19 September 2026

WISDOM ------

 कहते  हैं  जो  कुछ  महाभारत  में  है  वही  इस  धरती  पर  भी  है   और  अहंकार  एक  ऐसा  रोग  है  जो  शक्ति  और  सम्पन्नता  के  साथ   रहने  वाला  असाध्य  रोग  है  l  इस  अहंकार  को  किसी  की  सलाह  पसंद  नहीं  है  , किसी  ने  भी  उनके  अहं    को  चुनौती  दी  तो  खैर  नहीं  !  यह  स्थिति   प्रत्येक  युग  में  रही  है  l  महाभारत  में  विदुर   नीति निपुण  , महाज्ञानी  थे  l  धृतराष्ट्र  को  राज-काज  संबंधी  सही  सलाह  देते  थे  , कभी  कुछ  ऐसी  सलाह  दी   जो  युवराज  दुर्योधन  को   सहन  न  हो  सकी  और  उसने  विदुर जी  को   राजमहल  से  , सभी  राज सुख  से  बाहर  कर  दिया   और  तब  विदुर जी  महल  से  बाहर  कुटिया  बनाकर  रहने  लगे  l  उस  समय  ऐसे  अपराध  का  यही  दंड  था  , जेल  या   किसी  प्रकार  का  उत्पीड़न  नहीं  था  l  ऐसी  परिस्थिति  में  रहने  पर  विदुर  जी  का  स्वाभिमान  से  जीवन  जीना  प्रेरणादायी  है  l  उनके  जीवन  की  श्रेष्ठता  ऐसी  थी  कि  उन्हें  ईश्वर  की  कृपा  मिल  गई  थी  और  जिसे  ईश्वर  की  कृपा  मिल  जाए  , उसके  लिए  सिंहासन , राजसुख  सब  मिटटी  के  समान  हैं  l  विदुर जी  के  सामने  दुर्योधन  की  सबसे  बड़ी  हार  यही  थी  कि  स्वयं  भगवान  कृष्ण   दुर्योधन  के  राजमहल  के  मेवा , पकवान  त्याग  कर  विदुर  जी  के  यहाँ  साग -रोटी  खाकर  तृप्त  हुए  l  सुख  कभी  स्थायी  नहीं  होता  , जिन्हें  राज सुख  का  लालच  था  , अत्याचार  और  अनीति  का  साथ  देने  के  कारण  दुर्योधन  के  साथ  उनका  भी  अंत  हुआ  l  

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