16 October 2026

WISDOM -----

 हमारे  प्राचीन  ऋषि  मानव  मन  के  मर्मज्ञ  थे  l  उन्होंने  मानव  समाज  के  कल्याण  के  लिए  चार  आश्रम  की  व्यवस्था  की  थी  ---- ब्रह्मचर्य आश्रम , गृहस्थाश्रम , वानप्रस्थ  आश्रम  और  संन्यास आश्रम  l  इस  आश्रम  व्यवस्था  के  पालन  से  संसार  में  शांति  संभव  है  l  आज  सम्पूर्ण  संसार  में  बेहद  अशांति  है  ,  युवा  वर्ग  सबसे  ज्यादा  परेशान  है  l   युवाओं  का  परेशान  होना  स्वाभाविक  है  क्योंकि  उनकी  एनर्जी   का  उत्पादक  कार्यों  में  उपयोग  नहीं  हो  रहा   इसलिए  वे  भटक  रहे  हैं  ,  उन्हें  कोई  सही  रास्ता  , सही  दिशा  नहीं  मिल  रही  है  l  आश्रम  व्यवस्था  से  यह  समस्या  हल  हो  सकती  है   l  इसे  सरल  ढंग  से  इस  तरह  समझ  सकते  हैं    जैसे  ------  जब  कभी  सड़कों  पर  जाम  लग  जाता  है  , यदि  जो  लोग  और  वाहन  आदि  जो  सबसे  आगे  हैं  , यदि  वे  आगे  नहीं  बढ़ेंगे  तो  यह  जाम  बढ़ता  ही  जायेगा  l  यदि  उचित  व्यवस्था  नहीं  हुई  तो  जाम  इतना  अधिक  हो  जायेगा , निरंतर  बढ़ता  जायेगा  l  लोग  परेशान  होंगे  और  कोहराम  मच  जायेगा  l  आज  सारे  संसार  में  जाम  लग  गया  है  l  हमारे  ऋषियों  ने  वानप्रस्थ  और  संन्यास  आश्रम  की  इसीलिए  व्यवस्था  की  थी  कि   एक  निश्चित  आयु के  बाद  व्यक्ति   सांसारिक  आकर्षण  में उलझा  न  रहे  ,   अपने  जीवन  के  अनुभव  और  समाज  से  जो  मिला  है  , वह  निष्काम  भाव  से  समाज  को  दे   ,  जिस  से  युवा  पीढ़ी  के  लिए  रास्ता  खाली  हो  जाये   और  उन्हें  अपनी  ऊर्जा  का  सदुपयोग  करने  का  पर्याप्त  अवसर  मिले  l  लेकिन  वर्तमान  की  जो  स्थिति  है  उसमें  त्याग  का  भाव   कहीं  नहीं  है  l  हर  क्षेत्र  में  जाम  लगा  है   कहीं  लालच  का , कहीं  महत्वाकांक्षा  का   l   आयु  की  एक  सीमा  पार  कर  गए   लोगों  में   कामना , वासना  , अहंकार  , स्वार्थ  , भोग -विलास  की  लालसा  इतनी  अधिक  है    कि   इस  कारण  युवा  पीढ़ी   को  अपनी  एक  पहचान  बनाने  का  मौका  ही  नहीं  मिल  रहा  l  युवा  पीढ़ी  का  ज्ञान , उनकी  वैज्ञानिक  समझ , और  अथक  ऊर्जा  का  भण्डार  , उनकी  कुंठा  के  साथ  मिलकर   किस  रूप  में  संसार  के  सामने  आएगा   यह  तो  वक्त  ही  बताएगा  l  

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