19 August 2026

WISDOM -----

  संसार  में   बहुत  लम्बे समय  से  धर्म  पर  चर्चाएँ  होती  रही  हैं  l  कौन  सा  धर्म  सर्वश्रेष्ठ  है  ,  किसका  वर्चस्व  रहेगा     यह  सब  विवाद  बहुत  सामान्य  हो  गया  है   लेकिन  सर्वश्रेष्ठता  का  पैमाना  क्या  होगा   ?  संख्यात्मक  वृद्धि  या  गुणात्मक  वृद्धि   ?  किसे  आधार  माना  जाए  l  पं . श्रीराम  शर्मा जी  ने  अपने  प्रवचनों  में  बहुत  सरल  ढंग  से  समझाया  है  l  आचार्य श्री  कहते  हैं  ---"भगवान  को  समीप  बुलाने  का  एक  ही  मार्ग  है  कि  हम  ' धर्म  पथ  '  पर  अग्रसर  रहें   और  पात्रता विकसित  करें  l  सत्पात्र  की  दो  ही  निशानियाँ  हैं  ---1 .उसका  चरित्र  पवित्र  और  पारदर्शी   हो  l  2 . उसके  ह्रदय  में   करुणा  हो  , संवेदना  हो  l  जिस  व्यक्ति  का  व्यक्तित्व  ऐसा  शानदार  और  मजबूत  होगा   भगवान  उसके  पास  खिंचे  चले  आते  हैं  l  "      उनके इन  वचनों  से  यही  स्पष्ट  होता  है  कि  सद्गुणों  से  युक्त  व्यक्ति   जिस  भी  धर्म  में  अधिक  होंगे   वही  धर्म  सर्वश्रेष्ठ  कहलाएगा   और  वही  चिरकाल  तक  कायम  रहेगा  l  अब  समस्या  यही  है  कि  कलियुग  में  पाप  , अनीति , अपराध , अत्याचार   आदि  दुर्गुणों  की  बाढ़  आ  गई  है  ,  तो  सद्गुण  कैसे  स्थापित  हों   ?    समाज  को  दिशा  देने   वाले  ही  दिशाभ्रमित  हैं  ,  उनके  कोरे  उपदेशों  का  कोई  असर  नहीं  होता  l  आचरण  से  ही  शिक्षा  दी  जा  सकती  है   लेकिन  ऐसे  लोग  बहुत  कम  हैं  जिनके  आचरण  और  व्यवहार  में  एकरूपता  हो  l  आज की  युवा  पीढ़ी  तो  इतनी  बुद्धिमान  है   कि  समाज  के  बड़े -बड़े   और  जिम्मेदार  लोगों  का  भूत , वर्तमान  सब  खोज  लेती  है  l  बुराई  का  मार्ग  बहुत  सरल  होता  है  , पानी  नीचे  की  ओर  बड़ी  तेजी  से  गिरता  है   इसलिए  युवा  पीढ़ी  का  भटकना  स्वाभाविक  है  l  आज  संसार  पतन  और  पराभव  की  ओर  जा  रहा  है  ,  इस  स्थिति  को  पलटने  का   और   अपनी चेतना  को उच्च  स्तर  पर  ले  जाने  का  एक  ही  मार्ग  आचार्य  श्री  ने  संसार  को  बताया   और  वह  है  ---- ' गायत्री मंत्र   '  l  यदि  संसार  में  सभी  लोग  इस   मन्त्र  को  अपनी  पूजा  का  अभिन्न  अंग  बना  लें   तो  नकारात्मकता  दूर  होगी   l  व्यक्ति  के  जीवन  में , वातावरण  में  सकारात्मकता  आएगी  l  आचार्य  श्री  कहते  हैं  --- हम  मंत्र  का  अर्थ  जाने  या  न  जाने  ,  यदि  हम  श्रद्धा  और  विश्वास  से  मंत्र   जप  करते  हैं   तो   मंत्र  के  देवता  अवश्य  आते  हैं  और  आशीर्वाद  देते  हैं  l  '

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