5 April 2019

WISDOM ------ शक्ति और सामर्थ्य के साथ चेतना का स्तर भी ऊँचा होना चाहिए

  चेतना  का  स्तर  ऊँचा  होने  पर  ही  शक्ति  और  सम्पदा  का  सदुपयोग  संभव  है   इसके  बिना  बन्दर  के  हाथ  तलवार  पड़ने  की   संभावना  ही  अधिक  रहेगी  l  '
  जिसका    अंतरंग     निकृष्ट  होता  है   तो  अभावग्रस्त  स्थिति  में  उसकी  यह  बुराई   दबी   रहती  है  ,  लेकिन  शक्ति  और  साधन  मिलने  पर   वह  और  अधिक  खुला  खेल  खेलने  लगती  है  l  दुर्बुद्धि ग्रस्त  और  कुकर्मी  व्यक्ति   यदि  शक्तिशाली  हो  जाये   तो  वह  विनाश  के  गर्त  में  अधिक  तेजी  से  गिरेगा  l  कुकर्मी  का  वैभव   उसके  स्वयं  के  लिए  ,   असंख्य   व्यक्तियों  तथा  समाज  के  लिए  अभिशाप  होता  है  l 
 समर्थता  और  सम्पन्नता  का  उस  व्यक्ति  व  समाज  को  लाभ  तभी  संभव  है   जब  व्यक्ति   शालीन   हो  ,  उसकी  चेतना  का  स्तर  उत्कृष्ट  हो   l  

4 April 2019

WISDOM ----- व्यस्त रहें ----- मस्त रहें

चिंता  व्यक्ति  को  तभी  होती  है  , जब  वह  खाली  बैठा  होता  है  ,  उसके  पास  करने  के  लिए  कोई  महत्वपूर्ण  काम  नहीं  होता   l  चिंता  व्यक्ति  को  चिता  की  तरह  सुलगाती  है  ,  घुन  की  तरह  शरीर  में   लग  कर    उसे  कमजोर  व  निकम्मा  बना  देती  है   l  चिंता  करने  के  दौरान  अत्याधिक  मानसिक  ऊर्जा  का  क्षरण  होता  है   l 
  इसका  समाधान   है -- विवेक पूर्ण  विचार करना  ,  और  सोचे  गए  विचार  और  योजनाओं  पर  कार्य  करना  l   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  का  कहना  था ---- " व्यस्त  रहो ---- मस्त  रहो   l  " 
जो  जीवन  को   सच्चिन्तन   और  सत्कर्मों  में  लगते  हैं  ,  वे  न  केवल  मस्त  रहते  हैं  ,  बल्कि  आंतरिक  और  बही  रूप  से   इतने  आनंदमय  रहते  हैं   कि  उनके  संपर्क  में  आने  वाले  भी   अपनी  चिंताओं  से  मुक्त  हो  जाते  हैं  l  

3 April 2019

WISDOM ----- सत्य में हजार हाथियों का बल होता है

' जो  अपने  जीवन  में  सच्चा  होता  है  और  जिसका  संग  उत्तम  होता  है   उसके  डगमगाते  कदम  को   रोकने  वाले  संयोग  आ  ही  जाते  हैं  l  '
  छत्रपति  शिवाजी  महाराज    के  जीवन  की  घटना  है  --- बीजापुर  का  नवाब  आदिलशाह  चाहता  था   कि  शिवाजी  उसकी  आधीनता  स्वीकार  करें  और  जीते  हुए  किले  उसे  लौटा  दें  l  शिवाजी  स्वाभिमानी  थे  उन्होंने  ऐसा  करने  से  साफ  मना  कर  दिया   l  इससे नवाब  आपे  से  बाहर  हो  गया  , बोला  मैं   उनकी  बढ़ती  हुई  ताकत  को  कुचल  डालूँगा  l  किन्तु  वह  मन  ही  मन  शिवाजी  की  वीरता  से  भयभीत  था  l   वह  नवाब  स्वार्थी  और  कायर  था  ,  छल - कपट  ही  उसका  संबल  था   l  उसने  एक  जाति- द्रोही  बाजी  घोर  पांडे  की  मदद  से  शिवाजी  के  पिता  शाहजी  को   एक  छोटी  सी  कोठरी  में   बंदी बना  लिया   और  उसका  द्वार  ईंटों  से  चुनवाकर   थोड़ी  सी  सांस  रहने  दी   l  फिर  शाहजी  को  विवश  किया  कि  शिवा  को  पत्र  लिखकर  यहाँ  आने   और  बीजापुर  दरबार  में   आत्मसमर्पण     करने  के  लिए   मजबूर  करो  , अन्यथा  तुम्हे   इसमें  जिन्दा  दफ़न  कर  देंगे  l 
   शिवाजी  के  सामने  गहरा  संकट  था - समर्पण  करने  से  उनके  यश  को  कलंक  लगता   , कैसे  पिता  को  बचाएं  और  कैसे  सिद्धांतों   की  रक्षा  करें   ?  पिता  के  प्रति  मोह   प्रबल  हो  रहा  था   उन्होंने  बीजापुर  जाकर   नवाब  से  संधि  करने  का  विचार  बनाया  --- ' यदा - कदा  मनुष्य  का  मोह  और  मानसिक  दुर्बलताएं  उसे  गलत   दिशा  की और  प्रेरित  कर  देती  हैं   l  किंचित  कमजोरी  से  शिवाजी  का मोह  ' सर्व जन हिताय ' की  महानता  पर  आच्छादित  हो  गया   l  लेकिन  जो  अपने  जीवन  में  सच्चा  होता  है  उसके  डगमगाते  कदम  को  रोकने  वाले  संयोग  आ  ही  जाते  हैं  l  
  इस  समय  शिवाजी  की  पत्नी  ने  उन्हें   अंधकार  में  प्रकाश  दिया  l  उसने  कहा -- मेरी  आत्मा  कहती  है  कि  बीजापुर  जाने  में  कल्याण  नहीं  है ,  आदिलशाह  आपके  पिता  को  भी  नहीं  छोड़ेगा  ,  और  आपको  भी  बंदी  बना  लेगा   इससे  हिन्दू - जाति  का  भविष्य  खतरे  में  पड  जायेगा  l  उसने  कहा   कि  आप  दिल्ली  के बादशाह  शाहजहाँ  को  पत्र  लिखें  कि वह  पिताजी   की  रक्षा  में  आपकी  मदद  करे , बदले  में  आप  उसे   दक्षिण  के  मुस्लिम  राज्यों  को  जीतने  में  उसकी  मदद  करेंगे  l  साम्राज्य लिप्सु  मुग़ल   बादशाह   इससे  सहमत  हो  गया  और  उसने  आदिलशाह  को  फरमान  भेजकर   शाहजी  को  मुक्त  करा  दिया  l   शिवाजी  की  सफल  राजनीति  से  पराजित  हो   बीजापुर  का  नवाब  आदिलशाह  और  जल  गया  और  छल - कपट  की  योजनायें  बनाने  लगा  l 
समयानुकूल  कार्य प्रणाली  और  अपनी  सुझबुझ  के  कारण   महाराज  शिवाजी  ने  अनुपम  सफलता  प्राप्त   कीं   l

2 April 2019

WISDOM ----- जियो और जीने दो

 इनसान  चाहे  वह  स्त्री  हो  या  पुरुष  ,  एक  इनसान  ही  है  ,  वस्तु  नहीं  , जिसका  जब  चाहे  इस्तेमाल  कर  लिया  जाये  l  इनसान  है  तो  उसके  भीतर  सब  प्रकार  की  भावनाएं  हैं  l
  शोषण  की  मानसिकता  है   कि  दूसरे  की  कमियों  का  लाभ  उठाकर   उसे  सदा  नियंत्रण  में  रखो   और  अपना  हित  साधने  के  लिए   उसका  उपयोग  करो  l  जब  तक   वह  उपयोगी  है  ,  तब  तक  उसका  उपयोग  करो   और    अनुपयोगी  होने  पर   उसे  उठा  कर  फेंक  दिया  जाये  l   शोषण  के  साथ  एक  प्रकार  की क्रूरता  का  भाव  है  ,  जिसमे  मानवीय  संवेदनशीलता   और  सहकारिता  का  कोई  स्थान  नहीं  है  l   यही  सिद्धांत  आज   आज  परिवार , समाज ,   संस्थाएं ,  राजनीति  आदि  विभिन्न  क्षेत्रों  में  कार्य  करता  नजर  आता  है   l    शोषण  से  विकार  उत्पन्न  होते  हैं  , इससे  ही  सम्पूर्ण  समाज  में  अशांति  उत्पन्न  होती  है   l 
  शोषण  के  विपरीत  यदि  पोषण  हो  , तभी  किसी  देश  का  सही  अर्थों  में  विकास  होगा  l  यह  पोषण  कई  तरीके  से  हो  सकता  है   जैसे  कोई  आर्थिक  रूप  से कमजोर  है    तो   उसे   स्वावलंबी  बनाने  के  लिए   विभिन्न  उपाय  करना ,  प्रशिक्षण  देना  आर्थिक  पोषण  है  l  एक  दूसरे  की  कमियों  , कमजोरियों  का  फायदा  न  उठाकर   संवेदनशील  ढंग  से  उनका  समाधान  करना    ही  मानवता  है  l
      आज  के  समय  में  दुर्बुद्धि  के  कारण  ,  तुरंत  लाभ  पाने  के  लिए   लोग   अन्यायी  का  , गलत  राह  पर  चलने  वाले   का  साथ  निभाते  हैं   l  यह  सहयोग  नहीं  है   l  सद्गुणों  में  नैतिकता  की  प्रधानता  होती  है  l  

31 March 2019

WISDOM ----- संवेदना का आभाव मानसिक समस्याओं को जन्म देता है

 बंट्रेण्ड  रसेल  का कथन  है ---- "  मानव  जाति  अब  तक  जीवित  रह  सकी  है   तो  अपने  अज्ञान  और  अक्षमता  के  कारण  ही  ,  परन्तु  यदि  ज्ञान  व  क्षमता     मूढ़ता  के  साथ   युक्त  हो  जाएँ    तो   उसके    बचे  रहने  की  कोई   संभावना  नहीं  है  l  विज्ञानं  के  साथ   विवेक   एवं   औचित्यपूर्ण  क्रिया कुशलता  की  आवश्यकता  है  l  "  विज्ञान  ने   साधन  और  सुविधाओं  का  अंबार  लगा  दिया  है   l  विज्ञानं  में  हर  चीज  का  भौतिक  मूल्यांकन  होता  है  l  इसमें  मानवीय  संवेदना      का  सर्वथा  अभाव  है   l  विकसित  देशों  में  आधुनिक  टेक्नोलॉजी  है  ,  आर्थिक  समस्या  नहीं  है  लेकिन  वहां  मानसिक  समस्याएं  बहुत  हैं    और  अनेक  लाइलाज  रोग  हैं   l  मनीषियों    का  कहना  है     आंसुओं  के  पानी  का  वैज्ञानिक  विश्लेषण   तो  किया    जा  सकता  है   लेकिन  उनके  पीछे     कौन  सी  भावना  ----  , ममता ,  करुणा, स्नेह , व्यथा ,  वेदना  आदि  क्या  छुपा  है  यह     विज्ञान नहीं  बताता  l   इस  कारण  व्यक्ति  के  जीवन  में  रिक्तता ,  एक  खालीपन  होता  है  l   उसके  ह्रदय  को , उसकी  भावनाओं  को  समझने  वाला  कोई  नहीं   होता  l   इसी  कारण  अनेक   मानसिक   समस्याएं  उत्पन्न  होती  है  l  

29 March 2019

WISDOM ---- देश के गौरवपूर्ण अतीत से परिचित होने से ही आत्मगौरव की भावना का विकास होगा

 रमेशचंद्र  दत्त  ( जन्म 1848)   अंग्रेजी  शासन काल  में  प्रशासनिक  सेवाओं  के  लिए  चुने  गए  l 1871  में  उन्हें  असिस्टेंट  मजिस्ट्रेट  के  पद  पर  नियुक्त  किया   गया  l   उन्होंने  अपने  बाल्यकाल  से  ही  देखा  कि  किस  प्रकार  अंग्रेज  भारतीयों  पर  अत्याचार  करते  हैं ,  चाबुक  और  हंटर  से  पीटते  निकल  जाते  हैं   और  भारतीय  इतनी  हीन  भावना  के  शिकार  हैं  कि  उनमे  प्रतिरोध  करने  का  साहस  ही  नहीं  है   l   उनका  विचार  था  कि  अपने  महान  अतीत  से  परिचित  होकर   भारतीय  जनता  में  आत्मगौरव  की भावना  का  विकास  होगा   और  उसकी  कर्म शक्ति  उस  गौरव पूर्ण  स्थिति  को   प्राप्त  करने  के  लिए  उठ  खड़ी  होगी  l   उनका  सर्वाधिक  लोकप्रिय  ग्रन्थ  ' प्राचीन  भारत  की  गाथाएं '  प्रकाशित  हुआ  , उसका  जनमानस  पर  सकारात्मक  प्रभाव  पड़ा  l  इसके  अतिरिक्त  उन्होंने  कई  उपन्यास  भी  लिखे  जिनमे  भारतीय  जनमानस  को  जगाने का  प्रयास  किया  गया  l  

28 March 2019

WISDOM ----- साहित्य समाज का दर्पण है

 साहित्य  द्वारा  ही  किसी  समाज  का   मानसिक , बौद्धिक  तथा  नैतिक  स्तर  अवगत  होता  है  l   रूस के  स्रजनशील  साहित्यकार    एंटन  चेखव  उन  गिने - चुने  साहित्यकारों  में  से  हैं  जिनकी  रचनाएँ  समाज  पर  अपना  प्रभाव  डाल  सकीं  l  उनकी  रचनाओं  में  कहीं   कहीं  इतना  तीखा  व्यंग्य  होता  है  कि  पाठक  पढ़कर  तिलमिला  उठता  है  l   उनका  एक  नाटक  ' वार्ड नं. 6 '  बहुत  लोकप्रिय  हुआ  l 
बुद्धिजीवी  वर्ग  की  नपुंसक  अकर्मण्यता  पर  तीव्र  प्रहार  करने  वाला  यह  नाटक  जब  लेनिन  ने  देखा   तो  वे  इतने  व्यग्र  हो  उठे  कि  अपने  स्थान  पर  बैठ  न  सके  l  इस  नाटक  में  इस  तथ्य  को   पूरी  तरह  उभारा  गया  है  कि  --- हिंसा   और  अत्याचार  को  रोकने  के  लिए   निष्क्रिय  विरोध , उपेक्षा  व  उदासीनता  से  काम   नहीं  चलता   l  उसे  रोकने  के  लिए  अदम्य  और  कठोर  संघर्ष  की  आवश्यकता  है   तभी  उसमे   सफल  हुआ  जा  सकता  है  l  
 मनुष्य  समाज  की  वर्तमान  स्थिति  का  चित्रण  करते  हुए   चेखव  ने  एक  स्थान  पर  लिखा  है --- ईश्वर  की  जमीन  कितनी  सुन्दर  है  l  केवल  हम  में   ही  कितना  अन्याय,     कितनी  अनम्रता   और  ऐंठ  है  l  
हम  ज्ञान  के  स्थान  पर  अभिमान  और  छल - छिद्र     तथा  ईमानदारी  के  पीछे  धूर्तता  ही  अधिक  प्रकट  करते  हैं   l