संसार में कितना भेदभाव , कितनी असमानता है l लोग जाति , धर्म के आधार पर लड़ाई - झगड़ा कर अपना जीवन बरबाद करते हैं l एक शासन ऐसा भी है जहाँ कोई भेदभाव नहीं है , रंग - रूप , जाति , धर्म , अमीर - गरीब , ऊंच -नीच , मूरख - बुद्धिमान --- किसी भी आधार पर कोई भेदभाव नहीं , सबके लिए एक ही नियम है , और वह शासन है --- यमराज का शासन l यम मृत्यु के देवता हैं l मृत्यु के समक्ष , यम के समक्ष सब समान हैं l यहाँ किसी के साथ कोई पक्षपात नहीं , न कोई अनिश्चितता , न कोई भेदभाव l इसलिए गीता में भगवान ने यम को अपना स्वरुप कहा है l
2 January 2022
WISDOM -----
श्रीमद्भगवद्गीता के विभूति योग में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं ---' मैं गिनती करने वालों में समय हूँ l ' पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं ---- ' जीवन का अर्थ है ' समय ' l जो जीवन से प्यार करते हों , वे आलस्य में समय न गंवाएं l समय की कुछ विशेषताएं हैं -- सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि किसी को एक क्षण से ज्यादा समय कभी नहीं मिलता , कभी भी नहीं मिलता l जब एक क्षण निकल जाता है , तभी उसे दूसरा मिलता है l दूसरा निकल जाता है , तब तीसरा मिलता है l किसी के भी हाथ में एक साथ दो क्षण कभी भी नहीं होते l कोई कितना ही बड़ा धनी हो , कोई कितना बड़ा महायोगी हो , या फिर कितना ही बड़ा ज्ञानी हो , वैज्ञानिक हो , इनमे से कोई भी समय को धोखा नहीं दे सकता l भारतीय जीवन दृष्टि के हिसाब से प्रत्येक व्यक्ति के पास गिने हुए क्षण हैं l कोई भी व्यक्ति अपने गिने हुए क्षणों से ज्यादा नहीं जी सकता l भारतीय जीवन दर्शन के हिसाब से जिंदगी की सीमा पिछली जिंदगी के कर्मों से नियत होती है l हमने जो पिछले जन्मों में किया है , वह हमारी वर्तमान जिंदगी के समय को तय करता है l इस मिले हुए समय के क्षणों का हम कैसे सदुपयोग करते हैं , इसी पर हमारा भविष्य निर्भर करता है l समय की इसी महिमा ने उसे भगवान की विभूति बना दिया l '
1 January 2022
WISDOM ----
स्वामी विवेकानंद शिकागो सर्वधर्म सम्मलेन में सम्मिलित होने पहुंचे l उन्हें डॉ बेरोज के घर जाना था , परन्तु जिस कागज पर पता लिखा था ,वह कहीं गुम हो गया l उन्होंने कई लोगों से डॉ बेरोज के घर का पता पूछा , परन्तु किसी ने उनकी सहायता नहीं की , वरन उनका उपहास ही किया l वे भूखे -प्यासे थे और सर्दी से ठिठुर रहे थे l लकड़ी के डिब्बे के भीतर बैठकर उन्होंने किसी तरह रात गुजारी l सुबह होने पर वे सोचने लगे -- परिस्थितियां कैसी भी हों , परमात्मा सदा हमारे साथ होते हैं और जिसे परमात्मा पर विश्वास हो , उसे कैसी चिंता l उन्हें पूर्ण विश्वास था कि जब मनुष्य किसी सत्कार्य के लिए अपने शरीर व मन को नियोजित कर देता है तो दैवीय चेतना उसकी सहायता के लिए तत्पर हो जाती है l हुआ भी वैसा ही l एक महिला उनके पास पहुंची और उनकी हर प्रकार से मदद के लिए आगे आई l स्वामी जी ने सम्मलेन में भाग लिया और उसके बाद जो घटा , उसका इतिहास साक्षी है l
24 December 2021
WISDOM -----
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं ---- " असुरों का मायावी होना प्रसिद्ध है l माया , छल , प्रपंच , चालाकी , कूटनीति , षड्यंत्र रचना की उनकी नीति प्रमुख है l उसी के आधार पर वे अपने से असंख्य गुने बलवान देवताओं को परास्त कर देते हैं l " युग चाहे कोई भी हो , असुर अपने इन्ही दुष्प्रवृतियों से समाज में अशांति , तनाव उत्पन्न करते हैं , ऐसे कार्यों को करते हैं जिससे लोग अस्वस्थ हों , शारीरिक और मानसिक दृष्टि से कमजोर होकर उनसे पराजित हो जाएँ l भ्रष्टाचार , मिलावट , कृषि में रासायनिक तत्वों को मिलाकर प्रदूषित करना , लोगों का माइंड वाश कर देना , दंगे - फसाद कराना , परिवार में फूट डलवाना , झगड़े कराना यह सब असुरता के ही लक्षण है l यह सब आदिकाल से हो रहा है l ताण्डव ब्राह्मण की कथा है --- एक बार असुर अन्न में घुस गए ताकि उन्हें देवता खा लें और वे उनके शरीर व मन में प्रवेश कर अपना आधिपत्य जमा लें l देवराज इंद्र ने उनकी इस चाल को पकड़ा और असुरों को मार भगाया l राजा परीक्षित के मुकुट में चढ़कर ( माइंड वाश ) उनसे लोमश ऋषि के गले में सांप डलवाना , केकयी और मंथरा की बुद्धि भ्रष्ट करना l जागरूक होकर , संगठित होकर , विवेक बुद्धि से ही असुरता को पराजित किया जा सकता है l
22 December 2021
WISDOM -------
पुराण में कथा है ----- नारद जी गोलोक धाम गए वहां उन्होंने भगवान कृष्ण से मथुरा में कंस के अत्याचार की अंतहीन कथा का बयान किया , उन्होंने कहा ---- " कंस की क्रूरता एवं नृशंसता का कोई ओर - छोर नहीं है l वह इन दिनों अपनी शक्ति , सत्ता एवं धन से और भी मदांध हो गया है l वह किसी की नहीं सुन रहा है l वह किसी की नहीं सुन रहा है l हे नारायण ! कंस तो खड्ग उठाकर देवकी - वसुदेव का सर्वनाश करने चल पड़ा है l अब क्या होगा प्रभु ! " भगवान कहते हैं --- " इस सृष्टि के विधान में कभी भी निर्दोष को सजा नहीं मिलती , बेक़सूरवार कभी भी दंड का भागीदार नहीं होता l कंस के हाथों माता देवकी और पिता वसुदेव का अंत नहीं लिखा है l उनका इतना भोग नहीं बनता कि उनको कंस के हाथों प्राण गंवाने पड़े l लेकिन उनका कुछ भोग है जिसके परिणामस्वरूप कंस उनको सता रहा है l इस सृष्टि में काल और कर्म से बड़ा कोई नहीं है , कंस भी नहीं l काल और कर्म के अनुसार ही भोग का विधान बनता है l अच्छा और बुरा दोनों ही काल के द्वारा संचालित होते हैं l कंस को काल दण्डित करेगा l जब काल दण्डित करता है तो फिर उसे कोई बचा नहीं सकता है l "
20 December 2021
WISDOM ------
जार्ज बनार्ड शॉ ने लिखा है ---- " जो व्यक्ति समाज से जितना ले यदि उतना ही उसे लौटा दे तो वह एक मामूली भद्र व्यक्ति माना जायेगा l जो समाज से जितना ले उससे कहीं अधिक उसे लौटा दे तो उसे एक विशिष्ट भद्र व्यक्ति कहा जायेगा और जो अपने जीवनपर्यन्त समाज की सेवा में लगा रहे और प्रत्युपकार में समाज से कुछ भी लेने की इच्छा न रखे वह एक असाधारण भद्र पुरुष कहलावेगा l परन्तु जो व्यक्ति समाज का सिर्फ शोषण ही करता रहे और समाज को देने की बात भूल जाये उसे क्या ' जेंटलमैन ' माना जायेगा ? "
WISDOM -----
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं ---- पशु - पक्षी आदि जीव बीमार पड़ जाने पर मनुष्य की तरह इलाज कराने अस्पताल नहीं जाते l वे आहार ग्रहण करना छोड़ देते हैं l पूर्णत: उपवास पर रहते हैं l सूर्य की धूप में पड़े रहते हैं , प्रकृति का सेवन करते हैं , इससे वे शीघ्र स्वस्थ हो जाते हैं l मनुष्य के पास रोग निवारण हेतु आज इतनी पैथियाँ हैं , पर वह स्वास्थ्य - लाभ नहीं कर पा रहा है l कारण स्पष्ट है ---- प्राकृतिक ऋषिकल्प जीवन शैली का अभाव , पेट को आराम न देना तथा कृत्रिम संश्लेषित औषधियों से शरीर को भर डालना l '