17 July 2026

WISDOM -----

   कभी  -कभी  ऐसा  वक्त  आता  है  कि  दो  पक्षों  में  युद्ध  जैसी  स्थिति  होती  है   l  एक  पक्ष  आक्रमण  पर  आक्रमण  करता  जाता  है   लेकिन  दूसरा  पक्ष     वार  नहीं  करता  , केवल   अपनी  सुरक्षा  का  ही  प्रयास  करता  है  l  जैसे  मथुरा  का  राजा  कंस  कितना  शक्तिशाली  था  ,  उसके  पास  सब  कुछ  था  लेकिन  वह   भयभीत  था   और  भयभीत  भी   था  तो   छोटे  से   दूध  पीते  बच्चे  कृष्ण  से  l  मृत्यु  का  भय , सत्ता  को  खोने  का  भय  ऐसा  ही  होता  है  l  कंस  आयु  में   कृष्ण  से  कितना  बड़ा  था , उसके  पास  विशाल  सेना  थी , अनेक  मायावी  राक्षस  थे  , अनेक  शक्तिशाली  राजा  उसके  मित्र , संबंधी  थे  l  क्या  आश्चर्य  है  कि  फिर  भी  वह  डरता  था  l   उसने  पूतना  को   और  अनेक  राक्षसों  को  भेजा  कि  वे  किसी  तरह  कृष्ण  का  अंत  कर  दें  l  श्रीकृष्ण  तो  स्वयं  ईश्वर  थे  , वे  बाल रूप  में  थे  तो  क्या  , उन्हें  पता  था  कि  ये  सब  राक्षस  कंस  के  भेजे  हुए  हैं  ,  उन्होंने  केवल  अपनी  सुरक्षा  के  लिए  उन  राक्षसों  को  मारा  ,  उन्होंने  कंस  को  मारने  का  कोई  प्रयास  नहीं  किया  l  कंस  के  सिर  पर  जब  मृत्यु  का  साया   मंडराने  लगा    तब  उसने  स्वयं  ही  कृष्ण  और  बलराम  को  मथुरा  बुला  लिया  ,  अपनी   मृत्यु    की  व्यवस्था  स्वयं  ही  कर  ली  l   इस  प्रसंग  का  अर्थ  यही  है  कि   इस  संसार  में  सभी  के  जन्म , मृत्यु  , सत्ता , प्रतिष्ठा ,  धन-वैभव , सुख  ---     आदि  प्रत्येक  घटना  का  समय  निश्चित  है  ,  इन  सब  को  खोने  के  भय  से  किसी  को  सताना , उसको  मारने  का  प्रयास  करना   व्यर्थ  है  l    लोग  इसी  भय  से  न  तो  स्वयं  चैन  से  रहते  हैं  और  न  ही  दूसरे  को  चैन  से  रहने देते हैं  l  कंस  ने  काल  को  समझा  नहीं  , स्वयं  को  ही  भगवान   समझा   , समय रहते  चेता  नहीं  इसलिए  काल  ने  उसे  पटक -पटक  कर  मारा  l  

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