17 June 2026

WISDOM ------

   असुरता  का  अस्तित्व  प्रत्येक  युग  में  रहा  है  l  आसुरी  प्रवृति , छल , कपट , षडयंत्र , धोखा , भ्रष्टाचार , अनैतिकता , पाशविक स्तर  के  घोर  अपराध  -----यह  सब  पीढ़ी -दर -पीढ़ी   चलते  ही  रहते  हैं  l  संस्कार  परिवर्तन  सबसे  कठिन  कार्य  है  , कोई  इस  कठिन  राह  पर  चलना  भी  नहीं  चाहता  है  l  संतान  सब  की  होती  हैं  , इसलिए  यह  असुरता   कभी  समाप्त  नहीं  होती  l  संसार  तो  अपनी  गति  से  चलता  है  l  अँधेरा  है , तभी  उजाले  का  महत्त्व  है  l  ईश्वर  ने  मनुष्य  को  चयन  की  स्वतंत्रता  दी  है  ,  यह  हमारी  इच्छा  है  कि  हम  असुरता  की  राह  चुनते  हैं  या  देवत्व  की  l  जब  मनुष्य  कोई  गलत  राह  चुनता  है ,  तब  दैवी  शक्तियां  उसे  विभिन्न  तरीके  से  संकेत  देती  हैं  कि  इस    गलत  मार्ग  पर  नहीं  जाओ  , ऐसी  गहरी  खाई  में  गिरोगे  कि   संभलना   मुश्किल  होगा  l  लेकिन  मनुष्य  अपने  अहंकार  में  इन  संकेतों  को  अनदेखा  कर  देता  है  ,  कुछ  पल  मौन  नहीं  रहता  कि  प्रकृति  के  संकेतों  को  समझ  सके  l  जैसे  कर्म  करता  है  उसका  परिणाम  उसे  भोगना  ही  पड़ता  है  l  मनुष्य  को  अपने  अच्छे -बुरे  कर्मों  का  फल  कब  और  कैसे  मिलेगा  , यह  काल  तय  करता  है  l  काल  की  गति  को  कोई  नहीं  समझ  सकता  है  l  पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  कहते  है  ----'सत्कर्म  का  कोई  भी   मौका    हाथ  से  न  जाने  दो  l  यह  सत्कर्मों  की  पूंजी  हमारी  हर  तरह  से  रक्षा  करती  है  l  '  आसुरी  प्रवृति  क्या  है  ?  यह  मन  का  विकार  ही  तो  है  l   गीता  में  भगवान  ने  कहा  है  कि   निष्काम  कर्म  से  मन  के  विकार  दूर  होते  हैं  l  जब  मन  का   मैल   साफ़  हो  गया  तो   मनुष्य  सही  राह  चुनेगा  , देवत्व  की  ओर  कदम  बढ़ाएगा  l