1 August 2026

WISDOM ------

  इस  संसार  में   धरती  का  कोई  ऐसा  कोना  नहीं  जहाँ  जाति , धर्म , अमीर -गरीब  , ऊँच -नीच  ,  रंग -रूप  आदि  को  लेकर  भेदभाव  न  हो  l  केवल  मृत्यु  ही  ऐसी  है  जो  किसी  से  कोई  भेदभाव  नहीं  करती  ,  यमराज  के  सामने  सब  एक  समान  हैं  l  ईश्वर  ने  सब  को  गिनती  की  साँसे  दी  हैं  ,  जिस  पल  वह  पूरी  हो  गईं  ,  फिर  उसका  धरती  पर  खेल  खतम  l  l  कहते  हैं  जब  मनुष्य  का  जन्म  होता  है   तब  विधाता  आते  हैं  , उसका  भाग्य  लिख  देते  हैं  जिसमें  यह  भी  लिखा  होता  है   कि  उसकी  मृत्यु  कब  और  कैसे  होगी  l  एक  कथा  है  ----- राजा  विक्रमादित्य  रात्रि  को  वेश  बदल  कर  राज्य  का  भ्रमण  करते  थे  l  भ्रमण  करते  हुए  वे  बहुत  दूर   निकल  गए   l  वहां  उन्हें  एक  झोपड़ी  से  कुछ  आवाज  आ  रही  थी  ,  उन्होंने  वहीँ  रुकने  का  निश्चय  किया   और  उसका  दरवाजा  खटखटाया  l    किसान  बाहर  निकला  ,  राजा  ने  कहा  --मैं  आज  रात  यहाँ  विश्राम  करना  चाहता  हूँ  , सुबह  चला  जाऊँगा  l  किसान  ने  कहा  ---मेरी  झोपड़ी  बहुत  छोटी  है  और  पत्नी  को  प्रसव  पीड़ा  हो  रही  है  अत:  आप  बाहर  विश्राम  करे  l  राजा  तो  वेश  बदले  हुए  थे  बाहर  विश्राम  करने  लगे  l  कुछ  समय  बाद   शिशु  के  रोने  की  आवाज  आई  ,  किसान  ने  बताया  कि  पुत्र  हुआ  है  l   उस  समय  राजा  विक्रमादित्य  ने  किसी  को  झोपड़ी  में  प्रवेश  करते  देखा  ,  उन्होंने  तुरंत  उसे  रोक  लिया  और  कहा  --कौन  हो  तुम    ?  इतनी  रात्रि  में  यहाँ  क्यों  जा  रहे  है  ?  उसने  कहा  ---मैं  विधाता  हूँ  , इस  शिशु  का  भाग्य  लिखने  जा  रहा  हूँ  l  थोड़ी  देर  बाद   जब  विधाता लौटे  तो  राजा  विक्रमादित्य  ने  तलवार  निकलकर   उनका  रास्ता  रोक  लिया   और  कहा  कि  बताओ   , तुमने  उस  बच्चे  के  भाग्य  में  क्या  लिखा  ?  विधाता  ने  कहा  --यह  बताया  नहीं  जाता  ,  तुम  मुझे  जाने  दो  l  विक्रमादित्य बहुत  वीर  थे  ,  वे  टस  से  मस  न  हुए   , उन्होंने  विधाता  से  कहा  --केवल  इतना  बता  दो  कि  इसकी  मृत्यु  कैसे  होगी  l  तब  विधाता  को   बताना    पड़ा  कि  अमुक  तिथि  को  इसको  शेर  खा  जायेगा   l  प्रात:काल  होने  पर  राजा  ने  किसान  को  अपना  परिचय  दिया  और  कहा  कि  इस  बच्चे   को  अब  राजसी  सुरक्षा  में  रखा  जायेगा  l  राजा  ने  उसकी  सुरक्षा  के  लिए  बहुत  मजबूत   एक   हॉल  बनवा  दिया  , इतना  मजबूत  कि  एक परिंदा  तो  क्या  एक  चींटी  भी   उसमे  प्रवेश  नहीं  कर  सकती  थी  l  हजारों  नौकर  , सिपाही  उसकी  सुरक्षा  में  लगे  थे  l  राजा  को  विधाता  के  लेख  को  मिटाना  था  l  सुरक्षा  के  साथ  उस  बच्चे  की  शिक्षा  व  मनोरंजन  के लिए  सब  व्यवस्था  थी  ,  दीवार  पर   विभिन्न  जानवरों  की  तस्वीरें  भी  थीं  l  आखिर   उसकी  मृत्यु  की  घड़ी  आ  गई  ,  अन्दर  बाहर  सब  जगह  उसकी  सुरक्षा  के  लिए  सैनिक  तैयार  थे  ,  सब  अपने  हथियार  लेकर   देखते  ही  रह  गए    , दीवार  पर  शेर  की  भी  तस्वीर  थी  ,  उसमें  से  शेर  प्रगट    हो  गया  और  बच्चे  को  खा  गया  l  तब  राजा  को  समझ  में  आया  कि  कोई  कितना  भी  वीर  क्यों  न  हो  ,  सुरक्षा  के  कितने  ही  साधन  हों  ,  मृत्यु  को ,  विधाता  के  लेख  को   टाला  नहीं  जा  सकता  l