2 January 2013

मंद वायू आंधी से बोली -"दीदी मैं जहाँ जाती हूँ ,लोग स्वागत करते हैं ।आपका आभास पाते ही डरते -छिपते हैं ।हमारा लक्ष्य तो लोकमंगल का है ,फिर क्यों आप इस रूप में सबको परेशान करती हैं ।आँधी बोली -"बहन तेरी उपयोगिता अपनी जगह है मेरी अपनी जगह ।स्थान -स्थान पर सड़न ,जहरीला धुआं ,गुबार आदि एकत्रित हो जाते हैं ।कहीं प्राण वायु की मात्रा कम हो जाती है ।इनका निवारण तुम्हारी गति से संभव नहीं है ,इसलिए कभी -कभी मैं सक्रिय हो जाती हूँ ।तुम लोगों को तसल्ली देती हो ,मैं घुटन पैदा करने वाले विकारों का निराकरण करती हूँ ।लोकमंगल के लिये दोनों आवश्यक हैं ।तुम्हारा सौजन्य भी और मेरा पराक्रम भी ।
आइंस्टीन से किसी ने पूछा कि संसार में इतना दुःख और कलह क्यों है ,जबकि विज्ञान ने एक से बढकर एक सुख -साधन उत्पन्न किये हैं ।उत्तर देते हुए उन्होंने कहा -कमी बस एक ही रह गई कि अच्छे मनुष्य बनाने की कोई योजना नहीं बनी ।देश ,संप्रदाय के पक्षधर सभी दीखते हैं ,पर ऐसे लोग नहीं दिखाई पड़ते ,जो अच्छे इन्सान बनाने की योजनाएं बनाये ।

1 January 2013

THOUGHTS

सद्विचार ही संसार में सर्वश्रेष्ठ हैं ।जीवन रूपी क्षेत्र में विचार एक बीज के समान है ,जैसा विचार होगा ,वैसा ही उसका फल होगा ।सैंकड़ों मार्गों में बहती हुईनदी में क्या जहाज चल सकता है ?इसी प्रकार सैंकड़ो वस्तुओं में बिखरी हुई मनोवृति कुछ करने में समर्थ नहीं हो सकती ।विचार और क्रिया के परस्पर विपरीत दिशा में चलते रहने से किसी कार्य में सिद्धि प्राप्त नहीं होती ।सफल व्यक्ति अपने विचार तथा बाह्य कर्म में पर्याप्त समन्वय करने की अपूर्व क्षमता रखतें हैं ,अपने विचारों को जीवन देते हैं ,उन्हें अपने जीवन में उतारते हैं ।अनुभव कर्म से प्राप्त होता है ।कर्म के साथ ही जीवन में सफलता जुड़ी होती है ।

31 December 2012

सज्जनता ,नम्रता,उदारता ,सेवा ,आदि सद्गुणों के साथ व्यक्ति को निर्भीक और साहसी होना चाहिये अन्यथा सज्जन को लोग मूर्ख और दब्बू समझने लगतें हैं ।यह निर्भीकता और प्रखरता आती है ईश्वर विश्वास से ।ईश्वर विश्वासी व्यक्ति ही आत्मविश्वासी होता है ।एक कछुआ बीस मेढकों से भारी पड़ता है ।एक आत्मविश्वासी ,बीस गुत्थियों को एक साथ सुलझाने और बीस संकटों से पार जाने में समर्थ होता है ।

30 December 2012

एक घंटे लगातार बोलने पर व्यक्ति इतना अधिक थक जाता है कि आठ घंटे तक शारीरिक श्रम किया जाता तो थकान नहीं आती क्योंकि वाणी का सीधा संबंध मस्तिष्क से है ।शारीरिक क्रिया -कलापों में जिन कार्यों में सर्वाधिक मानसिक शक्ति खर्च होती है वह वाणी ही है ।इसलिये मौन की गणना मानसिक तप से की गयी है ।मौन का अर्थ है आन्तरिक -बाह्य क्रियाओं का अपने पर प्रभाव न होने देना ,स्वयं को उनसे निरपेक्ष रखने का नाम मौन है ।सत्य नि:शब्द होता है और कुछ प्रश्नों के उत्तर केवल मौन में दिये जा सकते हैं ।

29 December 2012

शिव भारतीय धर्म के प्रमुख देवता हैं ।त्रिवर्ग में उनकी गणना होती है ।शिव नीलकंठ हैं ।हलाहल विष को धारण किया ,न उगला ,न पिया ।शिक्षण यही है कि विषाक्तता को न तो आत्मसात करें ,न ही उसे विक्षुब्ध होकर उछालें ।
प्रतिद्वंदी को पछाड़ो मत ।अपनी महानता का परिचय देकर उसे क्षुद्र बनने दो ।वह अग्नि ,वह सूर्य ,वह समुद्र बन जाओ ।महाकाल की बनो महत्ता ,युगाकाश पर छा जाओ ।