4 October 2024

WISDOM ------

   राजा  ऋषभ देव   के  100  पुत्र  थे  l  उन्होंने  यह  व्यवस्था  कर  दी  थी  कि  उनकी   मृत्यु  उपरांत   ज्येष्ठ  पुत्र  भरत  को  राजगद्दी  दी  जाए   और  शेष  पुत्र  गृह  त्याग  कर  संन्यासी  हो  जाएँ   l  पिता  की   आज्ञा  शिरोधार्य  कर  वरिष्ठ  पुत्रों  ने  संन्यास  ले  लिया  l  बाहुबली  को  यह  निर्णय  स्वीकार  नहीं  हुआ  l  उसने  भरत  के  साथ   ज्ञान  की   प्रतियोगिता     रखवाई  l  उसमें  वह  जीत  गया  l  इससे  भरत  को  ईर्ष्या  हुई  l     उसने  बाहुबली  को  युद्ध  के  लिए   ललकारा  l  बाहुबली  ताकतवर  था  l  उसने  जैसे  ही  भरत  को  मारने  के  लिए  हाथ  उठाया  ,  उसे  यह  विचार  आया  कि  यदि  मैंने  अपने  भाई  के  प्राण  लेकर  राजगद्दी  संभाली  तो  राज्य  की  जनता  यही  कहेगी  कि  जो  राजा  बनने  के  लिए   अपने  भाई  का  खून  कर  सकता  है  ,  वह  जनता  की  सेवा  क्या  करेगा  ?  वह  महत्वाकांक्षा  को  त्यागकर  भरत  को  राजगद्दी  सौंपकर   मानवता  की  सेवा  हेतु  चल  पड़ा   और  तीर्थंकर  कहलाया  l  

3 October 2024

WISDOM -----

  एक  किसान  ने  अपनी  गाड़ी  में  बैलों  की  जगह  भैंसों  को  जोत  दिया  l  उसके  संगी -साथियों  ने  उसे  बहुतेरा  समझाया  ,  पर  उसे  कुछ  भी  समझ  नहीं  आया  , वह  बोला ---- " तुम  लोग  लकीर  के  फकीर   हो  l  कौन  सी  किताब  में  लिखा  है   कि  भैंस  से  खेत  नहीं  जोत  सकते  l  भैंसों  में  ज्यादा  ताकत  होती  है  ,  म मैं  तो  इन्ही  से  काम  लूँगा  l "   बड़े  शान  से  वह  भैंसों  को  लेकर  खेतों  की  ओर  चल  पड़ा   l  रास्ते  में  दलदल  पड़ा  तो   भैंसे  रास्ता  बदलकर  दलदल  में  जा  घुसे  l  किसान  ने  लाख  कोशिश  की   लेकिन  भैंसों  पर  कोई  असर  नहीं  l  सूरज  ढलने  पर  वे  खुद  बाहर  निकल  आए  l  किसान  के  मित्र  बोले ---- "  परंपरा  का  आँख  मूंदकर  पालन  करना  सही   नहीं  है  ,  पर  जो  सत्य  सामने  खड़ा  हो  ,  उससे  मुँह  फेर  लेना  मूर्खता  है  l  अब  किसान  को  बात  समझ  में  आई  l  

30 September 2024

WISDOM ----

   यमराज  ने  एक  बार  मृत्यु  को  एक  क्षेत्र  से  पांच  हजार  आदमी  मारकर  लाने   के  लिए  भेजा  l  जब  वह  झोली  भरकर  लाई   तो  गिनने  पर  वो  पंद्रह  हजार  निकले   l  जवाब  तलब  हुआ   कि  इतने  अधिक  क्यों  ?   मृत्यु  ने  सबूत  सहित   सिद्ध  किया  कि   बीमारी  से  तो   पांच  हजार  ही  मरे  हैं  l  शेष  तो  डर  के  मारे    बिना  मौत  ही  मर  गए   और  परलोक  आने  वाली  भीड़  के  साथ  जुड़  गए   l  

29 September 2024

WISDOM ----

  पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---- "  कायरता  मनुष्य  का  बहुत  बड़ा  कलंक  है  l  कायर  व्यक्ति  ही  संसार  में  अन्याय , अत्याचार  तथा  अनीति  को  आमंत्रित  किया  करते  हैं  l  संसार  के  समस्त  उत्पीड़न  का  उत्तरदायित्व  कायरों  पर  है  l  "   कलियुग  की   अनेक  विशेषताएं  हैं   लेकिन  यह  एक  ऐसी  विशेषता  है   जिससे  कोई  भी  छोटी  से  छोटी  और  बड़ी  से  बड़ी  संस्था , संगठन , कार्यालय  , कला,   साहित्य , राजनीति ------- आदि  कोई  भी  क्षेत्र  अछूता  नहीं  बचा  है  l  लोग  स्वयं  को  सर्वश्रेष्ठ , सभ्य , संभ्रांत  दिखाने  के  चक्कर  में  भीतर  से  खोखले  हो  गए  हैं  l  ऐसे  लोग  सामने  से , प्रत्यक्ष  रूप  से  कोई  विवाद  नहीं  करते ,  उनका  आचरण   इतना  उच्च  कोटि  का  होगा  कि  आप  यह   समझ  ही  न  पाओगे  कि  उनके  भीतर  कौन  सा  असुर  छिपा  है  l  सामने  मीठा  बोलते  हुए  वे  कायरों  की  भांति  पीठ  में  खंजर  भोंकते  हैं  l  दूसरों  की  योग्यता  से  ईर्ष्या ,  अहंकार  , लालच  ,  योग्यता  न  होने  पर  दूसरों  को  धक्का  देकर  आगे  बढ़ने  की  प्रबल  महत्वाकांक्षा    ---ये  ऐसे  कारण  है   कि   व्यक्ति   धोखा , छल , कपट  षड्यंत्र  रचता  है   जिससे  उसका  असली  चेहरा  समाज  के  सामने  न   आए  और  उसका  उदेश्य  भी  पूरा  हो  जाए  l   आचार्य  श्री  लिखते  हैं  ---- "  सच्चाई  को  छिपाया  नहीं  जा  सकता  l  मनुष्य  के  व्यक्तित्व  में  इतने  छिद्र  हैं  जहाँ  से  होकर  सत्य  बाहर  आ  ही  जाता  है  l  "  कुछ  वर्षों  पहले  जब  डाकुओं  की  समस्या  थी   तब  अनेक  डाकू  ऐसे  थे   जो  यह  घोषणा  कर  के  आते  थे  कि  हम  अमुक  गाँव  में  डाका  डालेंगे  ,  उनके  अपने  सिद्धांत  थे  लेकिन  शिक्षा  के  प्रचार -प्रसार  से    लोगों  को  यह  अच्छा  नहीं  लगा  कि  समाज  और  आने  वाली  पीढियां   उन्हें  ऐसे  अपराधी  के  रूप  में  पहचाने  l  इसलिए  अब  ऐसी  प्रवृत्ति  के  लोगों  ने  अपने  ऊपर  सफ़ेद  पोश   ओढ़  लिया  l  इसका  सबसे  बड़ा  नुकसान  यह  हुआ  कि  पहले  डाकू  एक  निश्चित  क्षेत्र  में  होते  थे  ,  उनकी  पहचान  थी   लेकिन  अब  शराफत  का  आवरण  ओढ़  लेने  के  कारण  वे  सम्पूर्ण  समाज  में  व्याप्त  हो  गए   और  लोगों  को   लूटने  के  भी  नए -नए  तरीके  हो  गए   l  अब  यह  समस्या  कैसे  हल  होगी  ?  यह  तो  समझ  के  बाहर  है  l  कलियुग  की  सबसे  बड़ी  जरुरत  है  कि  सब  लोग  ईश्वर  से  सद्बुद्धि  की  प्रार्थना  करें  l  

27 September 2024

WISDOM ------

  स्वार्थ , लालच , अहंकार , तृष्णा , कामना , वासना  , लोभ  , ईर्ष्या , द्वेष  , महत्वाकांक्षा  --- ये  बुराइयाँ  थोड़ी - बहुत  तो  सभी  में  होती   हैं  l  अल्प  मात्र  में  इनका  होना  नुकसानदेह  नहीं  होता  ,  इनकी  वजह  से  ही  व्यक्ति  तरक्की  की  राह  पर  आगे  बढ़ता  है   l    यही  बुराइयाँ  जब  किसी   व्यक्ति    में  अति  की  हो   जाती  हैं   तो  उससे  उसका  नुकसान  तो  बहुत  बाद  में  होता  है  ,  ऐसे  दुर्गुणों  से  ग्रस्त  व्यक्ति  अपना  संगठन  बना  लेते  हैं   l  बुराई  में  तुरत  लाभ  के  कारण  इस  क्षेत्र  में  आकर्षण  तीव्र  होता  है   और  ऐसे  लोग  बहुत  जल्दी  एक  बड़ा  संगठन  बनाकर   समाज  में  धोखा , छल , कपट , षड्यंत्र  जैसे  छुपे  हुए  अपराधों  का  हिस्सा  बन  जाते  हैं   l  इन  दुर्गुणों  की  अति   से  व्यक्ति  की  संवेदना  समाप्त  हो   जाती  है  ,  वह  केवल  अपना  स्वार्थ  देखता  है  l  इस  स्वार्थ  पर  किसी  की  भी  जिन्दगी  पर  खतरा  आ  जाए  उन्हें  कोई  फर्क  नहीं  पड़ता  l   भ्रष्टाचार , बड़े -बड़े  घोटाले ,  जघन्य  अपराध , परिवार  में  होने  वाली  हत्याएं , मुकदमे   आदि  इन  दुर्गुणों  की  अति  के  ही  दुष्परिणाम  है   l  सन्मार्ग  पर  चलने  वालों  की  संख्या  बहुत  कम  है , आसुरी  तत्व  उन्हें  चैन  से  जीने  नहीं  देते  l  वे  हमेशा  भयभीत  रहते  हैं  कि  प्रकाश  होगा  तो  अंधकार  का  अस्तित्व  ही  समाप्त  हो  जायेगा   l  आसुरी  प्रवृत्ति  के  लोगों  की  संख्या  बहुत  अधिक  होने  से   सबसे  बड़ी  समस्या  यह  होती  है  कि  कौन  किसे  दंड  दे ,  किसकी  शिकायत  करे  ?  सब  एक  नाव  में  सवार  हैं  l  ऐसे  में  कोई  ईश्वरीय  चमत्कार  ही  परिवर्तन  ला  सकता  है  l  

26 September 2024

WISDOM -------

    इस  धरती  पर  अनेक  सभ्यताओं  का  उदय  हुआ  और  अस्त  हुआ  l  ईश्वर  कभी  विनाश  नहीं  चाहते  ,  उन्हें  इस  स्रष्टि  में  धरती  बहुत  प्रिय  है  , वे  इसे  बहुत  सुंदर , खुशहाल  देखना  चाहते  हैं   लेकिन  कभी   ऐसी  परिस्थिति  निर्मित  हो  जाती  हैं  कि  ईश्वर  भी   निर्लिप्त  भाव  से  इस  विनाश  को  देखते  हैं  l  एक  अति  प्राचीन  सभ्यता   जो  बहुत  विकसित  थी  , युगों  तक  कायम  रही  लेकिन  अचानक  कुछ  हुआ  कि   उस  सभ्यता  का  नामोनिशान  मिट  गया  l  यह  सब  अचानक  नहीं  हुआ  , उसकी  किवदंती  है  ------   उस  प्राचीन  सभ्यता  में  सब  लोग  बहुत  खुश  थे  , स्वस्थ  थे  l  प्रेम  था , भाईचारा  था  l  शिक्षा , कला , साहित्य ----- जीवन   का  प्रत्येक  क्षेत्र   बहुत  विकसित  , सुंदर , सुहावना  था  l  लोग  इस  सत्य  को  जानते  थे  कि   ये  धरती , ये  मिटटी , हवा ,   जल , आकाश  को  हम  नहीं  बना  सकते  ,  कोई  अज्ञात  शक्ति  है   जिसने  यह  सब  बनाया  , वो  सर्वसमर्थ  है   इसलिए  हमें  उस  अज्ञात  शक्ति  के  आगे  अपना  शीश  झुकाना  चाहिए  l  तब  उस  सभ्यता  के  जो  बुद्धिजीवी  थे  उन्होंने  अपने -अपने  विचारों  के  अनुसार   उस  अज्ञात  शक्ति  को  एक  रूप  दिया  l   अनेक  रूप  थे  और  जिसको  जो  अच्छा  लगा , वह  उसके  आगे  शीश  झुकाने  लगा  l  वह  सभ्यता  अति  संपन्न  थी ,  जैसे  लोग  बड़े  महलों  में  सुखपूर्वक  रहते  थे  वैसे  ही  उन्होंने   उस   अज्ञात   शक्ति  के  लिए  भी  बड़े -बड़े  महल  बना  दिए  l  बड़ा  मोहक  वातावरण  था  l  इस  अति  की  सुख -शांति   की  खबर  आसुरी  शक्तियों  को   मिल  गई  ,  सीधे  रास्ते  बात  बन  नहीं  रही  थी  , उन्होंने  अपने  तरीकों  से  लोगों  के  मन  और  विचारों  में  गंदगी  भरनी  शुरू  कर  दी  l  विचारों  की  इस  गंदगी  को  व्यवहारिक  रूप  देना  था   और  संसार  में  स्वयं  को  सर्वश्रेष्ठ  भी  दिखाना  था  , इसके  लिए  उन्होंने   अज्ञात  शक्ति  के  लिए  जो  बड़े -बड़े  महल  बने  थे  , उन्हें  निशाना  बनाया  l  सामान्य  जन  तो  अभी  भी  वहां  श्रद्धा  से  अपना  शीश  झुकाने  जाता  था  , उसके  प्रति  अपना  आभार  व्यक्त  करता   कि  हे  धरती  माँ , जल  ,वायु , आकाश   हम  आपके  ऋणी  है   लेकिन  आसुरी  प्रवृति  के  लोगों  ने  उन  विशाल  महलों  की   अपनी  कामना , वासना , लालच , स्वार्थ , महत्वाकांक्षा   और  अतृप्त  इच्छाओं  की  पूर्ति  का  स्थान  बना  लिया  l  सामान्य  जन  को  उनकी  इन  करतूतों  की  भनक  न  लग  जाए  इसकी  भी  पर्याप्त  व्यवस्था  की ,  और  यदि  जनता  को  खबर  लग  जाये  तो  उन्हें  कंट्रोल  करने  के  साधन  भी  एकत्रित  कर  लिए   l  सामान्य जन  तो  बेखबर  था   लेकिन  ईश्वर  तो  सब  देख  रहे  थे   l  पाप  , अनाचार  की  अति  हो  गई   , प्रकृति  से  यह  सब  सहन  नहीं  हुआ  l  भयंकर   आँधी  , तूफ़ान , वर्षा ,   प्रलय  की  स्थिति  आ  गई   और  एक  भयानक  भूकंप  के  साथ  वह  सभ्यता  धरती  में  समा  गई   l  कुछ  लोग  जो  बच  गए  वे  आकाश  की  ओर  देखकर   बार -बार  पूछ  रहे  थे , प्रार्थना  कर  रहे  थे  कि  आखिर  ऐसा  क्यों  हुआ   ?   उनकी  आँखों  से  निरंतर  आँसू  गिर  रहे  थे  , ऐसा  क्यों  हुआ  ?   क्या    कुसूर  था  ?  ब्रह्माण्ड  से  एक  ही  आवाज  आई  --- ईश्वर  को  धोखा  दिया  , धोखा --- ---- उनकी  पवित्रता  को  नष्ट  किया  , सामान्य  जन  भी  जागरूक  नहीं  था  l  '  

24 September 2024

WISDOM ------

   आज  संसार  की  सबसे  बड़ी  समस्या  यह  है  कि  मनुष्य  की  चेतना  सुप्त  हो  गई  है  l  प्रत्येक  व्यक्ति  केवल  धन  के  पीछे  दौड़  रहा  है  ,  कितना  धन  कमा  ले , उससे  कितना  ऐश  कर  ले , कितना  आगे  की  पीढ़ियों  के  लिए  छोड़   दे  l  यह  छोड़ना  भी  एक  मज़बूरी  है , व्यक्ति  का  वश  चले  तो  वह  भी  बांधकर  ले  जाए  l   इस  तृष्णा  ने  सारी  सीमाएं  तोड़  दी  हैं  l  जो  हथियार  बनता  है  , वह  चाहता  है  कितने  युद्ध  हों  ताकि  उसका  धन  का  भंडार  बढ़ता  जाए  l  दवाई , इंजेक्शन  बनाने  वाले  की  इच्छा  है   कि  कितने  ज्यादा  लोग  बीमार  हो , बीमारी , महामारी  हो  जिससे  वह  अपनी  अमीरी  की  छाप  छोड़  सके l  बिल्डिंग  आदि  निर्माण  से   जुड़ा   व्यक्ति  सोचता  है   , जल्दी  टूटने  वाली  हो  जिससे  आमदनी  का  स्रोत  बना  रहे  l  शिक्षक , कलाकार , व्यापारी  हर  व्यक्ति   अपनी  बुद्धि    से   अपने  क्षेत्र  में  अतिरिक्त   धन  कमाने  के     उचित -अनुचित  किसी  भी  तरीके  से   अमीर   बनने  के  रास्ते  खोज  लेता  है   l  केवल  जीवन  का  यही  उदेश्य  रह  गया  है  l  धन  जीवन  के  लिए  बहुत  जरुरी  है , , सभी  आवश्यकताएं  धन  से  ही  पूरी  होती  हैं   लेकिन  अपनी  अनंत  आवश्यकताओं  के  लिए  व्यक्ति  अनैतिक , अमानवीय  तरीके  इस्तेमाल  करता  है , वह  गलत  है   l  धन  के  बल  पर  व्यक्ति  कानून  से  भी  बच  जाता  है ,  गलत  रास्ते  पर  चलकर  भी  सम्मानित  जीवन  जीता  है  l  लेकिन  ईश्वर  का  न्याय  तो  होता  है  l   इस  युग  में  मनुष्य  की  चेतना  सुप्त  इसलिए  कही   जाती  है  क्योंकि  ऐसे  लोगों  के  जीवन  में  कोई  बड़ा  दुःख  आ  जाये ,  भयंकर  बीमारी  आ  जाये   तब  भी  वे  लोग   सुधरते  नहीं  l   उनके  अहंकार  के  कारण  यह  बात  उनके   चिन्तन  में  ही  नहीं  आती  कि  उनके  गलत  कार्यों  की  वजह  से  ही  प्रकृति  उन्हें  दंड  दे  रही  है  l   l  मरणासन्न  स्थिति  में  पहुंचकर   यदि  पुन:  थोड़े  भी  स्वस्थ  हो  जाएँ  तो  फिर  से  पाप  कर्म  में  जुट  जाते  हैं  l  कलियुग  की  यही  सबसे  बुरी  बात  है  कि  व्यक्ति  सुधरना  ही  नहीं  चाहता   l  संसार  में  ऐसे  लोगों  की  अधिकता  है  l  सन्मार्ग  पर  चलने  वाले  बहुत  कम  हैं  l  यह  युग  का  असर  है  कि   सन्मार्ग  पर  चलने  वालों  को  आसुरी  शक्तियां  अपने  दलदल  में  घसीटने  की   जी -तोड़  कोशिश  करती  हैं  l  असत्य  का  बोलबाला  है , सत्य  उपेक्षित  है  l