29 June 2024

WISDOM -----

    एक  अंधियारी  रात  में  एक  प्रौढ़  व्यक्ति   नदी  के  तट  से  कूदकर  आत्महत्या  करने  पर  विचार  कर  रहा   था  l  वह  उस  क्षेत्र  का  सबसे  धनी  व्यक्ति  था  ,  लेकिन  अचानक  घाटे  में  उसकी  सारी  संपदा  चली  गई  ,  इसी  वजह  से   वह  आत्महत्या   का  निश्चय  कर  के  वहां  आया  था  ,  परन्तु  वह  नदी  में  कूदने  के  लिए   जैसे  ही  चट्टान  के  किनारे  पहुँचने  को  हुआ   कि   उसे  किन्ही  दो  मजबूत  हाथों  ने  थाम  लिया   l  उसने  देखा   कि  आचार्य  रामानुज  उसे  पकड़े  हुए  थे  l  उन्होंने  उससे  इस  अवसाद  का  कारण  पूछा   तो  वह  बोला  ----- "  पहले  मैं  बहुत  सुखी  था  l  मेरे  सौभाग्य  का  सूर्य   पूरे  प्रकाश   से  चमक  रहा  था   लेकिन  अब  सिवाय  अंधियारे   के  मेरे  जीवन  में   और  कुछ  भी  बाकी  नहीं  है  l "  यह  सुनकर   आचार्य  रामानुज   बोले  ----- "  दिन  के  बाद  रात्रि   और  रात्रि   के  बाद  दिन  l  जब  दिन  नहीं  टिका   तो  रात्रि   कैसे  टिकेगी  l  परिवर्तन  प्रकृति  का   शाश्वत  नियम  है  l  जब  अच्छे  दिन  नहीं  रहे  तो   बुरे  दिन  भी  नहीं  रहेंगे  l  जो  इस  शाश्वत  नियम  को  जान  लेता  है  ,  उसका  जीवन   उस  अडिग  चट्टान  की  भांति  हो  जाता  है  ,  जो  वर्षा   व  धूप  में  समान  ही  बनी  रहती  है  l  "  

23 June 2024

WISDOM -----

 उत्तराखंड  के  एक  प्राचीन  नगर  में  सुबोध  नामक  राजा  राज्य  करते  थे  l  महाराज  का  नियम  था  कि   राजकीय  कार्य  प्रारम्भ  करने  से  पूर्व   वे  आए  हुए  याचकों  को  दान  दिया  करते  थे  l  इस  नियम  में   उन्होंने  कभी  भूल  नहीं  की  l  एक  दिन  जब  सब  लोग  दान  पा  चुके   तो तो  एक  विचित्र  स्थिति  आ  गई   l  एक  व्यक्ति  ऐसा  आया  जो  दान  के  लिए  हाथ  तो  फैलाए  था  ,  पर  मुँह  से   कुछ  न  कहता  था  l  सब  हैरान  हुए  कि  इसे  क्या  दिया  जाए   ?  बुद्धिमान  व्यक्तियों  की  एक  समिति  बैठाई  गई  l  किसी  ने  कहा  वस्त्र  देना  चाहिए  ,  किसी  ने  कहा  अन्न  देना  चाहिए  l  कोई  स्वर्ण  देने  को  कहता  था  l  समस्या  का  यथार्थ  हल  नहीं  निकला  l  राजा  की  कन्या  भी  वहां  उपस्थित  थी  ,  उसने  कहा ---- "  राजन  !  जो  व्यक्ति  न  बोल  सकता  है  , न  व्यक्त  कर  सकता  है   l  उसके  लिए  आभूषण  आदि  व्यर्थ  हैं  l  ऐसे  लोगों  के  लिए  सर्वश्रेष्ठ  दान  ' ज्ञान दान  है   l  ज्ञान  से  मनुष्य   अपनी  सब  इच्छाएं  ,  आकांक्षाएं   स्वयं  ही  पूर्ण  कर  सकता  है   और  दूसरों  को  भी  सहारा  दे  सकता  है  l  इसलिए  इसे  ज्ञान दान  दीजिए   l '  राजकन्या  की  बात  सभी  को  पसंद  आई   l  उस  व्यक्ति  के  लिए  शिक्षा  की  व्यवस्था  की  गई   l  यही  व्यक्ति  आगे  चलकर   उस  राज्य  का  विद्वान  मंत्री  नियुक्त  हुआ   l  ऋषि  कहते  हैं ---- अज्ञान  का  निवारण  ही  सच्चा  पुण्य -परमार्थ  है   l  यह  स्वाध्याय  से  और  ज्ञानार्जन  से  ही  संभव  है   l  

22 June 2024

WISDOM -----

   स्वामी  विवेकानंद  अपने  शिष्यों  के  साथ  पैदल  भ्रमण  को  निकले  l   निर्माणाधीन  मंदिर  के  पास  उनकी  द्रष्टि   तीन  मजदूरों  पर  पड़ी  l  उन्होंने  उत्सुकतापूर्वक   पहले  मजदूर  से  पूछा ---- " क्यों  भाई , क्या  कर  रहे  हो  ? " उसने  उत्तर  दिया ---- "  गधे  की  तरह  जुटे  हुए  हैं  , देख  नहीं  रहे  हो  l  दिन  भर  काम  करने   पर  थोड़ा -बहुत  मिल  जाता  है  , पर  इतने  के  लिए  ठेकेदार  मानो  जान  निकाल  लेता  है  l "  यही  प्रश्न  दूसरे  से  करने  पर   वह  बोला  ---- "  मंदिर  बन  रहा  है  , हमारी  तो  किस्मत  में  यही  था  कि  मजदूरी  करें  , सो  कर  रहे  हैं  l "   तीसरे  ने  भाव  भरे  ह्रदय  से   उत्तर  दिया  ----- "  भगवान  का  घर  बन  रहा  है  l मुझे  तो  प्रसन्नता  है  कि   मेरी  पसीने  की  कुछ  बूंदे  भी   इसमें  लग  रही  हैं  l  जो  भी  मुझे  मिलता  है  , उसी  में  मुझे  ख़ुशी  है  l    गुजारा   भी  चल  जाता  है   और  प्रभु  का  काम  भी  हुआ  जा  रहा  है  l  "  स्वामी जी  ने  शिष्यों  से  कहा --- "  "  यह  अंतर  है  तीनों  के  काम  करने  के  ढंग  में  l  मंदिर  तीनों  बना बना  रहे  हैं  लेकिन  एक  गधे  की  तरह  मज़बूरी  में  , दूसरा  यंत्रवत   भाग्य  के  नाम  पर  दुहाई  देता  हुआ   और  तीसरा   समर्पण  भाव  से  काम  में  जुटा  हुआ  है  l  यही  अंतर  इनके  काम  की  गुणवत्ता  में  भी  देखा  जा  सकता  है  l  क्या  कार्य  किया  जा  रहा  है  , यह  महत्वपूर्ण  नहीं  है  ,  उसे  किस  उदेश्य  से  , किस  भावना   से  किया  जा  रहा  है  , यह  मायने  रखता  है  l  "   

WISDOM -------

   गोपियों  ने  एक  बार  बाँसुरी  से  पूछा  ---- " तुम्हे  कृष्ण  स्वयं  हर  समय   होठों  से  लगाए  रहते  हैं   और  हम   सब  उनकी  कृपा   पाने  के  लिए   बहुत  प्रयत्न  करते  हैं  , परन्तु  सफल  नहीं  होते  ,  जबकि  तुम  बिना  प्रयत्न  किए  ही   उनके  अधरों  पर   रहती  हो  l  "  बाँसुरी  बोली  ---- " बिना  प्रयत्न  किए   नहीं  गोपियों  l  मैंने  भी  प्रयत्न  किया  है  l  जानती  हो  मुझे   मुरली  बनने  के  लिए   अपना  मूल  अस्तित्व  ही  खो  देना  पड़ा  है  l  "  गोपियों  को  तब  समझ  में  आया  l  बाँसुरी  अपने  आप  में  खाली  थी  l  उसमे  स्वयं  का  कोई  स्वर  नहीं   गूँजता  था  , बजाने  वाले  के  ही  स्वर  बोलते  थे   l  बाँसुरी  को  देखकर  कोई  यह  नहीं  कह  सकता  कि   वह  कभी  बाँस  रह  चुकी  है   क्योंकि  न  तो  उसके  कोई  गाँठ  थी   और  न  कोई  अवरोध  l  गोपियों  को  भगवान  का  प्यार  पाने  का   अनूठा  सूत्र  मिल  गया  l  

18 June 2024

WISDOM ----

    एक  बार  महाराजा  पुरंजय  ने  राजसूय  यज्ञ   का  आयोजन  किया  l  इसमें  उन्होंने  दूर -दूर  से   ऋषि -मुनियों  को  आमंत्रित  किया  l  प्रजा   के  सुख  के  उदेश्य  से   आयोजित  यज्ञ  में   विधि -विधान  से   आहुतियाँ  दी  जाने  लगीं  l  यज्ञ  की  पूर्णाहुति  का  दिन  आया  l महाराज , महारानी , राजकुमार   सभी  यज्ञ  मंडप  में  विराजमान  थे  l  वेड मन्त्रों  की  ध्वनि  से  वातावरण  गुंजित  हो  रहा  था  l  अचानक  एक  किसान  के  रोने  की  आवाज  सुनाई  दी  l  वह  रोते  हुए  कह  रहा  था  ---- " डाकुओं  ने  मेरी   संपत्ति  लूट  ली  l  मेरी  गाय   छीनकर    ले  गए  l  डाकू  अभी  थोड़ी  ही  दूर  गए  होंगे   l  राजा  तुरंत  उनको  पकड़कर   मेरी  संपत्ति  दिलाएं   l "    पंडितों  ने  कहा ---- "  इस  व्यक्ति  को  दूर  ले  जाओ   l  यदि  राजा  इस  पर  दया  करके   पूर्णाहुति   किए  बिना   उठ  गए   तो  देवता  कुपित   हो  जाएंगे  l  "  लेकिन  किसान  का  रुदन  सुनकर  राजा  के  ह्रदय  में  करुणा   जाग  उठी   , वे  बोले  ---- " मेरा  पहला  कर्तव्य   प्रजा  का  संकट  दूर  करना  है  l  मैंने  अनेक  यज्ञ  पूर्ण  किए  हैं  l  आज  मैं  पहली  बार  यज्ञ  पूर्ण  किए  बिना   अपने  राज्य  के  किसान  का   संकट  दूर  करने  जा  रहा  हूँ  l  "  राजा  के  यह  कहने  पर  साक्षात्  यज्ञ  भगवान  प्रकट  हुए   और  बोले  ---- "  राजन  !  तुम्हे  कहीं  जाने  की  आवश्यकता  नहीं   है  l   यह  तुम्हारी  परीक्षा  थी  कि  तुम   अपनी  प्रजा  के  प्रति  कर्तव्यपालन   करते  हो  या  नहीं   l  अब  आपको  सौ   राजसूय  यज्ञ  का  फल  मिलेगा   l  " 

15 June 2024

WISDOM --------

 आज  की  सबसे  बड़ी  समस्या  है  कि  लोगों  के  मन  में  शांति  नहीं  है   l  अशांत  मन  का  व्यक्ति  अपने  आसपास  अशांति  फैलाता  है  और  इस  तरह   अशांत  मन  के  लोगों  की  श्रंखला  बढ़ती  जाती  है   और  धीरे -धीरे  विकृत  रूप  ले  लेती  है  l  इस  अशांति  की  शुरुआत  परिवारों  से  ही  होती  है  l  यह  आदिकाल  से  चला  आ  रहा  है  l  भगवान  श्रीराम  को  वनवास  माता  कैकेयी  की  जिद्द  और  पिता  दशरथ  के  आदेश  से  हुआ  l  कोई  बाहरी  हस्तक्षेप  नहीं  था  l  इसी  तरह  महाभारत  में   पांडवों  के  विरुद्ध  जितने  भी  षड्यंत्र  रचे  गए  ,  उन्हें  वर्षों  तक  जितना  भी  उत्पीड़ित  किया  गया  वह  उन्ही  के  चचेरे  भाइयों  --दुर्योधन  आदि  कौरवों  द्वारा  किया  गया  l  हमारे  धर्मग्रन्थ   रामायण  और  महाभारत   हमें  जागरूक  करने  के  लिए  है  l  इन  महाकाव्यों  के  रचनाकार  को  पता  था  कि  कलियुग  में  जब  स्वार्थ , लालच , ईर्ष्या , द्वेष , महत्वाकांक्षा   और  दुर्बुद्धि  का  प्रतिशत  बहुत  बढ़  जायेगा   तब  ये  पारिवारिक  मतभेद  और  वीभत्स  रूप  ले  लेंगे  l  ये  महाकाव्य  हमारे  लिए  प्रकाश  स्तम्भ  हैं  l  कलियुग  में  लोगों  के  पास  बुद्धि  तो  बहुत  है  लेकिन  विवेक  नहीं  है  इसलिए  वे  अपनी  बुद्धि  का  दुरूपयोग  करते  हैं   l  परिवार  में , समाज  में  स्वयं  को  अग्रणी   और  अन्यों  को  गिरा -पड़ा   बनाने  के  लिए   ताकि  लोग  मदद  के  लिए  हमेशा  उनका  मुँह  ताकते  रहें  ,  इसके  लिए  लोग  तंत्र , मन्त्र , ब्लैक मैजिक  , नकारात्मक  क्रियाएं  आदि  का  सहारा  लेते  हैं  l  इन  कार्यों   का  सबूत  तो  केवल  ईश्वर  के  पास  होता  है  , कानून  के  पास  नहीं  l  अपराध  चाहे  कैसा  भी  हो  , यह  सत्य  है  कि  उसकी  शुरुआत  परिवार  से  ही  होती  है  l  परिवार  में  ही  छोटी -छोटी  चोरी  कर  के   व्यक्ति  बड़ा  चोर  बन  जाता  है  l  धन -संपत्ति  चुराने  से  भी  बड़ा   एनर्जी  वैम्पायर  भी  बन  जाता  है  l  ऐसे  लोग  रावण  की  तरह  कई  चेहरे  वाले  होते  हैं  l  इन्हें  पहचानना  कठिन  है  क्योंकि  समाज  में  इनकी  बड़ी  प्रतिष्ठा  होती  है  , परिवार  में  भी  यही  दिखाते  हैं  कि  वे  ही  सब  के  हितेषी  हैं  l  ईश्वर  की  कृपा  से    जब  ऐसे  लोगों  की  असलियत  समझ  में  आ  जाये   तो  हमारे  आचार्य , ऋषियों  का  मत  है  कि    दुष्टों  से  न    तो  मित्रता   करो  और  न  ही  वैर  रखो  l  इन्हें  त्याग  दो   जैसे  विभीषण  ने  रावण  को  त्याग  दिया  और  भगवान  श्रीराम  की  शरण  में  आ  गया  l  पांडव  भगवान  श्रीकृष्ण  की  शरण  में  आ  गए  l  जो  ईश्वर  का  शरणागत  हुआ  वह  सफल  हुआ   और  अत्याचारी  का  अंत  तो  सुनिश्चित  है  l  

14 June 2024

WISDOM --------

   1. बात  उन  दिनों  की  है  , जब  बुद्ध  के प्रथम  शिष्य   आनंद  श्रावस्ती   पहुंचे  l  नगर  के  श्रेष्ठियों   ने  उनसे  पूछा  ----- " बुद्धं  शरणं  गच्छामि '  का  अर्थ   महात्मा   बुद्ध  की  शरण  में  जाना   होता  है  क्या  ?    यदि  ऐसा  है   तो   यह  क्या  महात्मा   बुद्ध  के  अहंकार  का  द्योतक  नहीं  ? "   आनंद  बोले ---- " श्रेष्ठि  !  क्या  आपको  पता  है   कि  जब  श्रमण  समूह   चलता  है   तो  यह  सूत्र  सभी  बोलते  हैं  ,  स्वयं  भगवान  बुद्ध  भी  l   व्यक्ति  की  शरण  में   जाने  का  भाव  इसमें  होता   तो  वे  स्वयं   न  दोहराते  l "   आनंद  ने  स्पष्ट  किया  ----- " तथागत  का  नाम   तो  सिद्धार्थ  था  l   ज्ञान  के  प्रकाश  का  बोध   होने  पर  वे  बुद्ध  कहलाए   l  जिस  प्रकाश  ने  उन्हें   बुद्ध  बनाया  ,  उसी  दिव्य  -दूरदर्शी   विवेक  की  शरण  में  जाने  का  संकेत  इस  सूत्र  में  है  l "