1 September 2026

WISDOM

 कहते  हैं  जो  कुछ  महाभारत  में  है  , वही  इस  धरती  पर  है   और  बहुत  कुछ  ऐसा  भी  है   जिसके  धरती  पर  होने  के  संकेत  हैं  l  महाभारत  के  युद्ध  के  लिए  कहा  जाता  है  --' न  भूतो , न  भविष्यति  ' l  स्वयं  भीष्म  पितामह  ने  कहा  था  कि  इस  युद्ध  के  कारण  यह  धरती  शूरवीरों  से  रहित  हो  जाएगी  l-------------------- महाभारत  के  युद्ध  में  भीष्म  जैसे  महा योद्धा  को  पराजित  करना  किसी  भी  योद्धा  के  लिए  संभव  नहीं  था  लेकिन  ईश्वर  ने  सब  की  मृत्यु  का  विधान  रचा  है  l  पांडवों  के  प्रार्थना  करने  पर   उन्होंने  स्वयं  युधिष्ठिर  को  बताया  कि  अर्जुन  के  रथ  पर  यदि  कोई   स्त्री  बैठी  होगी  तो वे   वीरोचित  प्रतिष्ठा  के  कारण  अपना  धनुष  रख  देंगे  ,  और  तब  उन्हें  पराजित  करना  संभव  होगा  l  अर्जुन  ने  शिखंडी   को  अपने  रथ  में  आगे  बैठाया  ,  तब  भीष्म  पितामह  ने  कोई  बाण  नहीं  चलाया  और  अर्जुन  के  बाणों  से  घायल  होकर  धरती  पर  गिर  पड़े  l  यह  शिखंडी  कौन  थी  ?   इसी  प्रश्न  के  उत्तर  में  इस  युग  के  लिए  कोई  संकेत  स्पष्ट  होता  है  l   शिखंडी  ,                '  शिखंडी  '  कैसे  बन  गई  इसकी  एक  कथा  है  ---संक्षेप  में  काशिराज  की  तीन  अति  सुन्दर   कन्याएं  थी  l  भीष्म  पितामह  ने  अपने  भाई  विचित्रवीर्य  के  विवाह  के  लिए  स्वयंवर  मंडप  से  उन  तीनो  का  हरण  कर  लिया  l   उनमें  से  दो  का  विवाह  तो  विचित्रवीर्य  के  साथ  हो  गया  लेकिन  तीसरी  कन्या  जिसका  नाम  अम्बा  था  वह   राजा  शाल्व  को  अपना  पति  मान  चुकी  थी  इसलिए  पितामह  ने  उसे  राजा  शाल्व  के  पास  भेज  दिया  l  लेकिन  अब  राजा  शाल्व  ने  दूसरे  की  जीती  हुई  कन्या  से  विवाह  करने  को  मना    कर  दिया  l  बेचारी  अम्बा  छ  वर्ष  तक  राजा  शाल्व  और  हस्तिनापुर  के  बीच  ठोकरें  खाती  रही  ,  रो -रोकर  उसके  आँसू  सूख गए  राजा  शाल्व  और  विचित्रवीर्य  , किसी  ने  भी  उससे  विवाह  नहीं  किया  l  अब  वह   भीष्म   पितामह  को  अपने  दुःख  का  कारण  मान  कर  उनसे  बदला  लेने  के  लिए  अनेक  राजाओं  के  पास  मदद  के  लिए  गई  लेकिन  भीष्म  जैसे  वीर   और  महान  योद्धा  से  टक्कर  लेने  की  हिम्मत  किसी  में  न  थी  l  सब  तरफ  से  निराश  होकर  उसने  भगवान  शिव  की  तपस्या  की  l  प्रसन्न  होकर  शिवजी  ने  उसे  वरदान  दिया  कि  इस  जन्म  में  तो  नहीं  , अगले  जन्म  में  तुम्हारे  हाथों  भीष्म  की  मृत्यु  होगी  l  अम्बा    में  अब  इतना  धैर्य  नहीं  था  कि  वह  मृत्यु  का  इंतजार  करे  ,  उसने  धधकती  हुई  आग  में  कूदकर  अपने  प्राणों  की  आहुति  दे  दी   और  अगले  जन्म  में  उसने  महाराज  द्रुपद  के  यहाँ  कन्या  रूप  में  जन्म  लिया  , उसे  पिछले  जन्म  की  सब  बातें  याद  थीं  l  उसने  वन  में  पुन :  कठोर  तपस्या  की  और  अपने  तपोबल  से  वह  पुरुष  बन  गई  और  उसने  अपना  नाम  शिखंडी  रख  लिया  l  भीष्म  पितामह  इस  सत्य  को  जानते  थे  इसलिए  उन्होंने  शिखंडी  को  देखकर  अपने  सब  अस्त्र -शस्त्र  नीचे  रख  दिए  l  भीष्म  पितामह  के  गिरते  ही  यह  निश्चित  हो  गया  कि  दुर्योधन  के  अत्याचार  और  अन्याय  का  अंत  निकट  है  l    ----इस  प्रसंग  से  इस  युग  के  लिए  यही  संकेत  मिलता  है  कि  अत्याचार  ,   अन्याय  के  अंत  के  लिए  शिखंडी  को  ही  आगे  आना  पड़ेगा  l  पुरुष  वर्ग  अपने  विकारों  से  ग्रस्त  है,    उनमें  सुधार  संभव  नहीं  दीखता  l  महिलाओं  को  स्वतंत्रता  मिली  , लेकिन  महिलाओं  के  एक  बड़े  भाग  ने  अपनी  स्वतंत्रता  का  सदुपयोग  नहीं  किया  , अपने  कर्तव्यों  से  विमुख  हो  गईं   l  स्वतंत्रता  में   स्वछंदता  का  जो  थोड़ा  भी  अंश  आ  गया   तो    नवयुग  के  निर्माण  में  उसका  योगदान  कैसे  संभव  होगा  ?  महाभारत  सत्य  है  तो   एक नए नए  युग  के  निर्माण  में  शिखंडियों  की  भूमिका  सराही   जाएगी  l  

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