30 July 2026

WISDOM -----

 पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी   ' महापुरुषों  के  अविस्मरणीय जीवन  प्रसंग '  में  लिखते  हैं  ----- " वास्तव  में  अधिकार  पद  बड़ा  विडम्बनापूर्ण  होता  है  l  जब  तक  वह  सक्षम  और  समर्थ  है  ,  लोग  उसकी  झूठी  चाटुकारी  किया  करते  हैं   और  जब  वह  असहाय  और  विवश  होता  है  तो  तुरंत  आँखे  ही  नहीं  फेर   लेते  बल्कि  न  उठने  देने  के  लिए   दो  धक्के   और  दे  देते  हैं   l  "      --- विश्व  विजय की  कामना  लिए  हुए  जब  सिकंदर  फारस  देश  पर  आक्रमण  करने  जा  रहा  था  l  सहसा   एक  स्थान  पर  उसकी  तबियत  ख़राब  होने  लगी  , तुरंत  तम्बू  लगा  दिया  गया  l  सिकंदर  पेट  और  ह्रदय-स्थल  की  पीड़ा  से   छटपटाने  लगा  l  सिकंदर  के  साथ  यूनान  के  कई  सुयोग्य  हकीम  आए  हुए  थे  ,  उन्होंने  सिकंदर  के  शरीर   और  नाड़ी  की  परीक्षा  की   और  वे  हताश  हो  गए   l  उन्हें  विश्वास  हो  गया  कि  सिकंदर   चन्द  मिनटों  का  मेहमान  है  l  सिकंदर  असहाय  सा   हकीमों  और  सरदारों  की  ओर  सहायता  के  लिए  देख  रहा  था  l  इधर  सरदार  सहायता  से  यह  सोचकर  मुँह  छिपा  रहे  थे  कि  शायद  इसकी  मृत्यु  के  बाद  यह  अधिकार  हमें  मिल  जाए   और  हकीम  सोच  रहे  थे  कि  यदि  मेरी  दवा  लेने  के  बाद  मर  गया  तो  लोग  यह  संदेह  करेंगे  कि  इसे  मैंने  जानबूझ  कर  मार  डाला  ,  तब  बेकार  में  जान  आफत  में  फंसेगी  l  उन  सब  का  स्वामी  सिकंदर  मर  रहा  था   और  उसकी  मृत्यु  की  घड़ी  देखकर  सब  अपने -अपने  हित  की  सोच  रहे  थे  l  l  आचार्य  श्री आगे  लिखते  हैं  ---- "  जब  तक  शक्तिमंतों  की  भुजा  में  बल  ,  वाणी  में  प्रभाव  और  विस्तार  पर  नियंत्रण  रहता  है  ,  सभी  उसे  नमन  करते  हैं  ,  उसके  अत्याचार  को  वीरता  ,  अनीति  को  चातुर्य  और   शोषण  को  आवश्यकता  मानते  हैं    किन्तु  ज्यों  ही  उसकी  ये  विशेषताएं  समय  पाकर  क्षीण  हो  जाती  हैं  त्यों  ही  लोगों  के  मन  और  द्रष्टिकोण  बदल  जाते  हैं  l  लोग  निर्णायक  की  तरह  उसके  जीवन  तथा  कृत्यों  का  लेखा -जोखा  करने  लगते  हैं  ,  उसके  गुण  नीचे  पड़  जाते  हैं  और  सारे  दोष  उभर  आते  हैं  l  "  आचार्य श्री  लिखते  हैं  ---"सिकंदर  का  जीवन  इस  सत्य  को  सिद्ध  करता  है  ,  सिखाता  है  कि  बड़े  आदमी  बनने  की  अपेक्षा  महान  कार्य  करने  की  कामना  हजार  गुनी  श्रेष्ठ  है  l  "  

No comments:

Post a Comment