26 July 2026

WISDOM ------

 महाभारत  के  विभिन्न  प्रसंग   हमें  शिक्षा  देते  हैं  , सिखाते  हैं  कि  कैसे  हमें   होश  में  रहकर  जीवन  जीना चाहिए  l  छोटी  सी  चूक  से  बहुत  बड़ा  नुकसान  हो  जाता  है  l  --महाभारत  का  युद्ध  समाप्त  हो  गया  था  l  दुर्योधन     ने    18  दिन  चले  इस  युद्ध  में  अश्वत्थामा  को  सेनापति  नहीं  बनाया  था  ,  संभवतः  यह  ईश्वर  का  ही  कोई  विधान  होगा   l  अब  दुर्योधन  युद्ध  भूमि  में    घायल  पड़ा  था   l     दुर्योधन  के  मरणासन्न  होते  ही    युद्ध  तो  समाप्त  हो  गया  था  लेकिन  उसकी  सेना  के  अश्वत्थामा  और  कृपाचार्य  तो  जीवित  थे  l  इधर  पांडव  विजय का  जश्न  मनाकर   शिविर  में  निश्चिन्त  होकर  सो  रहे  थे   l  वे  भगवान  श्रीकृष्ण  की  शरण  में  थे  इसलिए  निश्चिन्त  थे  l   उस  समय  श्रीकृष्ण  ने  शिविर  में  प्रवेश  किया  और  पांचों  पांडवों  को  अपने  साथ   शिविर  से  बाहर  नदी  किनारे  चलने  को  कहा  l  पांडव  आज्ञाकारी  थे  इसलिए  बिना  किसी तर्क  के  वे  श्रीकृष्ण  के  साथ  बाहर  निकल  गए  l  पांडवों  के  पाँचों  पुत्र  वहीँ  सो  रहे  थे  ,  उन्होंने  चलने  से   मना    कर  दिया  l    युद्ध  भूमि  में  दुर्योधन  की पराजय  देखकर  अश्वत्थामा  क्रोध    के  कारण  अपना  विवेक  खो  बैठा  और  अर्धरात्रि  में   उसने  पांडवों  के  शिविर  में  प्रवेश  कर   बहुत  उत्पात  मचाया  , कुछ  का  क़त्ल  किया   और  पांडवों  के   पांच    पुत्र  सो  रहे  थे  , उन्हें  अँधेरे  में  पांच  पांडव  समझ  कर  उसने  उनके  सिर  काट  दिए  l  अपना  विवेक  खो  देने  के  कारण  उसके  भीतर  की  आसुरी  प्रवृत्ति  जाग  गई  थी  , उसने  पांडवों   के    वंश  का  अंत  करने  के  लिए   उसने  अभिमन्यु  की  पत्नी  उत्तर  के  गर्भ  को  लक्ष्य  कर  ब्रह्मास्त्र  चला  दिया  था  ताकि  गर्भ  में  स्थित  पुत्र  का  अंत  हो  जाये  l  अश्वत्थामा  के  इन  सब  कृत्यों  का  क्या  परिणाम  हुआ  ,  इसकी  एक  पूरी  कथा  है   लेकिन  यह  प्रसंग  हमें  शिक्षा  देता  है  कि  ---  शत्रु    को  कभी  भी कमजोर  मत  समझो  ,  घायल  शत्रु  और  भी  खतरनाक  होता  है   और  वह  कैसी भी  रणनीति  बनाकर  फिर  से  आक्रमण  कर  सकता  है  l    युद्ध  में  कौरव  वंश  , उनकी विशाल  सेना    सभी  का  अंत  हो  गया  था   लेकिन  पांडव  यह  भूल  गए  कि  अभी  अश्वत्थामा  और  कृपाचार्य  जीवित  हैं  l  पांडवों  की  इस  भूल  ने  उन्हें  ऐसा  दुःख  दिया  जिसकी  भरपाई   अब  संभव  नहीं  थी  l  इसलिए  शत्रु  से  हमेशा  सतर्क  और  सावधान  रहना  चाहिए  l