28 October 2026

WISDOM -----

   पुराण  में  अनेक  कथाएं  हैं  l  इन  कथाओं  में  प्रत्येक  युग  की  परिस्थितियों  के  अनुरूप  मार्गदर्शन  है  l  इस  कलियुग  में   वर्तमान  में  संसार  में  युवा  वर्ग  में  बहुत  असंतोष  है  l  इस  असंतोष  का  कारण  और  उसका  समाधान  समझने  के  लिए  हमें  भक्त  प्रह्लाद  की  कथा  को  समझना  होगा  l  ----प्रह्लाद  के  पिता  थे  हिरण्यकश्यप  l  वे  स्वयं  को  भगवान  समझते  थे   और  उनका  सख्त  आदेश  था  कि  सम्पूर्ण  प्रजा  उन्हें  ईश्वर  मानकर   उनकी  पूजा   करे  l    अपने  इस   आदेश  को  वे  अपने  पुत्र  प्रह्लाद  पर  भी  सख्ती  से  लागू  करना  चाहते  थे  l  लेकिन  प्रह्लाद  का  कहना  था   कि  आप  मेरे  पिता  हैं  ,मैं  आपका  सम्मान  करता  हूँ  लेकिन  मैं  आपको  ईश्वर   नहीं  मान  सकता  l  हिरण्यकश्यप   का  अहंकार   बोल  उठा  --मेरे  आदेश  को  कैसे  नहीं  मानोगे  ?    उसके  पास  जितने  भी  साधन  थे  , जितना  भी  बल  था  , उससे  उसने  प्रह्लाद  को  सताना  शुरू कर  दिया  , प्रह्लाद  को मारने  का  हर  संभव  प्रयास  किया  l  लेकिन  अंत में  जीत  किसकी  हुई   ?  प्रह्लाद  की  l  हिरण्यकश्यप  को  नृसिंह  भगवान  ने  उसका  पेट  फाड़कर  मार  डाला  l    इस  कथा  में  यही  संकेत  छिपा  हुआ  है    कि आज  जो  पिता  तुल्य    आयु  के  लोग  हैं  , उनका अहंकार  उनके  सिर  पर  चढ़  गया  है  l  इस  आयु वर्ग  के  लोग  परिवार  में  हैं , संस्था  में  , विभिन्न  सरकारों  में  ,  जीवन  के    प्रत्येक  क्षेत्र  में  हैं  l   समस्या  इसीलिए  है   कि  नई  पीढ़ी  की  भावनाओं  को  समझने  वाला ,  उनकी  समस्या  को  सुनने  वाला  कोई  नहीं  है  l  कहीं  कोई समाज  में  अपने  स्टेटस  के  लिए  , अपनी  अधूरी  इच्छा  को  पूरा  करने के  लिए  युवा  वर्ग पर  अपना  नियंत्रण  करना  चाहते  हैं  , कहीं  कोई  अपने  स्वार्थ  के  लिए  इनकी  ऊर्जा   का  उपयोग  करते  हैं  l  उनके  जीवन  को  सही  दिशा  देने  वाला  कोई  नहीं  है  l  प्रौढ़  और  वृद्ध  होते  लोगों  को  अपनी  सोच  को  बदलना  होगा  l  सही अर्थों  में  संवेदनशील   होंगे  , युवाओं   के  मन  को  समझेंगे   तभी  संसार  में  शान्ति  होगी  अन्यथा   धरती पर  संतुलन  लाने  के  लिए  कब   नृसिंह  भगवान  आ  जाएँ  हिरण्यकश्यप  का  अंत  करने  के  लिए   कोई   नहीं  जानता  l