23 December 2012

जब मनुष्य के अन्तः करण का सौन्दर्य खुलता है ,तो बाहरी सौन्दर्य की कमी का कोई महत्व नहीं रह जाता ।हीरा और कुछ नहीं ,कोयले का ही परिष्कृत स्वरूप है ।

AMBITION

मनुष्य की एक मौलिक विशेषता है-महत्वाकांक्षा ।वह ऊँचा उठना चाहता है ,आगे बढना चाहता है।इस मौलिक प्रवृति को तृप्त करने के लिये कौन क्या रास्ता चुनता है ,यह उसकी अपनी सूझ -बूझ पर निर्भर करता है ।प्रगति का क्रम एवं प्रतिफल सही सुखद हो ,इसके लिये हर प्रयोजन के दूरगामी परिणामों पर विचार करना चाहिए और आतुरता से विरतरह कर यह अनुमान लगाना चाहिए कि अंतिम परिणति क्या होगी ।चासनी में पंख फंसा कर बेमौत मरने वाली मक्खी का नहीं ,पुष्प का सौन्दर्य विलोकन और रसास्वादन करने भौंरे का अनुकरण करना चाहिए ।बया घोंसला बनाती है और परिवार सहित सुखपूर्वक रहती है ।मकड़ी कीड़े फंसाने का जाल बनाती है और उसमे खुद ही उलझ कर मरती है ।








  

18 December 2012

"अगर  आप इंद्रधनुष चाहते हैं तो आपको वर्षा का सामना तो करना ही होगा ।"
जीवन की समस्याओं को सुलझाने और वांछित उपलब्धियों से जीवन को विभूषित करने के लिये अपने व्यक्तित्व को स्वच्छ .सुथरा बनाने की कला का नाम जीवन जीने की कला है ।मन;स्थिति ही परिस्थितियों की निर्मात्री है ।यदि मनुष्य चाहे तो हजार प्रतिकूलताओं से जूझकर स्वयं के माध्यम से अपने लिये वैसा ही वातावरण बना सकता है जैसा वह चाहता है ।इमर्सन ने कहा था कि "मुझे नरक में भी भेज दिया जाय तो मैं अपने लिये वहां भी स्वर्ग बना लूँगा "

17 December 2012

कार्य को जिम्मेदारी के साथ ईश्वर की पूजा समझ कर करने की कर्म साधना किसी भीयोग साधना जैसा सत्परिणाम देने वाली है ।ईश्वर की पूजा समझकर किया गया प्रत्येक कार्य हमें उत्साह और प्रसन्नता देगा ।

15 December 2012

मनुष्य की एक मुट्ठी में स्वर्ग और दूसरी में नरक है ।वह अपने लिये इन दोनों में से किसी को भी खोल सकने में पूर्णतया स्वतंत्र है ।

POSSITIVE.........

परिष्कृत द्रष्टिकोण ही स्वर्ग है ।यदि सोचने का तरीका सकारात्मक होतो हर परिस्थिति में अनुकूलता सोची जा सकती है ।गुबरैला और भौंरा एक ही बगीचे में प्रवेश करते हैं और दो तरह के निष्कर्ष निकालते हैं _भौंरा फूलों पर मंडराता ,सुगंध का लाभ लेता और गुंजन गीत गाता है ।गुबरैला कीड़ा अपने स्वाभाव के अनुरूप गोबर की खाद के ढेर को तालाश लेता है और अपने दुर्भाग्य पर रोते हुए कहता है संसार में बदबू ही बदबू भरी पड़ी है ।