' शिव को पशुपति कहा गया है | पशुत्व की परिधि में आने वाली दुर्भावनाओं और दुष्प्रवृतियों का नियंत्रण करना पशुपति का काम है | नर-पशु के रूप में रह रहा जीव जब कल्याणकर्ता शिव की शरण में जाता है तो सहज ही पशुता का निराकरण हो जाता है और क्रमश: मनुष्यत्व और देवत्व विकसित होने लगता है | शिव कल्याण के देवता हैं | '
8 February 2014
7 February 2014
WISDOM
'विजय की संभावना निश्चित होने पर तो कायर भी लड़ सकते हैं | वीर वे हैं, जो पराजय की आशंका रहने पर भी द्रढ़तापूर्वक लड़ते हैं |'
आक्रमणकारी जर्मनों के विरुद्ध चैक लोग अपने देश की रक्षा के लिये कट-कट कर लड़ रहे थे, तो भी जर्मन की सेना और साधन अधिक होने से उनमे उदासी छाने लगी |
चैक जनरल हैटमैन लड़ाई में बुरी तरह घायल हुआ | मरने से पूर्व उन्होंने अपने साथियों से कहा, --" मरने के बाद मेरी चमड़ी उखाड़ ली जाये और उसका ढोल मढ़कर सारी चैक सेना में यह मुनादी कराई जाये कि कोई हिम्मत न हारे, अंतत: जीत चैक सेना की ही होगी |"
वैसा ही किया गया | उस ढोल की आवाज सुनकर सेना में दूना उत्साह उपजा और उन्होंने इतनी बहादुरी से युद्ध किया कि जर्मनों के पैर उखड़ गये और जीत चैक सेना की ही हुई |
आक्रमणकारी जर्मनों के विरुद्ध चैक लोग अपने देश की रक्षा के लिये कट-कट कर लड़ रहे थे, तो भी जर्मन की सेना और साधन अधिक होने से उनमे उदासी छाने लगी |
चैक जनरल हैटमैन लड़ाई में बुरी तरह घायल हुआ | मरने से पूर्व उन्होंने अपने साथियों से कहा, --" मरने के बाद मेरी चमड़ी उखाड़ ली जाये और उसका ढोल मढ़कर सारी चैक सेना में यह मुनादी कराई जाये कि कोई हिम्मत न हारे, अंतत: जीत चैक सेना की ही होगी |"
वैसा ही किया गया | उस ढोल की आवाज सुनकर सेना में दूना उत्साह उपजा और उन्होंने इतनी बहादुरी से युद्ध किया कि जर्मनों के पैर उखड़ गये और जीत चैक सेना की ही हुई |
6 February 2014
ART OF LIVING
' मन: स्थिति ही परिस्थितियों की जन्मदात्री है | '
यह अध्यात्म का मूल मर्म है | जो इस सूत्र पर विश्वास रखता है, वह संसार में कहीं भी रहते हुए अपनी आत्मशक्ति के सहारे अपने लिये अनुकूल वातावरण-परिस्थितियाँ बना लेगा | संत इमर्सन कहते थे--" तुम मुझे नरक में भेज दो, मैं अपनी आत्मशक्ति के द्वारा वहां भी अपने लिये स्वर्ग बना लूँगा | "
चाहे कितनी ही भौतिक जगत की सुविधाएँ हों, चाहे वातावरण कितना ही हमारे अनुकूल साधन हमें जुटाकर दे दे, यदि हमारी मन: स्थिति कमजोर है तो वे हमारा कुछ भी लाभ न कर सकेंगे , वे हमें अपयश की ओर, वासनात्मक जीवन की ओर, बिगड़ती आदतों से परावलंबन की ओर धकेल देंगे | भोगवादी मानसिकता, अनुकूल सुविधाओं की बहुलता में क्यों इतने मनोरोग पनप रहें हैं ? क्यों मन अशांत है, डिप्रेशन की मन: स्थिति वाले रोगियों की संख्या और आत्मघात की दर क्यों बढ़ती जा रही है ? इन सबका एक ही उत्तर है--- अपनी आत्मशक्ति पर भरोसा न करना और परिस्थितियों की विवशताओं का रोना रोना |
भगवान उन्ही की मदद करते हैं जो अपनी मदद स्वयं करते हैं | हमें अपने प्रचंड मनोबल एवं अनंत शक्तिसंपन्न आत्मसत्ता पर भरोसा रख उसी का आश्रय लेना चाहिये | बाह्य अवस्थाओं, वातावरण और परिस्थितियों पर अपनी निर्भरता समाप्त करनी चाहिये |
यह अध्यात्म का मूल मर्म है | जो इस सूत्र पर विश्वास रखता है, वह संसार में कहीं भी रहते हुए अपनी आत्मशक्ति के सहारे अपने लिये अनुकूल वातावरण-परिस्थितियाँ बना लेगा | संत इमर्सन कहते थे--" तुम मुझे नरक में भेज दो, मैं अपनी आत्मशक्ति के द्वारा वहां भी अपने लिये स्वर्ग बना लूँगा | "
चाहे कितनी ही भौतिक जगत की सुविधाएँ हों, चाहे वातावरण कितना ही हमारे अनुकूल साधन हमें जुटाकर दे दे, यदि हमारी मन: स्थिति कमजोर है तो वे हमारा कुछ भी लाभ न कर सकेंगे , वे हमें अपयश की ओर, वासनात्मक जीवन की ओर, बिगड़ती आदतों से परावलंबन की ओर धकेल देंगे | भोगवादी मानसिकता, अनुकूल सुविधाओं की बहुलता में क्यों इतने मनोरोग पनप रहें हैं ? क्यों मन अशांत है, डिप्रेशन की मन: स्थिति वाले रोगियों की संख्या और आत्मघात की दर क्यों बढ़ती जा रही है ? इन सबका एक ही उत्तर है--- अपनी आत्मशक्ति पर भरोसा न करना और परिस्थितियों की विवशताओं का रोना रोना |
भगवान उन्ही की मदद करते हैं जो अपनी मदद स्वयं करते हैं | हमें अपने प्रचंड मनोबल एवं अनंत शक्तिसंपन्न आत्मसत्ता पर भरोसा रख उसी का आश्रय लेना चाहिये | बाह्य अवस्थाओं, वातावरण और परिस्थितियों पर अपनी निर्भरता समाप्त करनी चाहिये |
5 February 2014
WISDOM
' हमारे विचारों का संसार विधेयात्मक हो तो सम्पूर्ण व्यक्तित्व बदल जाता है |'
दुर्बलताएं स्वभाविक हैं | मनुष्य का स्वभाव है कि वह कभी भी भटक सकता है | पर आशावाद निरंतर जिंदा रखें | मानव का वास्तविक स्वरुप दिव्य है एवं क्षमताएं अनंत हैं |
ईश्वर विश्वास - ईश्वर सदा हमारे साथ हैं , इस भावना से आत्मविश्वास बढ़ता है कि हमारे चारों ओर एक सुरक्षा कवच है | अब कोई हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता |
ध्यान द्वारा व्यक्ति अपनी आदतों, व्यवहार को बदल सकता है , विचारों में परिवर्तन कर सकता है, संस्कारों को बदल सकता है एवं औरों के विचारों को प्रभावित कर उन्हें भी बदल सकता है
दुर्बलताएं स्वभाविक हैं | मनुष्य का स्वभाव है कि वह कभी भी भटक सकता है | पर आशावाद निरंतर जिंदा रखें | मानव का वास्तविक स्वरुप दिव्य है एवं क्षमताएं अनंत हैं |
ईश्वर विश्वास - ईश्वर सदा हमारे साथ हैं , इस भावना से आत्मविश्वास बढ़ता है कि हमारे चारों ओर एक सुरक्षा कवच है | अब कोई हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता |
ध्यान द्वारा व्यक्ति अपनी आदतों, व्यवहार को बदल सकता है , विचारों में परिवर्तन कर सकता है, संस्कारों को बदल सकता है एवं औरों के विचारों को प्रभावित कर उन्हें भी बदल सकता है
PEARL
' निज अस्तित्व की चिंता छोड़कर समाज के कल्याण के लिये जो अग्रसर होते हैं, वे बन जाते हैं जनमानस के मोती | '
संत फ्रांसिस ने एक कोढ़ी को चिकित्सा के लिये धन दिया, वस्त्र दिए और स्वयं उसकी सेवा की | एक गिरजाघर की मरम्मत के लिये दुकान की कपड़े की कई गांठे और अपना घोड़ा बेचकर सारा धन दे दिया | उनके पिता को इन बातों का पता चला तो उन्होंने उन्हें मारा-पीटा और सम्पति के उतराधिकार से वंचित करने की धमकी भी दी |
पिता की यह धमकी सुनकर उन्होंने कहा--" आपने मुझे एक बहुत बड़े मोह बंधन से मुक्त कर दिया | में स्वयं उस सम्पति को दूर से प्रणाम करता हूँ, जो परमार्थ और लोकमंगल के काम नहीं आ सकती | " यह कहते हुए उन्होंनेअपने कपड़े तक उतार दिए और पिता की सारी संपदा का अधिकार भी त्याग दिया |
लोकसेवा के मार्ग में बाधा बनने वाली संपदा का परित्याग कर दिया |
संत फ्रांसिस ने एक कोढ़ी को चिकित्सा के लिये धन दिया, वस्त्र दिए और स्वयं उसकी सेवा की | एक गिरजाघर की मरम्मत के लिये दुकान की कपड़े की कई गांठे और अपना घोड़ा बेचकर सारा धन दे दिया | उनके पिता को इन बातों का पता चला तो उन्होंने उन्हें मारा-पीटा और सम्पति के उतराधिकार से वंचित करने की धमकी भी दी |
पिता की यह धमकी सुनकर उन्होंने कहा--" आपने मुझे एक बहुत बड़े मोह बंधन से मुक्त कर दिया | में स्वयं उस सम्पति को दूर से प्रणाम करता हूँ, जो परमार्थ और लोकमंगल के काम नहीं आ सकती | " यह कहते हुए उन्होंनेअपने कपड़े तक उतार दिए और पिता की सारी संपदा का अधिकार भी त्याग दिया |
लोकसेवा के मार्ग में बाधा बनने वाली संपदा का परित्याग कर दिया |
3 February 2014
WISDOM
बच्चा दिए को बड़ी मोहक द्रष्टि से देख रहा था | घर ठहरे मेहमान ने पूछा --" बेटा ! यह प्रकाश कहाँ से आया ? " बच्चे ने उत्तर दिया--" भगवान के घर से | " अतिथि ने पूछा--" अच्छा, तुम भगवान को जानते हो तो बताओ वह कहाँ रहता है ?"
बच्चे ने दीपक को बुझाते हुए कहा--" यह प्रकाश जहाँ चला गया, वहां |"
अद्रश्य प्रकाश के रूप में वही तो कण-कण में विद्दमान है | बालसुलभ निश्छलता-पवित्रता को पाये बिना हम कभी भगवान की उपस्थिति की, उसकी सत्ता के हमारे रोम-रोम में बसे होने की अनुभूति नहीं कर सकते |
बच्चे ने दीपक को बुझाते हुए कहा--" यह प्रकाश जहाँ चला गया, वहां |"
अद्रश्य प्रकाश के रूप में वही तो कण-कण में विद्दमान है | बालसुलभ निश्छलता-पवित्रता को पाये बिना हम कभी भगवान की उपस्थिति की, उसकी सत्ता के हमारे रोम-रोम में बसे होने की अनुभूति नहीं कर सकते |
2 February 2014
PEARL
' संवेदना होश का, बोध का दूसरा नाम है | संवेदना से प्रेरित होकर दूसरों की भलाई के लिये किया गया विचार और कार्य अंतस्थ शक्ति को जाग्रत कर देता है और ह्रदय में सिंह का बल संचारित कर देता है | '
1725 ई. में उत्तरी वर्जीनिया के जंगल में एक पार्टी भोजन कर रही थी--- एक महिला के आर्तनाद ने उनको चौंका दिया | वे लोग उस ओर चल पड़े | उस महिला ने इन लोगों में से एक युवक से कहा--" देखिये ये लोग मुझे छोड़ते नहीं हैं | मेरा लड़का नदी में गिर गया है | मुझे इन लोगों से छुड़ा लीजिये, जिससे मैं अपना लड़का नदी से निकाल सकूँ |" लोगों ने इसलिये महिला को पकड़ रखा था कि यदि वे उसे छोड़ देंगे तो वह नदी में कूद पड़ेगी |
युवक ने तत्काल अपना कोट उतार दिया और स्वयं एक पहाड़ी चट्टान पर जाकर नदी में कूद पड़ा | जहाँ बच्चे का वस्त्र दिखाई दे रहा था, जल प्रवाह को पार करता हुआ, वह वहां जा पहुंचा, उसने बच्चे को हाथ से पकड़ तो लिया पर वह हाथ से फिर निकल गया | जल के वेग ने उन दोनों को डुबो दिया |
बड़ी देर में परिश्रम और साहस के साथ वह युवक अंत में उस लड़के को उठाए ऊपर चट्टान पर आ गया | बच्चा और युवक दोनों बेसुध और अशक्त थे | थोड़ी देर बाद दोनों को होश आ गया | वह महिला अपने बच्चे को सीने से लगाये उस युवक को आशीर्वाद देती हुई चली गई |
वह संवेदनशील और साहसी युवक थे------ जार्ज वाशिंगटन |
1725 ई. में उत्तरी वर्जीनिया के जंगल में एक पार्टी भोजन कर रही थी--- एक महिला के आर्तनाद ने उनको चौंका दिया | वे लोग उस ओर चल पड़े | उस महिला ने इन लोगों में से एक युवक से कहा--" देखिये ये लोग मुझे छोड़ते नहीं हैं | मेरा लड़का नदी में गिर गया है | मुझे इन लोगों से छुड़ा लीजिये, जिससे मैं अपना लड़का नदी से निकाल सकूँ |" लोगों ने इसलिये महिला को पकड़ रखा था कि यदि वे उसे छोड़ देंगे तो वह नदी में कूद पड़ेगी |
युवक ने तत्काल अपना कोट उतार दिया और स्वयं एक पहाड़ी चट्टान पर जाकर नदी में कूद पड़ा | जहाँ बच्चे का वस्त्र दिखाई दे रहा था, जल प्रवाह को पार करता हुआ, वह वहां जा पहुंचा, उसने बच्चे को हाथ से पकड़ तो लिया पर वह हाथ से फिर निकल गया | जल के वेग ने उन दोनों को डुबो दिया |
बड़ी देर में परिश्रम और साहस के साथ वह युवक अंत में उस लड़के को उठाए ऊपर चट्टान पर आ गया | बच्चा और युवक दोनों बेसुध और अशक्त थे | थोड़ी देर बाद दोनों को होश आ गया | वह महिला अपने बच्चे को सीने से लगाये उस युवक को आशीर्वाद देती हुई चली गई |
वह संवेदनशील और साहसी युवक थे------ जार्ज वाशिंगटन |
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