17 August 2026
WISDOM -----
सनातन धर्म में गाय का कितना महत्त्व है , इसे समझाने वाली एक कथा है जो स्कन्द पुराण रेवाखंड की है ------- महर्षि आपस्तंब प्रभास क्षेत्र में देविका नदी के तट पर जल के भीतर रहकर भगवान शिव का ध्यान कर रहे थे l कुछ मछुआरों ने जाल फेंककर जब उसे बाहर निकाला तो उसमें महर्षि भी थे l मछुआरे घबराए और राजा नाभाग के पास जाकर उन्हें सारा वृतांत सुनाया तो वे दौड़े -दौड़े चले आए l महर्षि ने कहा ---- " राजन ! इन केवटों को मेरा उचित मूल्य दे दो तो ही मैं मुक्त हो सकूँगा l " राजा ने कहा --- " मैं एक लाख स्वर्ण मुद्राएँ देता हूँ l " महर्षि बोले --- " मुझे इस मूल्य से नहीं तोला जा सकता l " राजा ने पहले एक करोड़ मुद्राएँ , फिर आधा एवं फिर पूरा राज्य देने की बात कही l " महर्षि बोले ---- " यदि मेरा मूल्य समझ न आए तो ऋषियों से परामर्श करो l " इसी बीच राजा के दरबार में लोमश ऋषि आ गए l उन्होंने कहा --- " ये साक्षात रूद्र हैं , समस्त जगत के लिए पूजनीय हैं l इनके मूल्य के रूप में एक गौ दे दें l " जैसे ही राजा नाभाग ने महर्षि को गौ देने का समाचार दिया , उन्होंने कहा --- " राजन ! तुमने मेरा सही मूल्य लगाया है , मैं गौ से बढ़कर पवित्र कुछ भी नहीं समझता l " इसलिए हमारे धर्म में कहा गया है कि गाय की परिक्रमा और पूजा की जानी चाहिए l गोमूत्र , गोबर , दूध , दही , घी सभी पवित्र हैं और सम्पूर्ण जगत को पवित्र करते हैं l महाभारत में भी ऐसा उल्लेख मिलता है कि ऋषि ने महारानी कुंती को सलाह दी थी कि गौ माता की सेवा करने से श्रेष्ठ पुत्र की प्राप्ति होती है l ऋषि की सलाह को मानने का ही परिणाम था कि उन्हें पांच पांडवों की माता कहलाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जिन्हें साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण का संरक्षण प्राप्त था l इन कथाओं से यदि हम शिक्षण लें तो इस अशांत युग में भी गौ की सेवा से मन की शांति और भौतिक सुख प्राप्त किए जा सकते हैं l
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