वन में खड़े एक वृक्ष के साथ लिपटी एक लता भी धीरे -धीरे वृक्ष के बराबर हो गई l वृक्ष का आश्रय लेकर उसने भी फलना -फूलना आरम्भ कर दिया l बेल को फलते -फूलते देख वृक्ष को अहंकार हो गया कि मैं न होता तो लता का अस्तित्व ही न होता l वह लता को धमकाते हुए बोला --- " ओ बेल ! चुपचाप मेरा कहना माना कर , मैं जो कह रहा हूँ , वह किया कर , नहीं तो धक्के मार कर भगा दूंगा l " पेड़ का प्रलाप जारी था कि दो पथिक वहां से निकले l एक बोला --- " अरे भाई ! जरा देखो तो ! यह वृक्ष कैसा सुन्दर है , इस पर कैसी सुन्दर लता पुष्पित हो रही है l आओ , इसके नीचे थोड़ी देर विश्राम करें l " अपना महत्त्व लता के साथ है , यह जानकार वृक्ष का अभिमान भी नष्ट हो गया l
23 January 2023
22 January 2023
WISDOM ----
काँटे ने फूल से कहा -- बंधुवर पुष्प ! लो सवेरा हुआ , माली इधर ही आ रहा है , अपनी सज्जनता , सौम्यता और उपकार की सजा भुगतने के लिए तैयार हो जाओ l यदि मेरी सीख मानते और कठोरता व कुटिलता का आश्रय ग्रहण किए रहते तो आज यह नौबत नहीं आती l फूल कुछ बोला नहीं , वह और भी मोहक हो उठा l माली आया , उसने फूल तोड़ा और डलिया में रखा l काँटा दर्प से हँसा , वृद्ध माली की उँगलियों में चुभा और अहंकार में ऐंठ गया l माली उसे गाली देता हुआ वापस लौट गया l समय बीता l एक दिन मंदिर में चढ़ाये उस फूल की सूखी काया को कोई उस वृक्ष की जड़ों के पास डाल गया l काँटे ने उस फूल को देखा तो हँसा और बोला ---- " कहो तात ! अब तो समझ गए कि परोपकारी होना अपनी दुर्गति कराना है l " फूल की आत्मा बोली ---- " बंधु ! यह तुम्हारा अपना विश्वास है l शरीर में चुभकर दूसरों की आत्मा को कष्ट पहुँचाने के पाप के अतिरिक्त तुम अपयश के भी भागी बने l अंत तो सभी का सुनिश्चित है , किन्तु अपने प्राणों को देवत्व में परिणत करने और संसार को प्रसन्नता प्रदान करने का जो श्रेय मुझे मिला , तुम उससे सदैव के लिए वंचित रह गए l मैं हर द्रष्टि से फायदे में हूँ और तुम घाटे में l "
21 January 2023
WISDOM -----
जोरों की आँधी आई l आँधी के साथ धूल उड़कर आसमान तक जा पहुंची l इस उपलब्धि पर इतराते हुए धूल बोली ---- " भला मेरे समान कोई इस दुनिया में ऊँचा है l जल , थल , नभ के साथ दसों दिशाओं में मैं ही तो व्याप्त हूँ l " बदल ने धूल की गर्वोक्ति सुनी तो फट पड़ा और बदल फटते ही हुई वर्षा के साथ धूल धरती पर जा गिरी l अब धरती ने उससे पूछा ---- " रेणुके ! तुमने अपनी यात्रा से क्या सीखा ? " धूल बोली ---- " माँ ! मैंने सीखा कि उन्नति पा कर कभी किसी को अहंकार नहीं करना चाहिए l अहंकारी का पतन निश्चित ही होता है l "
20 January 2023
WISDOM ----
अमावस्या की रात में दीपक ने देखा कि आकाश में न चाँद है और न तारे l बस , वह अकेला ही संसार को प्रकाश दे रहा है l अपने इस पराक्रम पर उसको अभिमान हो गया और वह समस्त संसार को संबोधित करते हुए बोला --- " मेरी महिमा तो देखो ! मेरी ही कृपा से तुम सब तुच्छ प्राणी अंधकार में कुछ देख पा रहे हो l मुझे प्रणाम करो , मेरी दयालुता का गुणगान करो l " दीपक के इन अहंकार युक्त वचनों को किसी ने महत्त्व न दिया , परन्तु एक जुगनू से न रहा गया और वह बोला ---- " एक रात के अस्तित्व पर इतना अहंकार l तनिक ठहरो , प्रभात होने पर तुम्हारी वास्तविकता पूछूँगा l " अधिकार पाकर किसी को मदांध नहीं हो जाना चाहिए l
19 January 2023
WISDOM ----
कलियुग की सबसे बड़ी विशेषता है --- दुर्बुद्धि ! इस दुर्बुद्धि के कारण लोग समाज में जो भी अच्छे कार्य होते हैं , उनमे बुराई खोजते हैं , देवत्व को मिटाने का प्रयास करते हैं और बुराइयों को अनदेखा करते हैं , भीष्म पितामह की तरह चुप्पी साध लेते हैं इसलिए अब प्रत्यक्ष में महाभारत नहीं होती , अब प्रकृति का क्रोध विभिन्न रूपों में देखने को मिलता है l आज मनुष्य पर लालच , अहंकार , कामना , महत्वाकांक्षा हावी है इस कारण वह दोहरी जिन्दगी जी रहा है l एक रूप में समाज के सामने बहुत शरीफ , सदाचारी है लेकिन एक दूसरा रूप भी है जिसमे वह अपने स्वार्थ के लिए अपराध , भ्रष्टाचार , अश्लीलता , प्रदूषण आदि समाज और संस्कृति को हानि पहुँचाने वाले कार्यों के प्रति मौन रहकर उन्हें बढ़ावा देता है l यही कारण है कि अब मनुष्य का मनुष्य पर से विश्वास कम हो गया है l ----- एक डाकू था वह फकीरों के वेश में डाके डालता था l अपना हिस्सा वह गरीबों में बाँट देता था l हाथ में माला लिए जपता रहता था l एक बार उसके दल ने एक काफिला लूटा l एक व्यापारी के पास बहुत पैसा था l लूट चल रही थी , उसने फकीर को देखा तो सारा धन उसके पास लाकर रख दिया l काफिला लुट जाने के बाद जब वह धन लेने पहुंचा तो देखा कि वहां तो लूट का माल बांटा जा रहा है l सरदार वही था जो दरवेश -फकीर बना हुआ था l उसी के पास व्यापारी का धन था l व्यापारी बोला --- " हमने तो आपको दरवेश समझा था l आप तो कुछ और ही निकले l हमने डाकुओं के सरदार पर नहीं , फकीर पर , खुदा के बन्दे पर विश्वास किया था l अब यह धन आप रखिए , आपसे एक गुजारिश है कि आप दरवेश के वेश में मत लूटिए l नहीं तो लोगों का विश्वास इस वेश पर से उठ जायेगा l वह डाकू तत्काल वास्तव में फकीर बन गया , उसके बाद उसने कभी डाका नहीं डाला l
18 January 2023
WISDOM -----
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं --- ' वैराग्य की पहली पाठशाला गृहस्थ जीवन है l उसी को तपोवन बना लिया जाए तो वहां रहकर भी साधना की जा सकती है l ' ------ देवदत्त ईश्वर भक्त था , बात -बात में पत्नी को धमकी देता था कि देख ! यदि अमुक काम नहीं किया , सतर्क नहीं रही तो मैं संत पुनीत के आश्रम चला जाऊँगा l उसकी पत्नी यह सोच -सोचकर दुबली होती गई कि कहीं सचमुच न चले जाएँ l उसकी पत्नी ने एक दिन संत को अपनी व्यथा बताई l संत ने कहा --- " अबकी बार धमकी दे तो मेरे पास भेज देना l मैं उसे ठीक कर दूंगा l " अगले दिन भोजन बनाने में कुछ देर हो गई l देवदत्त ने फिर धमकी दी l उसकी पत्नी ने कहा --- 'कल क्यों , आज ही चले जाइए l ' देवदत्त के अहं पर चोट थी , वह आश्रम चला गया l रात को आश्रम में सोने की व्यवस्था हो गई , अगले दिन वह संन्यास दीक्षा के लिए पुनीत महाराज के पास पहुंचा l उन्होंने कहा --- अपने कपड़े यहाँ रख दो और नहाकर आओ l जब वह नहाने गया तो संत के इशारे पर उसके कपड़ों कुछ काटकर ख़राब कर दिया , स्वल्पाहार के लिए कडुए फल रखे l ऐसी व्यवस्था से उसे बहुत क्रोध आया और वह सेवकों को अपशब्द कहने लगा l महर्षि बोले ---- " वैरागी को पहले संतोषी , धैर्यवान और सहनशील बनना होता है l " देवदत्त बोला --- 'यह तो मैं मैं घर पर भी कर सकता था l आपके पास तो विशिष्ट साधना के लिए आया हूँ l ' महर्षि पुनीत बोले --- " तात ! घर लौटकर सद्गुणों का अभ्यास करो l विभूतियाँ तो बाद की बातें हैं l " देवदत्त समझ गया कि सद्गुणों के सहारे सुख -शांति का जीवन जिया जा सकता है l
WISDOM-----
एक संत के पास एक व्यक्ति पहुंचा , बहुत दुखी था l संत ने उससे पूछा --क्या बात है , बताओ , इतना परेशान क्यों हो ? संत का स्नेह पा कर उसने अपने मन की सारी बात कह डाली कि उसकी पत्नी उससे बहुत झगड़ा करती है , कटु शब्द बोलती है , वह परेशान हो चुका है और तलाक देना चाहता है l कैसे भी पीछा छूटे , कोई उपाय बताएं ? संत ने उसकी सारी बातें बहुत ध्यान से सुनी , फिर पूछा -- वह एक महीने में कितनी बार झगड़ा करती है ? उस व्यक्ति ने कहा --- यही कोई पांच , छह बार l संत ने पूछा --- और शेष दिन ? उस व्यक्ति ने कहा --- शेष दिन तो वह मुझे गरम खाना खिलाती है , मेरी माँ का भी बहुत ध्यान रखती है , बच्चों को स्कूल भेजना , सारी जिम्मेदारी उठाती है , बच्चों को घर में पढ़ाना आदि सब काम करती है l तब संत ने कहा ---- ' पच्चीस दिन के सुखी जीवन के लिए तुम उसका 5 -6 दिन का कटु व्यवहार सहन नहीं कर सकते ? अपने मन के तराजू के एक पलड़े में उससे मिलने वाले सुख को रखो और दूसरे पलड़े में उससे जो कष्ट होता है उन कष्टों को रखो , फिर देखो कौन सा पलड़ा भारी है ? जल्दबाजी में कोई निर्णय न लो अन्यथा पछतावे के सिवा और कुछ हासिल नहीं होगा l ' संत के वचनों से उस व्यक्ति के ऊपर छाई हुई नकारात्मकता हट गई , उसकी आँखें खुल गईं l सुखी जीवन जीने का मन्त्र उसे मिल गया l