4 April 2022

WISDOM ---------

               पुराण  में  लिखा  है ---- ' बिना  भोग  किए   कर्म   क्षीण  नहीं  होते  ,  चाहे  सौ   करोड़  कल्प  वर्ष   ही  क्यों  न  व्यतीत  हो  जाएँ    l   शुभ - अशुभ  किए   गए     कर्मों  का  फल  अवश्य  भोगना  पड़ता  है  l                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                        

WISDOM ------

   रामकथा  का  मूल  आधार  वाल्मीकि  रामायण  है  l   हमारे  धर्म  ग्रन्थ  केवल  पूजा - पाठ  की  दृष्टि  से  पढ़ने  के  लिए  नहीं  है   l   इनमें  संसार  की  प्रत्येक  समस्या  का   उपचार  है , समाधान  है  l  चाहे  युद्ध  हो , आतंकवाद  हो ,   ऊंच - नीच , अमीर - गरीब , जाति -भेद , पर्यावरण , अत्याचार , उत्पीड़न ----- आदि  प्रत्येक  समस्या  का  समाधान  इसमें  मिलता  है   l   जरुरत   है श्रद्धा , विश्वास  और  सकारात्मक  सोच  की   l ---- यह   बात  है  उस  समय  की  जब  रूस  के  एकछत्र  नायक   रहे  श्री  ब्रेझनेव   भारत  आए   थे   l   अनेक  विशिष्ट  लोगों   से उनकी  मुलाकात  हुई  l   रामकथा   के प्रसिद्ध   विद्वान्    और  वाचक  पंडित  कपीन्द्र  जी  भी  उनसे  मिले  l   उन्होंने  ब्रेझनेव  को  रामचरितमानस  भेंट  की   और  कहा --- इस  ग्रन्थ  में   जहाँ  राम  हैं    वहां ' साम्यवाद ' रख  देना   l   सीता  के  स्थान  पर   ' शक्ति  '  और  असुर  के  स्थान  पर  ' पूंजीपति  '    फिर  आपको   इस  ग्रन्थ  की    महत्ता  का  पता   चल  जायेगा  l 

3 April 2022

WISDOM -----

  ऋषि  का   वचन है ---- " दुष्ट  की  विद्या  विवाद  के  लिए  , धन  मद  के  लिए   और  शक्ति   दूसरों  को  कष्ट  देने  के  लिए  होते  हैं   l   सज्जन  पुरुष  के  लिए   ये  तीनों  विपरीत  होते  हैं   l   विद्या  ज्ञान  के  लिए ,  धन  दान  के  लिए  और  शक्ति  दूसरों  की  रक्षा  के  लिए  होते  हैं   l  "  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं --- मनुष्य  इस  सृष्टि  का  सर्वाधिक  बुद्धिमान  प्राणी  माना  जाता  है  l   वह  अपने  भाग्य  एवं  भविष्य  का  निर्माता  स्वयं  है   l   इतने  पर  भी  देखा  यही  जाता  है  कि  अक्लमंदी  के  प्रदर्शन  में  वह  ऐसे  प्रकृति  विरुद्ध  कार्य  कर  बैठता  है  ,  जिसे  उसकी  परले   सिरे  की  मूर्खता  ही  कहा  जा  सकता  है  l   सुविख्यात  मनीषी   कार्ल   मेनिंजर   ने   अपनी   कृति  ' मैन   अंगेस्ट   हिमसेल्फ  '  में    कहा  है  ----- " आज  सभ्यता  उन  लोगों  द्वारा   विकसित  हो  रही  है  ,  जो  प्राकृतिक   सम्पदाओं  को  नष्ट  करते  हैं  ,  प्रकृति  का  विनाश  करते  हैं   और  अपने  ही  ठौर - ठिकानों   को  प्रदूषित  कर   के  स्वयं  मृत्यु  का  वरण   करने  पर  उतारू  हैं   l  "  उन्होंने  आगे  लिखा  है ---- "अपने  अहंकार  की  पूर्ति  के  लिए   जिस  तरह  एक  देश  दूसरे  देश  को  नीचा  दिखाने   के  लिए   विनाशक  अस्त्र -शस्त्रों  , परमाणु  हथियारों   का  उपयोग  करता  है   और  देखते  ही  देखते   बड़े - बड़े  शहरों   को  ,  बड़ी - बड़ी  सभ्यताओं  को  जमींदोज  कर  देता  है  l   उसके  प्रभाव  से  वह  सारा  क्षेत्र  जीवन  विहीन  हो  जाता  है   और  वातावरण   में  विकिरण  की  विषाक्तता  और  विषाणुओं  की  फौज  ही  शेष  रह  जाती  है  l   यह  उन  संस्थाओं  या  सरकारों  का  कार्य  होता  है  ,  जिन्हे  जनता  नियमित  रूप  से   तरह - तरह  के  उपायों  से  कर  चुकाती   है  l  "

2 April 2022

WISDOM -----

   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---- "  जो अपनी  हर  कोशिश से ,  अपने  हर  प्रयास  से  कुछ  न  कुछ  सीखता  है  ,  वही  सकारात्मक  होता  है   और  अपनी  मंजिल  की  ओर   तेजी  से  बढ़ता  है   l  "     दंतकथाओं  के  अनुसार ------  फीनिक्स   पक्षी   अपने  जीवन  चक्र  के  अंत  में   खुद  के  इर्द -गिर्द   लकड़ियों  और  टहनियों  का  घोंसला  बनाकर  उसमें  जल  जाता  है   l  फिर  उसी  राख   से   एक  नए   फीनिक्स   का  जन्म  होता  है  l   कभी - कभी   ईश्वर  की  कृपा  से   किसी    मनुष्य   के  जीवन  में  भी  यह  सत्य  घटित  होता  है   l   अमेरिका  के  महान  वैज्ञानिक  थामस  अल्वा  एडिसन   के  जीवन  का   प्रसंग है   l    वर्ष  1914   के  आखिरी  महीने  के  दिन  थे  ,  एक  रात  उनकी  विशाल  फैक्टरी   में  आग  लग  गई   l   आग  की  उन  तेज  लपटों  में  एडिसन   अपनी  जिंदगी  की  पूरी  कमाई   और  अपने  वर्षों  के  काम  को   राख   में  तब्दील  होते  हुए  देख  रहे  थे  l  अपने  बेटे  पर  नजर  पड़ते  ही   एडिसन  ने   चिल्लाकर  उससे  कहा  ---- " चार्ल्स  अपनी  माँ  को   बुलाकर  लाओ  l   वो  अपनी  जिंदगी  में   इस  तरह  का  दृश्य   दोबारा  कभी  नहीं  देख  पाएंगी  l  "  सुबह  होते - होते  एडिसन  के  सारे  सपने   और  उनसे  जुडी  आशाएं  राख  हो  चुके  थे  ,  लेकिन  एडिसन   राख  के  उस  ढेर  में  से   फीनिक्स  पक्षी  की  भांति   एक  नए  रूप  में  बाहर  आए  l  विनाश  को  देखने  के  लिए  वहां  एकत्रित   भीड़  में  एडिसन   ने   पूरे   जोश  और  होश    के  साथ  यह  घोषणा  की   कि ----- " विध्वंस  के  बाद  हानि  नहीं ,  लाभ  होता  है   l   हमारी  सारी   गलतियां   इस  आग  में  जलकर  राख  हो  गईं   l   ईश्वर  को  धन्यवाद   कि   इसके  कारण  हम  दोबारा  नई   शुरुआत  कर  सकते  हैं   l  "

1 April 2022

WISDOM ----

   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ----- " क्षण - क्षण  से  जीवन  बनता  है  l   जीवन  का  हर  क्षण  महत्वपूर्ण  है  l   भूत , भविष्य  एवं  वर्तमान  में   केवल  वर्तमान  ही  हमारे  पास  रहता  है  ,  जो  ये  जानते  हैं  ,  वे  वर्तमान  क्षण  का  सार्थक  उपयोग  कर  लेते  हैं  ,      किसी     खास  अवसर   की  प्रतीक्षा  करने  वाले    समूचे  जीवन  के  समय   एवं  अवसर  को  ही  गँवा  देते  है  l   इसी  तरह  वर्तमान  को  छोड़कर   अतीत  में  उलझे  रहना  एक  विडंबना  के  समान   है   l   जो  जीवन  का  सत्य  पाना  चाहता  है  ,  उन्हें  वर्तमान  क्षण  में  जीने  की  कला  आनी   चाहिए  l  "  एक  कथा  है ------- '   एक  फकीर   ने   बादशाह  के  सामने  समय  की  शाश्वता   की  सच्चाई   प्रकट  करते  हुए  कहा ---- "  वर्तमान  को  संभाल   लो  ,  जीवन  संभल  जायेगा  , सार्थक  हो  जायेगा   l   खुद  को  बादशाह  कहते  हो   और  जीते  हो  दंभ  एवं  अहंकार  में  !  सच्चा  बादशाह   तो  वही  होता  है  ,  जो  जीवन  के  सब  रहस्यों  को  समझकर   इसके  आनंद   को  अनुभव  करे  l  "     बादशाह  को  फकीर   का  कहा  सच  अप्रिय  लगा  ,   सो   उसने   उसे कैद   कर लिया   l   उस  फकीर  के  एक  मित्र  ने  उससे  कहा ----- " आखिर  यह  बैठे - बैठाय  मुसीबत  क्यों  मोल  ले  ली   ?   न कहते  ये  सब  , तो  तुम्हारा  क्या  बिगड़  जाता   और  कह  भी  दिया   तो  वह  कौन  सा  बदल  गया   ? "  फकीर  बोला ------ " मैं  करूँ   भी तो  क्या  करूँ   ?  जब  से  खुदा  का  दीदार  हुआ  है  ,  तब  से  झूठ  बेमानी  हो  गया  है   l   कोशिश  करने  पर  भी  रहा  नहीं  जाता  और  झूठ  तो  बोला ही  नहीं  जाता  l  परमात्मा  की  सत्ता  ही  कुछ  ऐसी  है  कि   उसे  अनुभव  करने  के  बाद  असत्य  का  ख्याल   ही  नहीं  आता    l    समय के   एक -एक  क्षण  को   परमात्मा के  चरणों  में  समर्पित  करने  की  उमंग  मन  में  उठती  है   l   समय  के  इस  सार्थक  उपयोग  के  अलावा  कुछ   समझ  में  नहीं  आता  l   फिर  इस  कैद  का  क्या  ?  यह  कैद  तो   बस   घड़ी   भर  की  है  l  l "  किसी  गुप्तचर  ने  यह  बात   बादशाह  को  बता  दी  l   बादशाह  ने   कहा ---- " उस  पागल , फक्क्ड़  फकीर  से  कहना   कि   यह  कैद  घड़ी   भर  की  नहीं  ,  जीवन  भर  की  है l   उसे  जीवन  भर  इसी  कालकोठरी  में  सड़ते  हुए  मरना  है   l   उसे  यह  याद  रखना  होगा  कि   मैं  भविष्य   को अपनी  मुट्ठी  में  भर  सकता  हूँ  l  "  फकीर  ने   जब बादशाह   के इस  कथन  को  सुना   तो   हँसने   लगा   और   कहा ---- " ओ   भाई  !  उस  नादान  बादशाह  से  कहना   कि   उस  पागल  फकीर   ने  कहा  है  कि   क्या  उसकी  सामर्थ्य  समय  के  पहिए   को  थामने   की  ताकत  रखती  है  ?  क्या  समय  उसकी  मुट्ठी  में  है  ?  क्या  उसे  पता  है  कि   पल  भर  के  बाद  क्या  घटित   होने  वाला  है  ? "   बादशाह  तक  फकीर   की ये  बातें  पहुँच  पातीं  ,  इसके  पूर्व  ही  अचानक  बादशाह  को   दिल  का  दौरा  पड़ा  और  उसकी  मृत्यु  हो  गई   l   नए  बादशाह  ने  फकीर  को  आजाद  कर  दिया  l   उसके  मित्र  को  भी  समझ   में आ  गया  कि   समय  का  सदुपयोग  करें ,  अहंकार  न  करें   क्योंकि  वक्त  का  मिजाज  कब  बदल  जाए   कोई  नहीं  जानता  l 

31 March 2022

WISDOM -----

   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ----' मनुष्य  के  असंतोष  का  कारण  ईर्ष्या  है   l   यह  मानवीय  स्वभाव   की  विकृति  है  ,  ईर्ष्यालु  व्यक्ति  को  दूसरे  की  तरक्की  रास  नहीं  आती  l  "  महाभारत  '  ईर्ष्या  का  ही  दुष्परिणाम  था   l   दुर्योधन  के  मन  में  बचपन  से  ही  पांडवों  के  प्रति  ईर्ष्या  का  बीज  था  ,  वह  पांडवों  की  योग्यता ,  उनकी  ख़ुशी  से  जलता  था   l   उसे  तो  हस्तिनापुर  का  बना - बनाया  राज्य  मिला  ,  पांडवों  को  खांडव वन  का  क्षेत्र  मिला  ,  जिसे  उन्होंने  अपनी  मेहनत  से   इंद्रप्रस्थ  बनाया  l   वहां  का   वैभव    देखकर  दुर्योधन  जल भुन    गया  और  शकुनि   के साथ  मिलकर  छल - कपट , षड्यंत्र  से  पांडवों  को  वन  में  भेज  दिया     उनके  हिस्से  पर  कब्ज़ा  कर  लिया   और  उन्हें  सुई  की  नोक  बराबर  भूमि  देने  से  मना  कर  दिया    l   ईर्ष्या -  द्वेष जैसी  मानसिक  विकृतियों  से  ग्रस्त  व्यक्ति  हर  युग  में  रहे  हैं    l    इन्हे  सुधारा  नहीं  जा  सकता    क्योंकि  इन्हे  जो  मिला  है  उसकी  उन्हें  कद्र   नहीं  होती    और  दूसरे  को  थोड़ी  सी  ख़ुशी  भी  मिल  जाये  वो  उनसे  सहन  नहीं  होती   l   लगभग  हर  व्यक्ति  का  अपने  जीवन  काल   में  ऐसे  ईर्ष्यालु  लोगों  से  पाला  पड़ता  है  ,  ऐसे  लोगों  द्वारा  समय - समय  पर  किए   जाने  वाले  आघातों  के  बीच  कैसे   तनाव  रहित  रहा  जाये   इसके   लिए   ' जीवन  जीने  की  कला '    का  ज्ञान  जरुरी  है   l 

30 March 2022

WISDOM -----

  आज  केवल  भारत  ही  नहीं  सारी   दुनिया  में    भगवान  राम  के  असंख्य  भक्त  है  ,  यदि  सब  सच्चे  होते  तो  धरती  पर  राम -राज्य  होता    लेकिन  दुःख   इस बात  का  है  कि   सभी  धर्मों  के  लोग  अपने   धर्म  ग्रंथों  में  लिखी  हुई  अच्छी  बातों  को  अपने  जीवन  में  नहीं  अपनाते  ,  उनमे  यदि  किसी   ऐसे  पात्र  का  चरित्र  है   जिसकी    बुराई     का  परिणाम  देखकर   संभल  जाना  चाहिए   तो  संभालना  तो  दूर  वह  उस  बुराई  को  बहुत  जल्दी  ग्रहण  कर  लेंगे    जैसे  रामायण  में   मंथरा   ने   महारानी  कैकेयी   के  कान  भर  दिए  , ऐसी  बातें   कहीं  जिससे  चारों  भाइयों  में  फूट   पड़   जाये   और  भगवान  राम  को  वनवास  हो  जाये  l   मंथरा  का  स्वार्थ  था   कि  महारानी  कैकेयी  राजमाता  होंगी   और  वह  उनकी  प्रमुख  दासी  ,  तो  उसका  भी  महत्व   बढ़ेगा   l   उसकी     ऐसी  कुबुद्धि  के  कारण  राम  को  वनवास  तो  हुआ   लेकिन  वह  त्रेतायुग  था  , लोगों  में  धैर्य  और  विवेक  था  इसलिए  चारों  भाइयों  में  प्रेम   बना रहा   l    मंथरा   कई  रूपों  में  आज  भी  इस  धरती  पर  है   l   हमें  रामायण  से  शिक्षा  लेनी  चाहिए   कि   कान  के  कच्चे   न  हो ,    किसी  के  भड़काने  पर  अपना  मन  मैला  न  करे   l   मानव  जीवन  बहुमूल्य  है ,  बार - बार  नहीं  मिलता  l   अपनी  ऊर्जा  को  व्यर्थ  के  मतभेदों  में  गँवाने   के  बजाय  सकारात्मक  कार्यों  में  नियोजित  करें  l