23 September 2025

WISDOM -----

   आज  संसार  की  सबसे  बड़ी  समस्या  ' तनाव ' की  है  l  यह  समस्या  अनेक   बीमारियों  और  मुसीबतों  को  जन्म  देती  है  l  सबसे  बड़ी  मुसीबत  है  नींद  न  आना  l  ईश्वर  ने  रात्रि  का  समय  निद्रा  के  लिए  बनाया  है  l  प्रात:काल  व्यक्ति  ताजगी  तभी  महसूस  करेगा  जब  उसे  रात  को  अच्छी  नींद  आए  l  गरीब  व्यक्ति  को  तो  पथरीली  जमीन  पर  भी  चैन  की  नींद  आती  है  लेकिन  दुनिया  के  ऐसे  देश  जहाँ   भौतिक  सुख -सुविधाओं  की  कोई  कमी  नहीं  है  , वहां  करोड़ों  लोग  ऐसे  हैं  जिन्हें  नींद  की  गोली  खाने  पर  भी  नींद  नहीं  आती  l  कारण  यही  है  कि   व्यक्ति  भौतिक  सुखों  के  पीछे  इतना  भाग  रहा  है  कि  वह  अध्यात्म  से  दूर  हो  गया  l  जीवन  का  संतुलन  बिगड़  गया  l  अध्यात्म  जीवन  जीने  की  कला  है  l  अध्यात्म  हमें  यही  सिखाता  है  कि  अपने  जीवन  की  बागडोर  ईश्वर  के  हाथ  में  सौंप  दो  और  निश्चिन्त  होकर  कर्म  करो  l  अपना  प्रत्येक  कर्म  ईश्वर  को  समर्पित  करो  , यहाँ  तक  कि  निद्रा  को  भी  l    श्रीदुर्गासप्तशती  में   निद्रा  को  भी  देवी  कहा  गया  है  --'              या  देवी   सर्वभूतेषु  निद्रारूपेण  संस्थिता  l  नमस्तस्यै l  नमस्तस्यै  l नमस्तस्यै नमो नम:  l '  जो  देवी  सब  प्राणियों  में  निद्रा  रूप  से  स्थित  हैं ,  उनको  बारंबार  नमस्कार  l  श्रद्धा  और  विश्वास  से  निद्रा  देवी  को  पुकारो  , वे  कभी  किसी  को  निराश  नहीं  करेंगी  l  

19 September 2025

WISDOM ------

 युग  बदलते  हैं  l  परिवर्तन  प्रकृति  का  नियम  है   l  अजीबोगरीब  घटनाएँ  देखने  को  मिलती  हैं  l   कहीं  लोगों  ने  स्वयं  को   ईश्वर  समझ  लिया  और  उस  अज्ञात  शक्ति  से  मुँह  मोड़कर   युद्ध  में  उलझ  गए  , ' मरो  और  मारो  '  पर  उतारू  हैं  l  कहीं  स्थिति  इसके  विपरीत  है   l  ईश्वर  लोगों  के  कर्मकांड  और  ढकोसलों  से  परेशान  हो  गए  ,  ईश्वर  माला , फूल , घंटी  से ---- परेशान   हो  गए  l  लोग  अपनी  बुराइयों  को  दूर  नहीं  कर  रहे , सन्मार्ग  को  भूल  गए  हैं  , तो  अब  भगवान  ने  ही  अपने  दरवाजे  बंद  कर  लिए  l  प्रकृति  माँ  परेशान  हो  गईं  l  सहन  शक्ति  की  अति  हो  गई  तो  अब  क्रोध  आना  स्वाभाविक  है  l  ' जब  नाश  मनुज  पर  छाता  है  ,  पहले  विवेक  मर  जाता  है  l '    समूचे  संसार  पर  दुर्बुद्धि  हावी  है  ,  बड़े -बड़े  लोग  जिनके  पास  दुनिया  के  सारे  सुख  हैं   लेकिन  मन  की  शांति  नहीं  है  ,  स्वयं  भी  लड़  रहे , निर्दोष  लोगों  को  अपने  अहंकार  की  खातिर  मरने  को  विवश  कर  रहे  l  दुर्बुद्धि  ने  धर्म  के  ठेकेदारों  को  भी  नहीं  छोड़ा  l  आसुरी  शक्तियां  यही  तो  चाहती  हैं   l   वर्षों  पहले  इंग्लॅण्ड  का  साम्राज्य  पूरी  दुनिया  में  था  , संसार  के  विभिन्न  देशों  में   स्वतंत्रता  के  लिए  आन्दोलन  हुए  और  साम्राज्यवाद  का  अंत  हुआ  l  यदि  किसी  एक  का  ही  सब  ओर  साम्राज्य  हो  तो   सारा  दोष  भी  उसी  के  माथे  पर  आता  है  ,  बुरा -भला  सब  सुनना  पड़ता  है  l  इसलिए  अब  आसुरी  शक्तियों  ने  नया  तरीका  खोजा  l  सारे  असुर  अब  एक  हो  गए  , संगठित  होकर   छुपकर   अपने  आसुरी  कार्य  करने  लगे  l  सब  एक  नाव  पर  सवार  हो  गए  , असली  'डॉन '  कौन  है  ?  यह  मालूम  करना  बहुत  कठिन  है  l  यह  स्थिति   परिवार  में , संस्थायों  में  , संसार  में  छोटे -बड़े  सब  स्तर  पर  है  l  जो  भी  असुरों  के  मापदंडों  से  अलग  है  ,  उस  पर   आसुरी  प्रवृति  के  लोग  गुट  बनाकर  आक्रमण  करते  हैं  , अपने  अपने  तरीकों  से  उसे  सताते  हैं  l  उन्हें  सबसे  ज्यादा  भय  अपनी  नाव  में   ' छेद '  होने  का  है  l    आसुरी  प्रवृति  ने  समूचे  संसार  को  अपनी  चपेट  में  ले  लिया  है   इसलिए  अब   भगवान   को  आना  पड़ा  है  l  गीता  का   वचन  निभाने  तो  आना  ही  पड़ेगा  l   कहीं  शिवजी  का  तृतीय  नेत्र  खुला  है ,  कहीं  परमात्मा  का  सुदर्शन  चक्र  तो  कहीं  हनुमानजी  की  गदा   प्रभावी  है  l  ईश्वर  भी  क्या  करें  ?  मनुष्य  सुधरता  ही  नहीं  है  ,  तब  यही  एक  मार्ग   है  इस  दुर्बुद्धि  को  ठिकाने  लगाने  का  l  

16 September 2025

WISDOM -----

कलियुग   में  दुर्बुद्धि  ने  धर्म  को  भी   नहीं  छोड़ा  l  धर्म  के  नाम  पर  पाखंड  है  , सभी  को  अपनी  दुकान  की  चिंता  है  l  संसार  में  इतनी  अशांति  का  कारण  यही  है  कि  अब  धर्म  और  धार्मिक  कार्य  एक  व्यवसाय  बन  गया  है  l  इस  क्षेत्र  में  सच्चे  लोगों  की  संख्या   बहुत  ही  कम  है   और  असुरता  का  साम्राज्य  बहुत  विशाल  है  l   यदि  केवल  धर्म  ही  दुनियाभर  के  दिखावे  और  आडम्बर  से  मुक्त  हो  जाये   तो  संसार  का  कल्याण  हो  सकता  है  l  हमारे  पुराणों  में  सत्संग  की  महिमा  बताने  वाली  एक  कथा  है  ---- एक  बार  देवर्षि  नारद  भगवान  विष्णु  के  पास  गए  और   बोले ---- " हे  प्रभु  !कृपा  करके  मुझे  सत्संग  की  महिमा   सुनाएँ   क्योंकि  भ्रमण  के  दौरान  लोग  मुझसे  सत्संग  की  महिमा  के  विषय  में  जानना  चाहते  हैं  l  इस  महिमा  का  वर्णन  आपसे  श्रेष्ठ  कौन  कर  सकता  है  ?  "  लोक कल्याण  की  द्रष्टि  से  नारद जी  की  इस  जिज्ञासा  को  सुनकर  भगवान  विष्णु  प्रसन्न  हुए  और  बोले ---"  सत्संग  की  महिमा   इतनी  ज्यादा  है  कि   इसकी  अनुभूति  की  जा  सकती  है   इसलिए  हे  नारद  !  तुम  यहाँ  से  कुछ  दूर  जाओ  l  वहां  एक  इमली  के  वृक्ष  पर   विविध  रंगों  वाला  गिरगिट  रहता  है  l  वह  तुम्हे  सत्संग  की  महिमा  सुना  सकता  है  l  '  नारद  जी  प्रसन्न  होकर  चल  पड़े  l  उस  वृक्ष  के  पास  पहुंचकर  उन्होंने  उस  गिरगिट  को  देखा   और  अपनी  योगविद्या  से  उस  गिरगिट  से  पूछा  --- "  क्या  तुम  मुझे  सत्संग  की  महिमा  बता  सकते  हो  ? "  नारद जी  का  यह  प्रश्न  सुनते  ही  गिरगिट  वृक्ष  से  नीचे  गिरकर  मर  गया  l  नारद जी  को  बड़ा  आश्चर्य  हुआ  कि  उनका  प्रश्न  सुनते  ही  गिरगिट  ने  अपने  प्राण  क्यों  त्याग  दिए  l  वे  भारी  मन  से  पुन:  भगवान  विष्णु  के  पास  पहुंचे   और  सारी  घटना  सुनाई  l  भगवान  ने  कहा ---- "  कोई  बात  नहीं   l  अब  तुम  नगर  सेठ  के  घर  जाओ  l  वहां  पिंजरे  में  एक  तोता  है  , वह  सत्संग  की  महिमा  जानता  है  l  "   नारद जी  उस  सेठ  के  घर  पहुंचे  और  योगबल  से  उस  तोते  से  पूछा  ---- " सत्संग  की  क्या  महिमा  है  ? "  यह  सुनते  ही  तोते  ने  भी  अपने  प्राण  त्याग  दिए  l  अब  तो  नारद जी  बड़े  परेशान  हुए   और  भगवान  से  कहा  --- " हे  प्रभु  !  क्या  सत्संग  का  नाम  सुनते  ही  प्राण  त्याग  देना  ही  सत्संग  की  महिमा  है  ? "l  भगवान  बोले  ---- "  इसका  मर्म  तुम्हे  शीघ्र  ही  समझ  में  आएगा  l  तुम  इस  बार  राजा  के  दरबार  में  जाओ   और  उसके  नवजात  पुत्र  से सत्संग  की  महिमा  पूछो  l  नारद  जी  सोचने  लगे    कि  यदि  सत्संग  का  नाम  सुनते  ही   राजा  का  नवजात  पुत्र  मर  गया  तो  मैं  कहीं  का  नहीं  रहूँगा  l  राजा  के  कोप  का  सामना  करना  पड़ेगा  ,  पर  भगवान  का  आदेश  था  , सो  नारद जी   राज महल  पहुंचे   , वहां  पुत्र  जन्म  का  उत्सव  मनाया  जा  रहा  था  l  नारद जी  ने  योगबल  से  उस  पुत्र  से  पूछा  --- "  क्या  आप  मुझे  सत्संग  की  महिमा  सुना  सकते  हैं  ? "   नवजात  शिशु  बोला  ---- "  चन्दन  को  अपनी  सुगंध  और  अमृत  को  अपने  माधुर्य  का  पता  नहीं  होता  l  ऐसे  ही  आप  अपनी  महिमा  नहीं  जानते  l  वास्तव  में  आपके  क्षण मात्र  के  संग  से  मैं   गिरगिट  की  योनि  से  मुक्त  हो  गया   और  पुन:  आपके  दर्शन  से  मैं  तोते  की  योनि  से  मुक्त  होकर   मनुष्य  का  जन्म  मिला  l  ईश्वर  की  कृपा  से  मुझे  आपका  सान्निध्य  मिला  ,  इससे  मेरे  कितने  ही  कर्मबंधन  कट  गए  ,  कितनी  ही  योनियाँ  बिना  भोगे  ही  कट  गईं   और  मैं  मनुष्य  तन  पाकर  राजकुमार  बना  l  हे  देवर्षि  !  आप  मुझे  आशीर्वाद  दें  कि  मैं  मनुष्य  जन्म  में  उत्तम  कर्म  करके  मोक्ष  पा  सकूँ  l "    नारद जी  उसे  आशीर्वाद  देकर  भगवान  के  पास  पहुंचे  औए  उन्हें   सब  घटना  सुनाई  l  भगवान  ने  कहा -- "  जैसी  संगति  होती  है  , जीव को  वैसी  ही  गति  मिलती  है  l "   गोस्वामी  तुलसीदास जी  ने  भी  कहा  है ---- " सत्संग  से  मनुष्य  को  उचित -अनुचित  का  ज्ञान बोध  हो  जाता  है  , विवेक  जाग  जाता  है  , मनुष्य  की  प्रकृति -प्रवृत्ति  बदल  जाती  है  l "  

15 September 2025

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   इस  संसार  में  आदिकाल से  ही  देवताओं  और  असुरों  में  संघर्ष  रहा  है  l  असुरों  का  एक  ही  लक्ष्य  होता  है  कि   वह  हर  संभव  प्रयास  करो  जिससे  लोगों  को  अधिकाधिक  शारीरिक  , मानसिक  कष्ट  हो  ,  वे   थक -हार  कर  असुरता  के  राज्य  में  सम्मिलित  हो  जाएँ  ,  उनकी  कठपुतली  बनकर  ऐसे  ही  आतंक  मचाएं  l  इसमें  एक  बात  महत्वपूर्ण  है  कि  आसुरी  शक्तियां  चाहे  वे  प्रत्यक्ष  हों   या  विशेष  तरीकों  से  अप्रत्यक्ष  शक्तियों  को  वश  में  किया  गया   हो  ,  यह  दोनों  ही  प्रकार  की  आसुरी  शक्तियों  के  कार्य  करने  का  एक  विशेष  पैटर्न  होता  है   जैसे  हम  देखते  हैं  किन्ही  परिवारों  में  आकाल  मृत्यु  होती  हैं , कई  परिवारों  में  दुर्घटना  से   कई  सदस्यों  की  मृत्यु  होती  है  ,  किसी  परिवार  में  पिछली  पीढ़ियों  से  लेकर  कई   सदस्यों  का   घातक  बीमारियों  से    अंत  होता  है  , कहीं  पीढ़ी -दर -पीढ़ी  परिवार  के  सदस्य  ही  परस्पर  धोखा , जालसाजी  , षड्यंत्र  करते  हैं  l  यही  स्थिति  संसार  में  होती  है  l  जितना  शक्तिशाली  असुर  , उतने  हो  व्यापक  क्षेत्र  में  उसका  आतंक  होता  है   जैसे  हिरण्यकश्यप , भस्मासुर   l  उनके  पास  एक  ही  तरीका  था  --हिरण्यकश्यप  कहता  था , उसे  भगवान  की  तरह  पूजो , इसी  बात  पर  वह  सबको , यहाँ  तक  कि  अपने  पुत्र  को  भी  सताता  था   l भस्मासुर  के  लिए  लोगों  को  सताना   , उसके  मनोरंजन  का  साधन  था  , सबके  सिर  पर  हाथ  रखकर  वह  उन्हें  भस्म  कर  देता  था  l  वर्तमान  में  भी  मानवता  को  उत्पीड़ित  करने  वाली  जो  भी  घटनाएँ  हो  रही  हैं   , उनका  भी  एक  ही  पैटर्न  है  l  असुरता  बहुत  शक्तिशाली  है , उसे  पराजित  करना  आसान  काम  नहीं  है  l  जब  मनुष्य  जागरूक  होगा  , अध्यात्म  से  जुड़ेगा  ,  जीवन  के  प्रति  सकारात्मक  सोच  होगी   तभी  वह  अपने  अस्तित्व  को  बचा  सकेगा  l  असुरता  तो  पूरे  संसार  पर   ,  कृषि , चिकित्सा , उद्योग , निर्माण , शिक्षा , कला -साहित्य  -------- आदि  जीवन  के  प्रत्येक  क्षेत्र  पर , यहाँ  तक  कि  मनुष्य  के  मन  पर  भी  अपना  नियंत्रण   करने  को  उतारू  है  l  

13 September 2025

WISDOM -------

 पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  कहते  हैं  ---- 'अहंकार  सारी  अच्छाइयों  के  द्वार  बंद  कर  देता  है  l "  अहंकार  एक  ऐसा  दुर्गुण  है  जिसके  पीछे  अन्य  बुराइयाँ  अपने  आप  खिंची  चली  आती  हैं  l   यहाँ  कोई  भी  अमर  होकर  नहीं  आया  ,  इसलिए  अहंकार  व्यर्थ  है  l  एक  कथा  है  ---- एक  फकीर  ने  किसी  बादशाह  से कहा  --- " खुद  को  बादशाह  कहते  हो  और  जीते  हो  दंभ  और  अहंकार  में  l  सच्चा  बादशाह  तो  वही  होता  है  ,  जो  जीवन  के  सब  रहस्यों  को  समझकर   इसके  आनंद  को  अनुभव  करे  l  "  बादशाह  को  फकीर  का  कहा  सच  अप्रिय  लगा  ,  सो  उसने   फकीर  को  कैद  कर  लिया  l  फकीर  के  एक  मित्र  ने  उससे  कहा  --- "  आखिर  यह  बैठे बैठाए   मुसीबत  क्यों  मोल  ले  ली  ?  न  कहते   वे  सब  बातें  ,  तो  तुम्हारा  क्या  बिगड़  जाता  l  "  मित्र  की  बात  सुनकर  फकीर  हँस  पड़ा   और  बोला  ---- "  मैं  करूँ  भी  तो  क्या करूँ  ?  जब  से  खुदा  का  दीदार  हुआ  है  ,  झूठ  तो  बोला  ही  नहीं  जाता  l "  मित्र  ने  कहा  --- "  यह  कैद  कितनी  कष्टप्रद  है   !  जाने  कब  तक  ऐसे  ही  रहना  पड़े  ? "   फकीर  ने  अपने  जीवन  को  परमात्मा  के  चरणों  में  समर्पित  कर  दिया  था  ,  उसने  बड़ी  निश्चिंतता  से  कहा  --- " इस  कैद  का  क्या  ?  यह  कैद  तो   बस   घड़ी  भर  की  है  l  "   फकीर  की  बात  एक  सिपाही  ने  सुन  ली   और  बादशाह  को  भी  बता  दिया  l  सिपाही  की  बात  सुनकर  बादशाह  ने  कहा  ---" उस  पागल  और  फक्कड़  फकीर  से  कहना   कि   यह  कैद  घड़ी  भर  की  नहीं  ,  बल्कि  जीवन  भर  की  है  l  उसे  जीवन  भर   इसी कालकोठरी  में  सड़ते  हुए  मरना  है  l  जीवन  भर   उसे   उसी  कैद  में   रहते  हुए   यह  याद  रखना  होगा  कि  मैं  भविष्य  को   अपनी  मुट्ठी  में  भर  सकता  हूँ  l "    फकीर  ने  जब  बादशाह  के  इस  कथन  को  सुना   तो  हँसने  लगा  l  फकीर  ने  कहा  --- "  ओ  भाई  !   उस  नादान  बादशाह  से  कहना  कि  उस  पागल  फकीर  ने  कहा  है  कि  क्या  जिन्दगी  उसकी  मुट्ठी  में   कैद  है  ?  क्या  उसकी  सामर्थ्य  समय  के  पहिए  को  थामने  की  ताकत  रखती  है  ?  क्या  उसे  पता  है  कि  पल  भर   के  बाद  क्या  घटने  वाला  है  ?    फकीर  की  बात  बादशाह  तक  पहुंचे  , तब  तक  अचानक  क्या  हो  गया   ?-------  नए  बादशाह  ने  फकीर  को  आजाद  कर  दिया   और  फकीर  के  उपदेशों  को  आत्मसात  किया  l  

7 September 2025

WISDOM ------

   आज  हम  वैज्ञानिक  युग  में  जी  रहे  हैं  l  दुनिया  ने  कितनी  तरक्की  कर  ली  लेकिन  फिर  भी  जाति , धर्म  को  लेकर  लोग  लड़  रहे  हैं , दंगे -फसाद  कर   स्वयं  अपना  जीवन  कष्टप्रद  बना  रहे  हैं  l  कितने  ही  इन  दंगों  की  आग  में  झुलसकर   अपने  परिवार  को  अनाथ  कर  रहे  हैं  l  यह  दुर्बुद्धि  का  सबसे  बड़ा  उदाहरण  है   कि  व्यक्ति  के  पास  जो  कुछ  है  , वह  उसका  आनंद  नहीं  उठा  पा  रहा  ,  अपनी ऊर्जा  को   ऐसे  नकारात्मक  कार्यों  की  योजना  बनाने , , उन्ही  में  उलझे  रहने  में  गँवा  रहा  है  l  यदि  व्यक्ति   परिवार  में  होने  वाले  झगड़े  या  समाज  और  संसार  में  होने  वाले  दंगे -फसाद  और  उपद्रवों   के  पीछे  की  सच्चाई  को  समझ  जाए  तब   वह  इनमें  उलझना  बंद  कर  देगा  l  इनका  सच  यह  है  कि  संसार  में  सकारात्मक  और  नकारात्मक   दोनों  ही   शक्तियां   प्रत्यक्ष और  अप्रत्यक्ष  रूप  से  हैं  l  संसार  में  हजारों  वर्षों  से  ही  युद्ध , उपद्रव  आदि  होते  रहे  हैं  ,   ऐसा  करने  और  कराने  वालों  की  आत्माएं   अप्रत्यक्ष  रूप  से   इस  वायुमंडल  में  हैं  l  संसार  में  युद्ध  हों , दंगे -फसाद , उपद्रव  और  हत्याएं  हों ,  परिवारों में  आपस  में  झगड़े  हो ,  लूटपाट , धोखाधड़ी  जालसाजी  सब  होता  रहे  ,   यही  उनके  मनोरंजन  का  साधन  है  l  जब  ऐसा  होता  है  तब  ये  नकारात्मक  , आसुरी  शक्तियां    चाहे  प्रत्यक्ष  हों  या  अप्रत्यक्ष   ताली  बजा -बजाकर    खुश  होती  हैं   कि  क्या  मजा  आ  गया  !  यह  सब  उनकी  खुराक , उनके  आनंद  का  स्रोत  हैं  l  ये  आसुरी  शक्तियां  लोगों  के  दिमाग  में  प्रवेश  कर   उन्हें  ऐसे  नकारात्मक  कार्य  करने  को  विवश  कर  देती  हैं ,  उन्हें  अपनी  कठपुतली  बनाकर  नचाती  हैं  l  इनसे   बचने  का  एक   ही  तरीका है  कि  स्वयं  को  सकारात्मक  कार्यों  में  व्यस्त   रखो  , अपने  विवेक  को  जगाओ  l   मानव  जीवन  अनमोल  है  ,  ऐसे  नकारात्मक  कार्यों  में  उलझकर  अपने   जीवन   को  गँवाने  से   कोई  फायदा  नहीं  ,  न  तो  इस  धरती  पर  ही  कोई  सम्मान  मिलेगा  और  न  ही  ऊपर  कोई  जगह  मिलेगी  ,  बीच  में  ही  युगों -युगों  तक  भटकना  होगा  l  

6 September 2025

WISDOM ------

     पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं  ---- "  द्रष्टिकोण  में  बसते  हैं  स्वर्ग -नरक  l    स्वर्ग  और  नरक  किसी  स्थान  या  जिले  का  नाम  नहीं  है  ,  यह  हमारी  आँखों  से  देखने  का  एक  तरीका  है   l  जब  हम  अपने  से  पिछड़े  और  गुजरे  हुए  लोगों  की  ओर  देखते  हैं  तो  मालूम  होता  है  कि  हम  हजारों  , लाखों  करोड़ों  मनुष्यों  की  अपेक्षा  ज्यादा  सुखी   हैं  l  लेकिन  यदि  हम  आसमान  की  ओर  देखेंगे  ,  अपने  से  अधिक  संपन्न  लोगों  को  देखेंगे   तो  हमें  बड़ा  क्लेश , ईर्ष्या , द्वेष    और  जलन  होगी  कि  अमुक  के  पास  कितना  सुख -वैभव  है  और  हमारा  जीवन  दुःख  में  डूबा  हुआ  है  l  आचार्य श्री  कहते  हैं  --सुख  वस्तुओं  में  नहीं  ,  यह  मनुष्य  की  सोच  है   जो  मनुष्य  को  सुखी  और  दुखी  बनाती  है  l  अपने  से  ऊपर  देखने  की  महत्वाकांक्षा  रखने  वाले   दिन  रात  जलते   रहते  हैं  l  कामनाएं  असीम  और  अपार  हैं  ,  ऐसे  लोगों  को  शांति  नहीं  है  , वे  निरंतर  अशांति  की  आग  में  जलते  रहते  हैं  l  आचार्य श्री  कहते  हैं  --मनुष्य  का  जीवन  प्रगतिशील  एवं  उन्नतिशील  होना  चाहिए  , लेकिन  अशांत  और  विक्षुब्ध  नहीं   l  एक    कथा  है  ------- एक  मल्लाह  था  ,  वे  एक  बड़ी  भारी  नाव  को  खेते  हुए  चले  आ  रहे  थे  l  थोड़ी  देर  बाद  भयंकर  तूफान  आया   और  जहाज  डगमगाने  लगा  l  मल्लाह  ने  अपने  बेटे  से  कहा  ---- "  ऊपर  जाओ  और  अपने  पाल  को  ऊपर  ठीक  से  बाँध  आओ  l  पाल  को  और  पतवार  को  ठीक  से   बाँध  दिया  जाए  तो  हवा  के  रुख  में  कमी  हो  जाएगी   और  हमारी  नाव  डगमगाने  से  बच  जाएगी  l  "     बेटा    रस्सी  के  सहारे  बांस    पर   चढ़ता  हुआ   ऊपर  गया   और  पाल  को  पतवार  से   ठीक  तरह  से  बाँध  दिया  l  उसने  देखा  कि   चारों  ओर  समुद्र  में  ऊँची -ऊँची  लहरें  उठ  हैं , तूफान  आ  रहा  है  ,  जोर  की  हवा  से  सांय -सांय  हो  रही  है   और  अँधेरा  बढ़ता  जा  रहा  है  l  मल्लाह  का  बेटा  ऊपर  से  चिल्लाया  ----' पिताजी  !  मेरी  मौत  आ  गई  ,  दुनिया  में  प्रलय  आने  वाली  है  l  देखिए !  समुद्र  में  लहरें    कितनी  जोर  से  उठती  हुई  चली  आ  रही  हैं  l  ये  लहरें  हमारे  जहाज  को  निगल  जाएँगी  l "  बूढ़ा  बाप  हुक्का  पी  रहा  था  l  उसने  कहा  ---"  बेटे  !  नजर  नीचे   की  ओर  रख   और  चुपचाप   उतरता  हुआ  चला  आ  l  "  लड़के  ने  न  आसमान  को  देखा  , न  बादलों  को  देखा  l  उसने  न  नाव  को  देखा  और  न  आदमियों  को  l  उसने  बस  नीचे  की  ओर  नजर  रखी   और  चुपचाप  नीचे  आ  गया  l    यही  शिक्षा  है  कि    इधर -उधर  न  देखकर  निरंतर   अपने  जीवन  को  सही  दिशा  में   निरंतर  प्रगतिशील  बनाने  का  प्रयास  करें  l