  प्रत्येक  व्यक्ति  के  अपने  संस्कार   हैं  कि  वह  क्या  सीखता  है    और  सीखकर    वैसा  ही  आचरण  करता  है  l   अनेक  लोग  महाभारत  के  मामा  शकुनि  और  दुर्योधन  की  तरह  छल , कपट , षडयंत्र  सीख  लेते  हैं  l  अनेक  दु:शासन  की  तरह  नारी  का  अपमान  और  उत्पीड़न  करना  सीख  जाते  हैं  l  जो  ज्यादा  बुद्धिमान  हैं  वे  शल्य  मामा  की  तरह    अपने  प्रतिद्वंदी  का  मनोबल  गिराने  का  हर  संभव  प्रयास  करते  हैं  ,  जिसने  उन  पर  विश्वास  किया  , उसी  के  साथ  धोखा  करते  हैं  l  बुराई  सीखना  बहुत  सरल  है  इसलिए  लोग  इन्ही  सब  तरीकों  से  आज  के  युग  में   धन  कमाने  और  सफलता  प्राप्त  करने  का  प्रयास  करते  हैं  l    इसी  कारण  संसार  में  इतनी  अशांति  और  तनाव  है    l  यदि  महाभारत  से  मनुष्य  कर्मफल  विधान  की  सत्यता  को  समझ  ले   तो  जीवन  की  सारी  उलझने  समाप्त  हो  जाएँ  और  संसार  में  भी  सुख -शांति  आ  जाए  l  l  दुर्योधन  आदि  कौरवों  ने  बिना  किसी  वजह  के  , केवल  ईर्ष्यावश  ही  पांडवों  पर  इतने  अत्याचार  किए  l   पांडवों  ने  उनका  कुछ  नहीं  बिगाड़ा  था  , फिर  भी    दुर्योधन  ने  उन्हें  मारने  के  लिए  और  उनका  अस्तित्व  मिटाने  के  लिए   छल , कपट  और  षडयंत्र  की  अति  कर  दी  l  इसका  परिणाम   सबके  सामने  है    , कौरव  वंश  का  नामोनिशान  मिट  गया  l    पांडव  सन्मार्ग  पर  थे  , उन्होंने  नैतिकता  के  विरुद्ध  कोई  आचरण  नहीं  किया   इसलिए  स्वयं  भगवान  श्रीकृष्ण  ने  उनके  रथ  की  बागडोर   संभाली  l  उन्होंने  पांडवों  को  हर  मुसीबत  से  बचाया   और  जब  अश्वत्थामा  ने  अभिमन्यु  की  पत्नी   उत्तरा   के  गर्भ  को  लक्ष्य  करके  ब्रह्मास्त्र  चलाया    तब  भगवान  ने  उत्तरा  के  गर्भ  में  प्रवेश  कर   पांडवों  के  वंश  की  रक्षा  की  l  पांडवों  के  वंशज  परीक्षित  का  जन्म  भगवान  श्रीकृष्ण  की  कृपा  से  ही  हुआ  l  यह  सब  आज  भी  इस  धरती  पर  है  जिन्होंने  भी  अपने  जीवन  की  सही  राह  चुनी  है  , उन्हें  ईश्वर  की  कृपा  प्राप्त  होती  है  l  यह  मनुष्य  का  अज्ञान  और  अहंकार  है  कि  वह  इस  कृपा  को  देख  और  समझ  नहीं  पाता  l