3 August 2026

WISDOM -------

    हमारे  पुराणों  में  जो  कथाएं  हैं  , वे  मात्र  मनोरंजन  के  लिए  नहीं  हैं  l  उनमें  प्रत्येक  युग  की  परिस्थितियों  के  अनुरूप  गूढ़  रहस्य  छिपे  हुए  हैं  l  ऐसी  ही  एक  कथा  है  ---- एक  असुर  जिसका  नाम  भस्मासुर  था  , उसने  शिवजी  की  तपस्या  कर  उन्हें  प्रसन्न  किया  और  वरदान  माँगा  कि  वह  जिसके  भी  सिर  पर  हाथ  रख  दे  , वही  भस्म  हो  जाए  l  यह  वरदान  प्राप्त  कर  उसने  धरती  पर  उत्पात  मचाना  शुरू  कर  दिया  l  गलत  सलाह  देने  वाले  प्रत्येक  युग  में  होते  हैं  , उन्होंने  भस्मासुर  को   सलाह   दी  कि  तुम  शिवजी  के  ही  सिर  पर  हाथ  रख  दो  , उसके  बाद  उनका  सब  कुछ  तुम्हारा  ही  होगा  l  शिवजी  ने  जब  देखा  कि  भस्मासुर उन्हें  ही  भस्म  करने  आ  रहा  है  तो  उन्होंने  भागकर  विष्णुजी  के  पास  शरण  ली  l  तब  विष्णुजी  ने  मोहिनी  रूप  धारण  किया  ,  उसको  सम्मोहित  कर  कहा  कि  जैसे  वे  नृत्य  करें  वैसी  ही   भाव  -भंगिमा  वह  भी  करे  l  नृत्य  की  लय  के  साथ  मोहिनी  रूप  धारी  विष्णुजी  ने  अपने  सिर  पर  हाथ  रखा  , वैसे ही  भस्मासुर  ने  अपने  सिर  पर  हाथ  रखा  और  वह  वहीँ  जल  कर  भस्म  हो  गया  l  यह  कथा  सांकेतिक  रूप  में  बहुत  बड़ा  शिक्षण  देती  है ------- -------  आज   एक  नहीं  अनेक  भस्मासुर  हैं  , जो  अपने  जीवन  में  अनेक  पापकर्म  करते  हैं  और  फिर  किसी  सिद्ध  संत -साधक  के  पाँव  पकड़  कर   उनकी  करुणा  को  जगा  देते  हैं  , अनेक  लोग    तरह -तरह  के  प्रलोभन  देकर  , कभी  भय  दिखाकर   उनका  आशीर्वाद  प्राप्त कर  लेते  हैं  l  इन    संत  -साधकों  के  पास  ज्ञान  का  तो  भंडार  है   लेकिन  ये  भी  शिवजी  की  तरह  बहुत  भोले  व  सरल  होते  हैं  , आज  के  युग  के  लोगों  की  चालाकी  को  नहीं  समझ  पाते  l  वास्तव  में  ये  भस्मासुर  ,  इन   संत -साधकों  की  समीपता  प्राप्त  कर  उनके  पुण्य , उनकी   सकारात्मक  ऊर्जा  को  खींच  लेते हैं   और  अपने  पापों  का  बोझ  , अपनी  नकारात्मक  ऊर्जा  उन  पर  उड़ेल  देते  हैं  l  ये  एनर्जी  वैम्पायर  हैं  , समाज  में  छुट्टा  घूमते  हैं  और   पुण्यात्मा  लोगों की  एनर्जी  चूसकर  ऐशोआराम  का  जीवन  जीते  हैं  l  एनर्जी  ट्रान्सफर  के इनके  पास  अनेक  तरीके  हैं  l   भगवान  शिव  तो  स्वयं  महाकाल  हैं  ,  यह  कथा  तो   समाज  को  सचेत  करने  के  लिए  है  कि  अपने  ज्ञान  से  अच्छे-बुरे    लोगों  की  परख  करो  l  अब  विष्णु  भगवान   नहीं  आयेंगे  , अपनी   एनर्जी   की  स्वयं  सुरक्षा  करो  l  हम  देखते  हैं  कि  अनेक  संत -साधक   बहुत  नियम संयम  से  , तपस्वी  का  जीवन  जीने  के  उपरांत  भी   बड़े  शारीरिक  कष्ट  में  हैं  , ईश्वर  उन्हें  सहन  शक्ति देते  हैं   लेकिन  ये  बीमारी उनके भाग्य  की  नहीं  है  ,  ये  तो  पापियों  को  आशीर्वाद  देकर  , अपने  पुण्य  देकर  उनके  पापों  का  बोझा  ढो  रहे  हैं  l  हमारी  गंगा  मैया  भी  पापियों  का  बोझा  ढोने  से इतनी  प्रदूषित  हो  गईं  l  विधाता  भी  न्याय करने  से   पहले   पाप -पुण्य  के  घड़े  को  देखते हैं  l  इस  युग  के  असुर  एनर्जी  ट्रान्सफर  से  अपने  पाप  का  घड़ा  जब -तब  खाली  कर  लेते  हैं   और   पुण्यात्मा  लोगों  की  एनर्जी  पर  ठाठ  से  रहते  हैं   l  यही  कारण  है  कि  संसार  में  असुरता  कम  नहीं  हो  रही  है  l  

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