पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं ---- ' समय पुरस्कृत करता है एवं समय ही तिरस्कृत करता है l समय का पुरस्कार उन्हें मिलता है , जिनकी सोच सकारात्मक है , जिनके श्रम की दिशा निर्धारित है l इसके विपरीत जिनकी सोच पर निराशा का अँधेरा छाया हुआ है , जिनका श्रम दिशाविहीन है , वे समय के हाथों तिरस्कृत होते रहते हैं l " जिनकी सोच नकारात्मक है , दुर्भाग्यवश जिन्हे जीवन में सही मार्गदर्शन नहीं मिल सका , ऐसे लोगों की स्थिति वक्त गुजरने के साथ दयनीय हो जाती है क्योंकि स्वार्थी और चालाक लोग ऐसे ही लोगों की तलाश में रहते हैं जिनकी मदद से वे अपना स्वार्थ सिद्ध कर सकें l वे लोग उन्हें तरह -तरह के लालच देकर अपना काम निकालते हैं और स्वार्थ पूरा हो जाने के बाद दूध की मक्खी की तरह निकाल फेंकते हैं l हमारा देश युगों तक गुलाम रहा इसका कारण यही है कि ऐसी नकारात्मक सोच के लोगों ने अपने स्वार्थ और लालचवश विदेशियों की मदद की , इसी का परिणाम हुआ कि संख्या में बहुत थोड़े विदेशी एक विशाल देश को अपना गुलाम बना पाए l गुलामी भी दो प्रकार की होती है ---प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष l प्रत्यक्ष गुलामी में हमें पता रहता है कि हम पर किसका शासन है , उससे जीतना संभव है और हम आजाद भी हुए लेकिन अप्रत्यक्ष गुलामी बेहद कष्टकारक होती है , इसमें यह स्पष्ट ही नहीं होता कि परदे के पीछे कौन है l आज के वैश्वीकरण और विज्ञान से विकसित माइंड ने परिस्थिति को बहुत जटिल बना दिया है l
22 March 2022
WISDOM -------
संसार में जो कुछ है , वह सब ईश्वर की देन है l यदि ईश्वर पर दृढ़ विश्वास हो तो सत्य समझ में आ जाता है ---- श्री रामकृष्ण परमहंस के शिष्य हरिप्रसन्न चटर्जी संन्यास के बाद स्वामी विज्ञानानंद नाम से प्रसिद्ध हुए l वे इंजीनियर थे , विवाह नहीं किया था l सदैव प्रसन्न रहते थे l कहते , मैं रामजी का बंदर हूँ l ठाकुर आये तो मैं भी आ गया l रामकृष्ण परमहंस को वे राम के रूप में पूजते थे l ठाकुर के जाने के बाद वे ' वाल्मीकि रामायण ' का अंग्रेजी अनुवाद करने में लग गए l सतत मन लगाकर घंटों बैठे रहते l लोग पूछते --- आप इतनी देर कैसे बैठ लेते हैं l ' वे कहते --- " यह अनुवाद नहीं है l मैं कथा में इतना रम जाता हूँ कि मेरे सामने राम , सीता , हनुमान सब आ जाते हैं l मैं अनुरक्त हो जाता हूँ l " उसी भाव प्रवाह में वे लिखते थे , क्योंकि उन्हें साक्षात् प्रभु का सान्निध्य मिलता था l
21 March 2022
WISDOM ------
आज का समाज चाहे वह किसी भी धर्म , जाति का हो , यहाँ तक कि सम्पूर्ण धरती पर ही पुरुष प्रधानता है l इसका एक नकारात्मक पक्ष यह है कि प्राचीन काल से आज तक जितने भी युद्ध हुए , दंगे - फसाद , आगजनी , गोलाबारी , हत्या , अपराध , नारी उत्पीड़न , छोटे - छोटे बच्चों को सताया जाना , अनेक ऐसे अपराध जिनका लिखना और बोलना भी अक्षम्य है ---- इन सब में भी ' पुरुष प्रधानता ' है l इस वर्ग ने अपनी प्रधानता से संसार को सुख - शांति नहीं दी , सुख - चैन छीना है l हम सब एक माला के मोती है l एक भी अनैतिक , अमर्यादित कार्य समूची मानवता और पर्यावरण के लिए घातक है l ऐसे में माला का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाता है l कहते हैं हर अति का अंत होता है l जब अत्याचार और अन्याय से प्रकृति भी कराह उठे , निर्दोष बच्चों के आंसुओं से ब्रह्माण्ड में भी कम्पन्न हो जाये , मानव जाति दया , करुणा , संवेदना , आत्मीयता जैसे गुणों को भुला दे , तब भगवान को आना ही पड़ता है , परिवर्तन के लिए l पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते है --- ' इक्कीसवीं सदी नारी उत्कर्ष की सदी है l विधाता ने उसे समूची मानवता को विकसित - परिष्कृत करने और मुक्तिदूत बनने का गरिमापूर्ण दायित्व सौंपा है l यह अपने युग का सुनिश्चित निर्धारण है l "
20 March 2022
WISDOM ------
आज संसार में युद्ध , महामारी , प्राकृतिक आपदाएँ हैं , इन समस्याओं को पहले ही भांपते हुए , मानव की व्यथा को जानते हुए भगवान बुद्ध ने मानव जाति को चेताया था कि यदि बुद्धि को शुद्ध न किया गया तो परिणाम भयावह होंगे l उन्होंने कहा था ---- ' बुद्धि के दो ही रूप संभव हैं --- 1. कुटिल और 2. करुण l बुद्धि यदि कुसंस्कारों में लिपटी है , स्वार्थ के मोहपाश एवं अहं के उन्माद से पीड़ित है तो उससे केवल कुटिलता ही निकलेगी , परन्तु इसे यदि शुद्ध किया जा सका तो इसी कीचड़ में करुणा के फूल खिल सकते हैं l बुद्धि अपनी अशुद्ध दशा में इनसान को शैतान बनाती है तो इसकी परम पवित्र शुद्ध दशा में इनसान बुद्ध बनता है , उसमें भगवत्ता अवतरित होती है l वह संवेदनशील होता है l संवेदना की आज संसार को सबसे ज्यादा जरुरत है l पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं ---- वर्तमान समाज में शैतानियत को अत्याधिक प्रतिष्ठा दी गई है l इसे स्टेटस सिंबल के रूप में परोसा जा रहा है l मन के अंदर के शैतान को उभारने एवं बढ़ाने के लिए समाज में तमाम चीजें विद्यमान हैं l विष को अमृत का सम्मान मिल गया है l शैतान साधुवेश में स्वच्छंद रूप से विचरण कर रहा है l विचारों एवं भावनाओं को कलुषित कर के इसे अपराधी बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है l सिनेमा के हिंसक दृश्य अंदर के शैतान को पोषण प्रदान करते हैं और ये दृश्य कई बड़े अपराधों का कारण बनते हैं l "
19 March 2022
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पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं ----- " मनुष्य मूलत: संवेदनशील प्राणी है l उसमे भाव - संवेदना लबालब भरी हुई है l यह संवेदना किसी कारणवश जब गलत दिशा में मुड़ जाती है तो मनुष्य को चोर , डाकू , लुटेरा , हत्यारा , आतंकवादी बना देती है l हीन परिस्थिति और संगति में पड़कर आदमी अपने भीतर के ईश्वरत्व के ऊपर पर्दा डाल देता है , जिसके कारण जिस मानव को ममता , करुणा , दयालुता , सेवा , सहायता का पुंज होना चाहिए , वही ईर्ष्या , द्वेष , दुर्भाव , क्रोध , असहिष्णुता जैसे आक्रामक और पशु भावों को अपनाकर पशुतुल्य प्रतीत होने लगता है l इसका मुख्य कारण परिस्थिति है l ये नकारात्मक तत्व जो मनुष्य के भीतर दिखलाई पड़ते हैं , वे वस्तुत: दमन , शोषण , उत्पीड़न और अत्याचार की प्रतिक्रियाएं हैं l " इसका एक दूसरा पक्ष भी है -- जब यह संवेदना उच्च आदर्शवादिता को अपनाती है तो संत , सत्पुरुषों और समाजसेवियों को जन्म देती है l सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध का जब दिल दहला देने वाला दृश्य देखा तो उसके भीतर की संवेदना जाग गई , उसका हृदय परिवर्तन हो गया और अब इतिहास उसे ' अशोक महान' के नाम से याद करता है l
WISDOM ------
विश्व प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक डॉ. भाभा एक धर्म प्राण व्यक्ति थे l अपने वैज्ञानिक अध्ययन के बाद उन्हें जो भी समय मिलता था उसमें वे शास्त्रों व धर्म पुस्तकों का अध्ययन करते थे l उनके पुस्तकालय में जहाँ एक ओर विज्ञानं की पुस्तकें थीं वहीँ दूसरी ओर की अलमारी धार्मिक पुस्तकों से भरी रहती थी l डॉ. भाभा ने कहा था ----- "विज्ञानं संसार के विनाश के लिए नहीं बल्कि दुःखी एवं संतप्त मानवता के कल्याण और उसकी सेवा करने के लिए है l परमाणु शक्ति का सही उपयोग विनाशकारी बम बनाने में नहीं बल्कि संसार की सुख - संमृद्धि और मानव कल्याण के लिए होना चाहिए l
18 March 2022
WISDOM -----
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने चेतना जगत में असंख्य प्रयोग किए और अपने निष्कर्षों को प्रकाशित - प्रतिपादित किया l वे अंतर्जगत के वैज्ञानिक हैं l अपने शिष्यों से बात करते हुए उन्होंने एक सत्य प्रतिपादित किया था ---- उनका कहना था --- ' वैज्ञानिक भी सही हैं , ज्योतिषी भी ठीक कह रहे हैं l दो देश झगड़ा करने के लिए आमने - सामने आ जाते हैं l ऐसा लगता है कि अब सब कुछ समाप्त हो जायेगा , पर अचानक ठीक समय में परिस्थितियाँ नया मोड़ ले लेती हैं और सब कुछ बदल जाता है l तमाम खतरों के बावजूद ऐसा कुछ होने वाला नहीं है l हिमालय पर निवास करने वाली महान आत्माओं का निश्चय है कि दुनिया अभी नष्ट नहीं होगी l आज के संभावित खतरे कितने ही सच क्यों न हों , पर ये मिटेंगे l अँधेरा उजाले में बदलेगा l " आचार्य श्री कहते हैं ---- " समस्त सृष्टि एक विधि - व्यवस्था के तहत चलती है , जिसे कर्मफल विधान कहते हैं l मनुष्य ने कर्म तो ऐसे कर रखे हैं कि दुनिया में अगणित बार प्रलय हो जाये l वैज्ञानिक और ज्योतिषी भी ऐसे ही संकेत कर रहे हैं l पर नहीं , भगवान की कृपा और हिमालयवासी महान आत्माओं के तप से ही परिस्थितियों में ऐसे आश्चर्यजनक और अद्भुत मोड़ आते हैं l दुनिया में सुख - शांति स्थायी रहे , आने वाला उज्जवल भविष्य टिकाऊ रहे , इसके लिए इनसान को , समाज को , देश को और समूची दुनिया को अपनी जीवन शैली बदलनी होगी l