पं . श्रीराम शर्मा आचार्य जी , महापुरुषों के अविस्मरणीय जीवन प्रसंग ' में लिखते हैं ----- 'पराधीनता मनुष्य के लिए बहुत बड़ा अभिशाप है , वह चाहे व्यक्तिगत हो या राष्ट्रीय l उससे मनुष्य के चरित्र का पतन हो जाता है और तरह -तरह के दोष उत्पन्न हो जाते है l इसलिए कवियों ने पराधीनता को एक ऐसी ' पिशाचनी ' की उपमा दी है जो मनुष्य के ज्ञान , मान , प्राण सबका अपहरण कर लेती है l दूसरे को पराधीन बनाना संसार में सबसे बड़ा अन्याय और दुष्कर्म है l भगवान ने संसार में अनेक प्रकार के छोटे -बड़े , निर्बल -सबल , मुरका -चतुर प्राणी बनाये हैं l ईश्वरीय नियम तो यह है कि जो अपने से छोटा , कमजोर , नासमझ हो उसको आगे बढ़ने में , उन्नति करने में सहायता दी जाये , प्रगति के क्षेत्र में उसका मार्गदर्शन किया जाये पर इसके विपरीत जो कमजोर को अपना भक्ष्य समझते हैं , छल -बल से उनके स्वत्व का अपहरण करने को ही अपनी विशेषता समझते हैं , उन्हें कम -से -कम ' मानव ' पद का अधिकारी तो नहीं कह सकते l इनकी गणना तो उन क्रूर , हिंसक पशुओं में की जा सकती है , जिनका स्वभाव ही खूंखार बनाया गया है और जो सब के लिए भय का कारण होते हैं l '
13 August 2022
WISDOM ------
गुलाम बनाना एक मानसिकता है l फिर चाहे एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र को गुलाम बनाए या परिवार या हर छोटी बड़ी संस्था में ऐसे लोग लोग होते हैं जो चाहते हैं कि सब लोग उनके हिसाब से चलें l उनके अनुसार न चलो तो चैन से जीने न देंगे l एक राष्ट्र तो संघर्ष कर के आजाद हो भी जाता है लेकिन ये जो व्यक्तियों में गुलाम बनाने की प्रवृति है उससे आजादी तभी हो सकती है जब विचारों में परिवर्तन हो , चेतना का परिष्कार हो l परिवारों में देखें तो माता -पिता अपने बच्चे का सुखद भविष्य अवश्य चाहते हैं लेकिन अपनी इच्छाओं के लेकर , समाज में अपने स्टेट्स को लेकर इतने कठोर हो जाते हैं कि उनकी इच्छानुसार बच्चे को डॉक्टर , इंजीनियर बनना ही है फिर चाहे उसका मन न हो l इसका परिणाम हमें समाज में देखने को मिलता l युवाओं में आत्महत्या और नशे की प्रवृति बढ़ रही है l महिलाओं की आजादी एक दिखावा है l पुरुष ने महिलाओं को प्रदर्शन की वस्तु बना दिया है , अंग प्रदर्शन की तो जैसे बाढ़ आ गई है l पुरुष अपने स्वार्थ के लिए अपनी ही भारतीय संस्कृति को मिटाने को आतुर हैं l महिलाएं अपनी महत्वाकांक्षा के कारण किसी पद पर पहुँच भी जाती हैं तो वे स्वयं जानती हैं कि कितने पापड़ बेलने पड़े हैं l फिर अधिकांश जगह वे केवल हस्ताक्षर करने के लिए हैं , उनके विचार की कोई अहमियत नहीं है l घरेलु हिंसा , उत्पीड़न की क्या कहें वो तो जग जाहिर है l यह गुलामी तभी समाप्त होगी जब लोगों की चेतना विकसित होगी , उनमे आत्मविश्वास होगा , आवश्यकताएं सीमित होंगी l एक नया समाज हो ----- ' जियो और जीने दो l '
11 August 2022
WISDOM
अनमोल मोती ------ पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं ------ " व्यक्ति जब अपनी योग्यताओं और क्षमताओं को अपने लिए ही सीमित , संकुचित न रखकर राष्ट्र व समाज के स्तर पर नियोजित करता है तो वह निश्चित रूप से श्रेय व सम्मान का अधिकारी बनता है l सरदार पटेल इस द्रष्टि से निश्चित ही उस श्रेय तथा सम्मान के अधिकारी हैं जो उन्हें दिया जाता है l स्वतंत्रता के पहले तथा स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रोत्थान में उनकी अनूठी भूमिका रही l इस भूमिका का आधार उनका त्याग , तप , उनकी निष्ठां , भक्ति आदि थी l " ----------- घटना 1946 की है l बम्बई बंदरगाह के नौसैनिकों ने विद्रोह का झंडा खड़ा कर दिया l अंग्रेज अधिकारियों ने उन्हें गोली से भून देने की धमकी दी थी साथ ही भारतीय -नौसैनिकों ने जवाब में उनको खाक कर देने की चुनौती दे रखी थी l उस समय वहां की व्यवस्था देखने की जिम्मेदारी सरदार पटेल के हाथ में थी l लोग उनकी तरफ बड़ी घबड़ाई नजरों से देख रहे थे l किन्तु सरदार पटेल पर परिस्थिति का रंच -मात्र भी प्रभाव नहीं पड़ा l वे न तो अधीर थे और न विचलित l बम्बई के गवर्नर ने उन्हें बुलाया और काफी तुर्सी दिखाई l इस पर सरदार पटेल ने शेर की तरह दहाड़ कर गवर्नर से कह दिया कि वे अपनी सरकार से पूछ लें कि अंग्रेज भारत से मित्रों के रूप में विदा होंगे या लाशों के रूप में l अंग्रेज गवर्नर सरदार का रौद्र रूप देखकर कांप उठा और फिर उसने कुछ ऐसा किया कि बम्बई प्रसंग में अंग्रेज सरकार को समझौता करते ही बना l
10 August 2022
WISDOM -----
न्यूयार्क के पत्र " नेशन " ने बहुत वर्ष पहले महात्मा गाँधी के वास्तविक महत्त्व को समझ कर लिखा था ------ " वर्तमान युग में जब संसार के लोग वैज्ञानिक चमत्कारों पर ही विशेष जोर दे रहे हैं , भारतवर्ष का यह वीर और तपस्वी नेता अपने सात्विक गुणों और आत्मशक्ति के कारण देश और विदेश में अत्यधिक सम्मान प्राप्त कर रहा है l जिस समय पाश्चात्य सभ्य राष्ट्र अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए युद्ध के अतिरिक्त और कोई मार्ग जानते ही नहीं उस समय महात्मा गाँधी अपने राष्ट्रीय आन्दोलन को ' अहिंसात्मक असहयोग ' के पथ पर चला रहे हैं l वे कहते हैं कि भारत को रक्तपात से ही स्वराज्य मिल सकता है , तो हम दूसरों के बजाय अपना ही रक्त क्यों न बहाएं ? " गाँधी जी कहते थे ---'हम दूसरों को न मारकर , स्वयं अपने ही प्राण देकर स्वतंत्रता को प्राप्त करेंगे l ' गाँधी जी की यह घोषणा सुनकर ब्रिटिश सरकार तो क्या पूरा संसार ही चक्कर में आ गया l वे वर्तमान राजनीति और युद्धनीति को बदल देना चाहते थे l महापुरुष टालस्टाय लिखते हैं ---- " वर्तमान काल में एकमात्र गाँधी जी ईश्वरीय प्रतिनिधि हैं l
WISDOM -----
अनमोल मोती ----- रक्षाबंधन का पुनीत पर्व l बीकानेर नरेश का दरबार लगा हुआ था l राजद्वार पर ब्राह्मणों की लम्बी कतार थी l उन्ही ब्राह्मणों के मध्य पं. मदनमोहन मालवीय जी भी एक नारियल लिए खड़े थे l प्रत्येक ब्राह्मण नरेश के पास जाकर राखी बाँधता और दक्षिणा लेकर ख़ुशी -ख़ुशी घर लौटता जा रहा था l मालवीय जी का नंबर आया तो वे नरेश के समक्ष पहुंचे , राखी बाँधी , नारियल भेंट किया और संस्कृत में स्वरचित आशीर्वाद दिया l नरेश के मन में इस विद्वान् ब्राह्मण का परिचय जानने की जिज्ञासा हुई l जब उन्हें मालूम हुआ कि यह तो मालवीय जी हैं तो वह बहुत प्रसन्न हुए और मन ही मन अपने भाग्य की सराहना करने लगे l मालवीय जी ने विश्वविद्यालय की रसीद बही उनके सामने रख दी l उन्होंने भी तत्काल एक सहस्त्र मुद्रा लिखकर हस्ताक्षर कर दिए l नरेश अच्छी तरह जानते थे कि मालवीय जी द्वारा संचित किया हुआ सारा द्रव्य विश्वविद्यालय के निर्माण में ही व्यय होने वाला है l मालवीय जी ने विश्वविद्यालय की समूची रुपरेखा नरेश के सम्मुख रखी l उस पर संभावित व्यय तथा समाज को होने वाला लाभ भी बताया तो नरेश मुग्ध हो गए और सोचने लगे इतने बड़े कार्य में एक सहस्त्र मुद्राओं से क्या होने वाला है , उन्होंने पूर्व लिखित राशि पर दो शून्य और बढ़ा दिए , साथ ही अपने कोषाध्यक्ष को एक लाख मुद्राएँ देने का आदेश प्रदान किया l
9 August 2022
WISDOM -------
अनमोल मोती ------ मेढ़क दौड़ता है , उसके पीछे सर्प दौड़ता है , सर्प के पीछे मयूर , मयूर के पीछे सिंह और सिंह के पीछे शिकारी दौड़ रहा है l इस प्रकार सब अपने -अपने भोजन और विहार की सामग्रियों के पीछे व्याकुल हो रहे हैं , पर पीछे जो चोटी पकड़े काल खड़ा है , उसे कोई नहीं देखता
8 August 2022
WISDOM ------
अनमोल मोती ------ एक रात भयंकर तूफान आया l सैकड़ों विशालकाय वृक्ष धराशायी हो गए l अनेक किशोर वृक्ष भी थे , जो बच तो गए , पर बुरी तरह सकपकाए खड़े थे l प्रात:काल आया , सूर्य ने अपनी रश्मियाँ धरती पर फेंकी l डरे हुए पौधों को देखकर किरणों ने पूछा ---- " बालकों ! तुम इतना सहमे हुए क्यों हो ? " किशोर पौधों ने कहा ---- " देवियों ! ये देखो हमारे कितने पुरखे धराशायी पड़े हैं l रात के तूफ़ान ने उन्हें उखाड़ फेंका l न जाने कब यही स्थिति हमारी भी आ जाये l " किरणें हँसी और बोलीं ---- " वत्स ! आओ और इधर देखो ---- ये वृक्ष तूफान के कारण नहीं , जड़ें खोखली हो जाने के कारण गिरे , तुम अपनी जड़ें मजबूत रखना , तूफान तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे l "