हमारे पुराणों में जो कथाएं हैं , वे मात्र मनोरंजन के लिए नहीं हैं l उनमें प्रत्येक युग की परिस्थितियों के अनुरूप गूढ़ रहस्य छिपे हुए हैं l ऐसी ही एक कथा है ---- एक असुर जिसका नाम भस्मासुर था , उसने शिवजी की तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया और वरदान माँगा कि वह जिसके भी सिर पर हाथ रख दे , वही भस्म हो जाए l यह वरदान प्राप्त कर उसने धरती पर उत्पात मचाना शुरू कर दिया l गलत सलाह देने वाले प्रत्येक युग में होते हैं , उन्होंने भस्मासुर को सलाह दी कि तुम शिवजी के ही सिर पर हाथ रख दो , उसके बाद उनका सब कुछ तुम्हारा ही होगा l शिवजी ने जब देखा कि भस्मासुर उन्हें ही भस्म करने आ रहा है तो उन्होंने भागकर विष्णुजी के पास शरण ली l तब विष्णुजी ने मोहिनी रूप धारण किया , उसको सम्मोहित कर कहा कि जैसे वे नृत्य करें वैसी ही भाव -भंगिमा वह भी करे l नृत्य की लय के साथ मोहिनी रूप धारी विष्णुजी ने अपने सिर पर हाथ रखा , वैसे ही भस्मासुर ने अपने सिर पर हाथ रखा और वह वहीँ जल कर भस्म हो गया l यह कथा सांकेतिक रूप में बहुत बड़ा शिक्षण देती है ------- ------- आज एक नहीं अनेक भस्मासुर हैं , जो अपने जीवन में अनेक पापकर्म करते हैं और फिर किसी सिद्ध संत -साधक के पाँव पकड़ कर उनकी करुणा को जगा देते हैं , अनेक लोग तरह -तरह के प्रलोभन देकर , कभी भय दिखाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर लेते हैं l इन संत -साधकों के पास ज्ञान का तो भंडार है लेकिन ये भी शिवजी की तरह बहुत भोले व सरल होते हैं , आज के युग के लोगों की चालाकी को नहीं समझ पाते l वास्तव में ये भस्मासुर , इन संत -साधकों की समीपता प्राप्त कर उनके पुण्य , उनकी सकारात्मक ऊर्जा को खींच लेते हैं और अपने पापों का बोझ , अपनी नकारात्मक ऊर्जा उन पर उड़ेल देते हैं l ये एनर्जी वैम्पायर हैं , समाज में छुट्टा घूमते हैं और पुण्यात्मा लोगों की एनर्जी चूसकर ऐशोआराम का जीवन जीते हैं l एनर्जी ट्रान्सफर के इनके पास अनेक तरीके हैं l भगवान शिव तो स्वयं महाकाल हैं , यह कथा तो समाज को सचेत करने के लिए है कि अपने ज्ञान से अच्छे-बुरे लोगों की परख करो l अब विष्णु भगवान नहीं आयेंगे , अपनी एनर्जी की स्वयं सुरक्षा करो l हम देखते हैं कि अनेक संत -साधक बहुत नियम संयम से , तपस्वी का जीवन जीने के उपरांत भी बड़े शारीरिक कष्ट में हैं , ईश्वर उन्हें सहन शक्ति देते हैं लेकिन ये बीमारी उनके भाग्य की नहीं है , ये तो पापियों को आशीर्वाद देकर , अपने पुण्य देकर उनके पापों का बोझा ढो रहे हैं l हमारी गंगा मैया भी पापियों का बोझा ढोने से इतनी प्रदूषित हो गईं l विधाता भी न्याय करने से पहले पाप -पुण्य के घड़े को देखते हैं l इस युग के असुर एनर्जी ट्रान्सफर से अपने पाप का घड़ा जब -तब खाली कर लेते हैं और पुण्यात्मा लोगों की एनर्जी पर ठाठ से रहते हैं l यही कारण है कि संसार में असुरता कम नहीं हो रही है l
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