आज संसार की सबसे बड़ी समस्या ' तनाव ' की है l यह समस्या अनेक बीमारियों और मुसीबतों को जन्म देती है l सबसे बड़ी मुसीबत है नींद न आना l ईश्वर ने रात्रि का समय निद्रा के लिए बनाया है l प्रात:काल व्यक्ति ताजगी तभी महसूस करेगा जब उसे रात को अच्छी नींद आए l गरीब व्यक्ति को तो पथरीली जमीन पर भी चैन की नींद आती है लेकिन दुनिया के ऐसे देश जहाँ भौतिक सुख -सुविधाओं की कोई कमी नहीं है , वहां करोड़ों लोग ऐसे हैं जिन्हें नींद की गोली खाने पर भी नींद नहीं आती l कारण यही है कि व्यक्ति भौतिक सुखों के पीछे इतना भाग रहा है कि वह अध्यात्म से दूर हो गया l जीवन का संतुलन बिगड़ गया l अध्यात्म जीवन जीने की कला है l अध्यात्म हमें यही सिखाता है कि अपने जीवन की बागडोर ईश्वर के हाथ में सौंप दो और निश्चिन्त होकर कर्म करो l अपना प्रत्येक कर्म ईश्वर को समर्पित करो , यहाँ तक कि निद्रा को भी l श्रीदुर्गासप्तशती में निद्रा को भी देवी कहा गया है --' या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता l नमस्तस्यै l नमस्तस्यै l नमस्तस्यै नमो नम: l ' जो देवी सब प्राणियों में निद्रा रूप से स्थित हैं , उनको बारंबार नमस्कार l श्रद्धा और विश्वास से निद्रा देवी को पुकारो , वे कभी किसी को निराश नहीं करेंगी l
23 September 2025
19 September 2025
WISDOM ------
युग बदलते हैं l परिवर्तन प्रकृति का नियम है l अजीबोगरीब घटनाएँ देखने को मिलती हैं l कहीं लोगों ने स्वयं को ईश्वर समझ लिया और उस अज्ञात शक्ति से मुँह मोड़कर युद्ध में उलझ गए , ' मरो और मारो ' पर उतारू हैं l कहीं स्थिति इसके विपरीत है l ईश्वर लोगों के कर्मकांड और ढकोसलों से परेशान हो गए , ईश्वर माला , फूल , घंटी से ---- परेशान हो गए l लोग अपनी बुराइयों को दूर नहीं कर रहे , सन्मार्ग को भूल गए हैं , तो अब भगवान ने ही अपने दरवाजे बंद कर लिए l प्रकृति माँ परेशान हो गईं l सहन शक्ति की अति हो गई तो अब क्रोध आना स्वाभाविक है l ' जब नाश मनुज पर छाता है , पहले विवेक मर जाता है l ' समूचे संसार पर दुर्बुद्धि हावी है , बड़े -बड़े लोग जिनके पास दुनिया के सारे सुख हैं लेकिन मन की शांति नहीं है , स्वयं भी लड़ रहे , निर्दोष लोगों को अपने अहंकार की खातिर मरने को विवश कर रहे l दुर्बुद्धि ने धर्म के ठेकेदारों को भी नहीं छोड़ा l आसुरी शक्तियां यही तो चाहती हैं l वर्षों पहले इंग्लॅण्ड का साम्राज्य पूरी दुनिया में था , संसार के विभिन्न देशों में स्वतंत्रता के लिए आन्दोलन हुए और साम्राज्यवाद का अंत हुआ l यदि किसी एक का ही सब ओर साम्राज्य हो तो सारा दोष भी उसी के माथे पर आता है , बुरा -भला सब सुनना पड़ता है l इसलिए अब आसुरी शक्तियों ने नया तरीका खोजा l सारे असुर अब एक हो गए , संगठित होकर छुपकर अपने आसुरी कार्य करने लगे l सब एक नाव पर सवार हो गए , असली 'डॉन ' कौन है ? यह मालूम करना बहुत कठिन है l यह स्थिति परिवार में , संस्थायों में , संसार में छोटे -बड़े सब स्तर पर है l जो भी असुरों के मापदंडों से अलग है , उस पर आसुरी प्रवृति के लोग गुट बनाकर आक्रमण करते हैं , अपने अपने तरीकों से उसे सताते हैं l उन्हें सबसे ज्यादा भय अपनी नाव में ' छेद ' होने का है l आसुरी प्रवृति ने समूचे संसार को अपनी चपेट में ले लिया है इसलिए अब भगवान को आना पड़ा है l गीता का वचन निभाने तो आना ही पड़ेगा l कहीं शिवजी का तृतीय नेत्र खुला है , कहीं परमात्मा का सुदर्शन चक्र तो कहीं हनुमानजी की गदा प्रभावी है l ईश्वर भी क्या करें ? मनुष्य सुधरता ही नहीं है , तब यही एक मार्ग है इस दुर्बुद्धि को ठिकाने लगाने का l
16 September 2025
WISDOM -----
15 September 2025
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इस संसार में आदिकाल से ही देवताओं और असुरों में संघर्ष रहा है l असुरों का एक ही लक्ष्य होता है कि वह हर संभव प्रयास करो जिससे लोगों को अधिकाधिक शारीरिक , मानसिक कष्ट हो , वे थक -हार कर असुरता के राज्य में सम्मिलित हो जाएँ , उनकी कठपुतली बनकर ऐसे ही आतंक मचाएं l इसमें एक बात महत्वपूर्ण है कि आसुरी शक्तियां चाहे वे प्रत्यक्ष हों या विशेष तरीकों से अप्रत्यक्ष शक्तियों को वश में किया गया हो , यह दोनों ही प्रकार की आसुरी शक्तियों के कार्य करने का एक विशेष पैटर्न होता है जैसे हम देखते हैं किन्ही परिवारों में आकाल मृत्यु होती हैं , कई परिवारों में दुर्घटना से कई सदस्यों की मृत्यु होती है , किसी परिवार में पिछली पीढ़ियों से लेकर कई सदस्यों का घातक बीमारियों से अंत होता है , कहीं पीढ़ी -दर -पीढ़ी परिवार के सदस्य ही परस्पर धोखा , जालसाजी , षड्यंत्र करते हैं l यही स्थिति संसार में होती है l जितना शक्तिशाली असुर , उतने हो व्यापक क्षेत्र में उसका आतंक होता है जैसे हिरण्यकश्यप , भस्मासुर l उनके पास एक ही तरीका था --हिरण्यकश्यप कहता था , उसे भगवान की तरह पूजो , इसी बात पर वह सबको , यहाँ तक कि अपने पुत्र को भी सताता था l भस्मासुर के लिए लोगों को सताना , उसके मनोरंजन का साधन था , सबके सिर पर हाथ रखकर वह उन्हें भस्म कर देता था l वर्तमान में भी मानवता को उत्पीड़ित करने वाली जो भी घटनाएँ हो रही हैं , उनका भी एक ही पैटर्न है l असुरता बहुत शक्तिशाली है , उसे पराजित करना आसान काम नहीं है l जब मनुष्य जागरूक होगा , अध्यात्म से जुड़ेगा , जीवन के प्रति सकारात्मक सोच होगी तभी वह अपने अस्तित्व को बचा सकेगा l असुरता तो पूरे संसार पर , कृषि , चिकित्सा , उद्योग , निर्माण , शिक्षा , कला -साहित्य -------- आदि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र पर , यहाँ तक कि मनुष्य के मन पर भी अपना नियंत्रण करने को उतारू है l
13 September 2025
WISDOM -------
पं . श्रीराम शर्मा आचार्य जी कहते हैं ---- 'अहंकार सारी अच्छाइयों के द्वार बंद कर देता है l " अहंकार एक ऐसा दुर्गुण है जिसके पीछे अन्य बुराइयाँ अपने आप खिंची चली आती हैं l यहाँ कोई भी अमर होकर नहीं आया , इसलिए अहंकार व्यर्थ है l एक कथा है ---- एक फकीर ने किसी बादशाह से कहा --- " खुद को बादशाह कहते हो और जीते हो दंभ और अहंकार में l सच्चा बादशाह तो वही होता है , जो जीवन के सब रहस्यों को समझकर इसके आनंद को अनुभव करे l " बादशाह को फकीर का कहा सच अप्रिय लगा , सो उसने फकीर को कैद कर लिया l फकीर के एक मित्र ने उससे कहा --- " आखिर यह बैठे बैठाए मुसीबत क्यों मोल ले ली ? न कहते वे सब बातें , तो तुम्हारा क्या बिगड़ जाता l " मित्र की बात सुनकर फकीर हँस पड़ा और बोला ---- " मैं करूँ भी तो क्या करूँ ? जब से खुदा का दीदार हुआ है , झूठ तो बोला ही नहीं जाता l " मित्र ने कहा --- " यह कैद कितनी कष्टप्रद है ! जाने कब तक ऐसे ही रहना पड़े ? " फकीर ने अपने जीवन को परमात्मा के चरणों में समर्पित कर दिया था , उसने बड़ी निश्चिंतता से कहा --- " इस कैद का क्या ? यह कैद तो बस घड़ी भर की है l " फकीर की बात एक सिपाही ने सुन ली और बादशाह को भी बता दिया l सिपाही की बात सुनकर बादशाह ने कहा ---" उस पागल और फक्कड़ फकीर से कहना कि यह कैद घड़ी भर की नहीं , बल्कि जीवन भर की है l उसे जीवन भर इसी कालकोठरी में सड़ते हुए मरना है l जीवन भर उसे उसी कैद में रहते हुए यह याद रखना होगा कि मैं भविष्य को अपनी मुट्ठी में भर सकता हूँ l " फकीर ने जब बादशाह के इस कथन को सुना तो हँसने लगा l फकीर ने कहा --- " ओ भाई ! उस नादान बादशाह से कहना कि उस पागल फकीर ने कहा है कि क्या जिन्दगी उसकी मुट्ठी में कैद है ? क्या उसकी सामर्थ्य समय के पहिए को थामने की ताकत रखती है ? क्या उसे पता है कि पल भर के बाद क्या घटने वाला है ? फकीर की बात बादशाह तक पहुंचे , तब तक अचानक क्या हो गया ?------- नए बादशाह ने फकीर को आजाद कर दिया और फकीर के उपदेशों को आत्मसात किया l
7 September 2025
WISDOM ------
आज हम वैज्ञानिक युग में जी रहे हैं l दुनिया ने कितनी तरक्की कर ली लेकिन फिर भी जाति , धर्म को लेकर लोग लड़ रहे हैं , दंगे -फसाद कर स्वयं अपना जीवन कष्टप्रद बना रहे हैं l कितने ही इन दंगों की आग में झुलसकर अपने परिवार को अनाथ कर रहे हैं l यह दुर्बुद्धि का सबसे बड़ा उदाहरण है कि व्यक्ति के पास जो कुछ है , वह उसका आनंद नहीं उठा पा रहा , अपनी ऊर्जा को ऐसे नकारात्मक कार्यों की योजना बनाने , , उन्ही में उलझे रहने में गँवा रहा है l यदि व्यक्ति परिवार में होने वाले झगड़े या समाज और संसार में होने वाले दंगे -फसाद और उपद्रवों के पीछे की सच्चाई को समझ जाए तब वह इनमें उलझना बंद कर देगा l इनका सच यह है कि संसार में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही शक्तियां प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हैं l संसार में हजारों वर्षों से ही युद्ध , उपद्रव आदि होते रहे हैं , ऐसा करने और कराने वालों की आत्माएं अप्रत्यक्ष रूप से इस वायुमंडल में हैं l संसार में युद्ध हों , दंगे -फसाद , उपद्रव और हत्याएं हों , परिवारों में आपस में झगड़े हो , लूटपाट , धोखाधड़ी जालसाजी सब होता रहे , यही उनके मनोरंजन का साधन है l जब ऐसा होता है तब ये नकारात्मक , आसुरी शक्तियां चाहे प्रत्यक्ष हों या अप्रत्यक्ष ताली बजा -बजाकर खुश होती हैं कि क्या मजा आ गया ! यह सब उनकी खुराक , उनके आनंद का स्रोत हैं l ये आसुरी शक्तियां लोगों के दिमाग में प्रवेश कर उन्हें ऐसे नकारात्मक कार्य करने को विवश कर देती हैं , उन्हें अपनी कठपुतली बनाकर नचाती हैं l इनसे बचने का एक ही तरीका है कि स्वयं को सकारात्मक कार्यों में व्यस्त रखो , अपने विवेक को जगाओ l मानव जीवन अनमोल है , ऐसे नकारात्मक कार्यों में उलझकर अपने जीवन को गँवाने से कोई फायदा नहीं , न तो इस धरती पर ही कोई सम्मान मिलेगा और न ही ऊपर कोई जगह मिलेगी , बीच में ही युगों -युगों तक भटकना होगा l
6 September 2025
WISDOM ------
पं . श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं ---- " द्रष्टिकोण में बसते हैं स्वर्ग -नरक l स्वर्ग और नरक किसी स्थान या जिले का नाम नहीं है , यह हमारी आँखों से देखने का एक तरीका है l जब हम अपने से पिछड़े और गुजरे हुए लोगों की ओर देखते हैं तो मालूम होता है कि हम हजारों , लाखों करोड़ों मनुष्यों की अपेक्षा ज्यादा सुखी हैं l लेकिन यदि हम आसमान की ओर देखेंगे , अपने से अधिक संपन्न लोगों को देखेंगे तो हमें बड़ा क्लेश , ईर्ष्या , द्वेष और जलन होगी कि अमुक के पास कितना सुख -वैभव है और हमारा जीवन दुःख में डूबा हुआ है l आचार्य श्री कहते हैं --सुख वस्तुओं में नहीं , यह मनुष्य की सोच है जो मनुष्य को सुखी और दुखी बनाती है l अपने से ऊपर देखने की महत्वाकांक्षा रखने वाले दिन रात जलते रहते हैं l कामनाएं असीम और अपार हैं , ऐसे लोगों को शांति नहीं है , वे निरंतर अशांति की आग में जलते रहते हैं l आचार्य श्री कहते हैं --मनुष्य का जीवन प्रगतिशील एवं उन्नतिशील होना चाहिए , लेकिन अशांत और विक्षुब्ध नहीं l एक कथा है ------- एक मल्लाह था , वे एक बड़ी भारी नाव को खेते हुए चले आ रहे थे l थोड़ी देर बाद भयंकर तूफान आया और जहाज डगमगाने लगा l मल्लाह ने अपने बेटे से कहा ---- " ऊपर जाओ और अपने पाल को ऊपर ठीक से बाँध आओ l पाल को और पतवार को ठीक से बाँध दिया जाए तो हवा के रुख में कमी हो जाएगी और हमारी नाव डगमगाने से बच जाएगी l " बेटा रस्सी के सहारे बांस पर चढ़ता हुआ ऊपर गया और पाल को पतवार से ठीक तरह से बाँध दिया l उसने देखा कि चारों ओर समुद्र में ऊँची -ऊँची लहरें उठ हैं , तूफान आ रहा है , जोर की हवा से सांय -सांय हो रही है और अँधेरा बढ़ता जा रहा है l मल्लाह का बेटा ऊपर से चिल्लाया ----' पिताजी ! मेरी मौत आ गई , दुनिया में प्रलय आने वाली है l देखिए ! समुद्र में लहरें कितनी जोर से उठती हुई चली आ रही हैं l ये लहरें हमारे जहाज को निगल जाएँगी l " बूढ़ा बाप हुक्का पी रहा था l उसने कहा ---" बेटे ! नजर नीचे की ओर रख और चुपचाप उतरता हुआ चला आ l " लड़के ने न आसमान को देखा , न बादलों को देखा l उसने न नाव को देखा और न आदमियों को l उसने बस नीचे की ओर नजर रखी और चुपचाप नीचे आ गया l यही शिक्षा है कि इधर -उधर न देखकर निरंतर अपने जीवन को सही दिशा में निरंतर प्रगतिशील बनाने का प्रयास करें l