26 March 2022

WISDOM ------

   पं. श्रीराम  शर्मा आचार्य जी  लिखते  हैं ------ " ध्वंस  के  संरजाम  तो  माचिस  की  एक  छोटी  सी  तीली  ,  आग  की  छोटी  चिन्गारी  भी    कर  सकती  है  l   पर  निर्माण  एक  झोंपड़े  का  भी  करना  हो  तो    ढेरों साधन  सामग्री   और  श्रमशीलों  की   कुशलता ,  तत्परता  चाहिए   l   मनुष्य  खोखला , उन्मादी   और  इस  स्तर   तक  अनाचारी  हो  गया  है   कि   उसे  नर -पशु  तक  नहीं  कहा    जा  सकता   ल मरघट  में  प्रेत   पिशाच   कोलाहल  करते   रहते  हैं   l   डरना  और  डराना   ही  उनका  प्रधान  कार्य  होता  है   l   मनुष्यों  में   एक बड़ी  संख्या   आज  ऐसे  ही  लोगों  की   दीख  पड़ती  है   l   भ्रष्ट  चिंतन  ही  दुष्ट  आचरण   का कारण  है   l  "  विचारों  का  परिष्कार  जरुरी  है  l  "                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                   

25 March 2022

WISDOM ------

  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य श्री  लिखते  हैं --- " आज  समाज  में  जो  भी  आतंकवाद , दंगे , युद्ध , खून -खराबे  बढ़  रहे  हैं  ,  वे  सब  भाव शून्यता   व  संवेदनहीनता  के  कारण  उपजे  हैं   और   यह सब  तभी  समाप्त  हो  सकता  है   जब  व्यक्ति  के  अंदर  संवेदना  जगे  और  वह  प्राणिमात्र  के  कल्याण  की  बात  सोचे   l  "-------------------  अति  वैभव  संपन्न  और  शक्तिशाली  होने  की  महत्वाकांक्षा  व्यक्ति  को  निर्दयी  बना  देती  है   l   बिना  अत्याचार  और  शोषण  के  धन   कमाना  संभव  भी  नहीं  है   l   रावण  के  कितने  ही  ऋषियों  का  खून  बहाया ,  प्रजा  पर  अत्याचार  किए   तब  वह  सोने  की  लंका  खड़ी  कर  पाया   l   रावण  हो  या  सिकंदर , तैमूरलंग ,  हिटलर   सबने  अत्याचार  के  कीर्तिमान  खड़े  किये  l   इतिहास  ऐसे  क्रूर  शासकों  की   सनक  से  भरा  पड़ा  है   , किसी  को  हाथियों  को  पहाड़   से गिराकर   उनकी  चिंघाड़  सुनने  में  आनंद  आता  था ,,  तो  कोई  लोगों  को   मारकर     उनकी  खोपड़ियों  का  पहाड़  बनाता   था  l   सबकी  प्रवृति , सबके  संस्कार  अलग - अलग  हैं  l   तितली  कितनी  सुन्दर  होती  है  , बाग़  में  जाएगी  , फूलों  पर  बैठेगी ,  उसे  देखकर  मन  प्रसन्न  होता  है   लेकिन   गुबरैला  कीड़ा   उसी  बाग़  में  जाकर   गंदगी  को  ढूंढेगा  और  उस  पर  बैठेगा   l   जिनके  पास  अपार  धन सम्पदा  है , शक्तिशाली  हैं  वे  निस्स्वार्थ  भाव  से  लोक  कल्याण  के  कार्य  करके ,  लोगों  की  पीड़ा  दूर  कर  के  इतिहास  में  अपना  नाम  स्वर्णाक्षरों  में  लिखा  सकते  हैं    लेकिन  अपनी  प्रवृति  के  अनुसार  उन्हें  अत्याचार ,  खून - खराबे  का  रास्ता  ही  आनंद  देता  है  ,  अनेक  तर्कों  से  वे  अपने  इस  मार्ग  को  सही  सिद्ध  करते  हैं  l   देवासुर  संग्राम  पहले  मनुष्य  के  भीतर  चलता  है    फिर  उसे  वे  बाहर  कार्य  रूप  में  अंजाम  देते  हैं    l 

24 March 2022

WISDOM -----

    भारतीय  संस्कृति  संसार  की  अन्य  सभी  संस्कृतियों  से  क्यों   श्रेष्ठ  है   ?  क्योंकि  यह  हमें  सिखाती  है  कि   कण - कण  में  भगवान  हैं  ,  हम  सब  एक  माला  के  मोती  हैं ,  हर  मोती  अपनी  जगह  महत्वपूर्ण  है  l  हमें  बचपन  से  ही  सिखाया  जाता  है  कि   कभी  किसी  का  घर  मत  तोड़ो ,  चिड़िया  ने  घोंसला  बनाया  है   तो  उसे  तोड़ो  नहीं ,  उसे  भी  जीने  का  हक   है  l  यदि   बगिया  में  किसी  पेड़  में  मधुमक्खी  ने  छत्ता  बनाया  है  तो  उसे  तोड़ो  नहीं  ,  वह  दूर - दूर  से  फूलों  का  पराग  लाती   है  , यह  घर - परिवार  में  खुशियों  के  आने  का  संदेश   देती  है  l   केवल  मनुष्य  ही  एक  ऐसा  प्राणी  है  जो  बेवजह  दूसरों  को  काटता   है , सताता  है   l   मधुमक्खी  को  यदि  छेड़ो  नहीं  ,  तो  चाहे  वह  अपने  सिर   पर  भी  बैठ  जाये ,  कभी  काटेगी  नहीं   l   पता  नहीं  मनुष्य  को  सद्बुद्धि  कब  आएगी  ,   मात्र  अहंकार  के  कारण    युद्ध - उन्माद   से   कितने  लोग  बेघर  हो  जाते  हैं  ,  शवों  की  तो  कोई  गिनती  ही  नहीं  होगी   l   यह  भी  आश्चर्य  है  कि   इतनी  लाशों  का  बोझ  कोई  कैसे  उठा  पाता   है   l   असुरता  का  हमेशा  से  ही  यह  प्रयास  रहा  है  कि   देवत्व  को  मिटा  दिया  जाये  ,  इसके  लिए  वे  साम , दाम , दंड ,  भेद  हर  नीति   का  सहारा  लेते  हैं   l   जब  हम  जागरूक  होंगे ,  धर्म  और  जाति   के  आधार  पर  आपस  में  लड़कर  अपनी  ऊर्जा  को  व्यर्थ  में  बरबाद   नहीं  करेंगे  ,  तभी  संगठित  होकर  हम  अपनी  संस्कृति  की  रक्षा  कर  सकेंगे   l 

23 March 2022

WISDOM -----

   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---- " बुद्धिजीवी  विचारशील  वर्ग  पर   भगवान  ने   संसार  रूपी  बगिया  के  माली  का  भार   सौंपा  है   l   यदि  वह  अपनी  जिम्मेदारी   को  निभाने  में  प्रमाद   करते  हैं   तो  किसी  न  किसी  समय ,  किसी - न -किसी   तरह    उन्हें  इसका  खामियाजा  भुगतना  पड़ेगा  l  "    आज  संसार  ऐसी  स्थिति  से  गुजर  रहा  है   कि    विश्व  शांति , पर्यावरण  सुरक्षा ,   बाल - कल्याण   जैसे   शब्द  अर्थहीन  हो  गए  हैं       असुरता  तभी  शक्तिशाली  होती  है  जब  देव  पक्ष  कमजोर  होता  है   और  कलियुग  में    जब  स्वार्थ , लालच ,  अति   महत्वाकांक्षा   लोगों  पर  हावी  होती  है  ,  वे  या  तो  डरते  हैं  या  फिर  अपनी  दुकान   बचाने   में  लगे  रहते   हैं  इसलिए  संगठित  होकर  असुरता  का  सामना  नहीं   करते   l   मनुष्य  के  भीतर  देवता  और  असुर  दोनों  हैं  ,  अपने  मन  के  तराजू  में  इन्हे  तोलने  की  जरुरत  है  ,  कहीं  उसमे  असुरता  का  पलड़ा  भारी  तो  नहीं  हो  गया   ?     आज  तक  ऐसी  कोई  दीवार  नहीं  बनी   है  जो  मृत्यु  को  रोक  सके    l 

22 March 2022

WISDOM -------

     पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---- ' समय  पुरस्कृत  करता  है  एवं  समय  ही  तिरस्कृत  करता  है   l   समय  का  पुरस्कार  उन्हें  मिलता  है  ,  जिनकी  सोच  सकारात्मक  है  ,  जिनके  श्रम  की  दिशा  निर्धारित  है  l   इसके  विपरीत  जिनकी  सोच  पर  निराशा  का  अँधेरा  छाया  हुआ  है  ,  जिनका  श्रम  दिशाविहीन  है  ,  वे  समय  के  हाथों  तिरस्कृत  होते  रहते  हैं   l  "   जिनकी  सोच  नकारात्मक  है  ,  दुर्भाग्यवश  जिन्हे  जीवन   में सही  मार्गदर्शन  नहीं  मिल  सका  ,  ऐसे  लोगों  की  स्थिति  वक्त  गुजरने  के  साथ  दयनीय  हो  जाती   है   क्योंकि  स्वार्थी  और  चालाक   लोग  ऐसे  ही  लोगों  की  तलाश  में  रहते  हैं    जिनकी  मदद  से  वे  अपना  स्वार्थ  सिद्ध  कर  सकें  l    वे  लोग  उन्हें  तरह -तरह  के  लालच  देकर  अपना  काम   निकालते   हैं   और  स्वार्थ  पूरा  हो  जाने  के  बाद  दूध  की  मक्खी  की  तरह  निकाल  फेंकते  हैं  l    हमारा   देश युगों  तक  गुलाम  रहा   इसका  कारण  यही  है  कि   ऐसी  नकारात्मक  सोच   के लोगों  ने  अपने  स्वार्थ  और  लालचवश  विदेशियों  की  मदद  की  ,  इसी  का  परिणाम  हुआ  कि   संख्या  में  बहुत  थोड़े  विदेशी  एक  विशाल  देश  को  अपना  गुलाम  बना  पाए   l   गुलामी   भी दो  प्रकार  की  होती  है  ---प्रत्यक्ष  और  अप्रत्यक्ष  l   प्रत्यक्ष  गुलामी  में    हमें   पता    रहता  है  कि   हम  पर  किसका  शासन  है ,   उससे  जीतना   संभव  है    और  हम  आजाद  भी  हुए       लेकिन  अप्रत्यक्ष  गुलामी  बेहद  कष्टकारक  होती  है  ,   इसमें  यह  स्पष्ट  ही  नहीं  होता  कि   परदे  के  पीछे  कौन  है   l  आज  के  वैश्वीकरण  और   विज्ञान    से  विकसित  माइंड  ने  परिस्थिति  को  बहुत   जटिल बना  दिया  है   l    

WISDOM -------

     संसार  में  जो  कुछ  है ,  वह  सब  ईश्वर  की  देन   है  l   यदि  ईश्वर  पर  दृढ़   विश्वास  हो   तो   सत्य  समझ  में  आ  जाता  है  ----  श्री  रामकृष्ण  परमहंस  के  शिष्य   हरिप्रसन्न  चटर्जी  संन्यास  के  बाद  स्वामी  विज्ञानानंद   नाम  से  प्रसिद्ध   हुए  l   वे  इंजीनियर   थे  , विवाह  नहीं  किया  था   l  सदैव  प्रसन्न  रहते  थे  l  कहते ,  मैं  रामजी  का  बंदर   हूँ  l   ठाकुर  आये  तो  मैं  भी  आ  गया  l   रामकृष्ण  परमहंस  को  वे  राम  के  रूप  में  पूजते  थे   l   ठाकुर  के  जाने  के  बाद   वे  ' वाल्मीकि  रामायण '  का  अंग्रेजी  अनुवाद  करने  में    लग  गए   l  सतत   मन  लगाकर  घंटों  बैठे  रहते   l  लोग  पूछते  --- आप  इतनी  देर  कैसे  बैठ  लेते  हैं   l  '  वे  कहते  --- " यह   अनुवाद  नहीं  है  l   मैं  कथा  में  इतना  रम  जाता  हूँ   कि   मेरे  सामने  राम , सीता ,  हनुमान  सब  आ  जाते  हैं  l   मैं  अनुरक्त  हो  जाता  हूँ  l  "  उसी  भाव  प्रवाह  में  वे  लिखते  थे  ,  क्योंकि  उन्हें  साक्षात्  प्रभु  का  सान्निध्य  मिलता  था   l  

21 March 2022

WISDOM ------

   आज  का  समाज  चाहे  वह  किसी  भी  धर्म ,  जाति   का  हो  , यहाँ    तक    कि   सम्पूर्ण  धरती  पर  ही  पुरुष  प्रधानता  है  l   इसका  एक  नकारात्मक  पक्ष  यह  है  कि   प्राचीन  काल  से  आज  तक  जितने  भी  युद्ध  हुए , दंगे - फसाद ,  आगजनी ,  गोलाबारी ,  हत्या ,  अपराध ,  नारी  उत्पीड़न , छोटे - छोटे  बच्चों  को  सताया  जाना  ,  अनेक  ऐसे  अपराध  जिनका  लिखना  और  बोलना  भी   अक्षम्य  है ---- इन  सब  में  भी ' पुरुष  प्रधानता ' है  l   इस  वर्ग  ने  अपनी  प्रधानता  से  संसार  को  सुख - शांति   नहीं  दी  ,  सुख - चैन  छीना   है    l   हम  सब  एक  माला  के  मोती  है   l   एक  भी  अनैतिक , अमर्यादित  कार्य  समूची  मानवता   और   पर्यावरण   के  लिए  घातक  है   l  ऐसे  में  माला   का अस्तित्व  ही  खतरे  में  पड़   जाता  है   l    कहते  हैं  हर  अति  का  अंत  होता  है  l      जब  अत्याचार   और अन्याय  से  प्रकृति  भी  कराह  उठे ,   निर्दोष  बच्चों  के  आंसुओं  से  ब्रह्माण्ड  में  भी  कम्पन्न  हो  जाये ,  मानव  जाति   दया , करुणा , संवेदना ,  आत्मीयता    जैसे  गुणों  को  भुला  दे   ,  तब   भगवान  को  आना  ही  पड़ता  है  ,  परिवर्तन  के  लिए   l   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  है  --- ' इक्कीसवीं  सदी  नारी  उत्कर्ष  की  सदी  है   l    विधाता  ने  उसे   समूची  मानवता  को   विकसित - परिष्कृत  करने  और  मुक्तिदूत  बनने  का  गरिमापूर्ण  दायित्व  सौंपा  है   l  यह  अपने  युग  का  सुनिश्चित  निर्धारण  है   l  "