25 May 2020

WISDOM ---- संसार का सबसे कठिन कार्य है --- किसी को खुशी देना l

  किसी  को  कष्ट  देना ,  उसकी  खुशियां  छीन  लेना ,  किसी  की  आँखों  में  आँसू   देना  बहुत  सरल  कार्य  है   l    ऐसे  ही  कार्यों  की   आज  संसार  में  भरमार  है   l   इसलिए   लेकिन  किसी  को  खुशी   देना ,  चेहरे  पर  मुस्कान  ला  देना  ,  सच्चे  हृदय  से  किसी  के  कार्यों  की  तारीफ़   करना    बहुत  कठिन  कार्य  है   l
  किसी  को  ख़ुशी  देने  के  लिए  बहुत  बड़ी  धन - सम्पदा  देने  की  जरुरत  नहीं  है  ,  किसी  के  कठिन  वक्त  में  उसकी  मदद  करने  से  ही  उसको  ख़ुशी  मिल  जाती  है  l   एक  घटना  स्पष्ट  करती  है  कि   खुशियाँ   कैसे  आती  हैं  -----  एक  गाँव  में  बहुत  गरीबी  थी  ,  खेती  अच्छी  नहीं  थी , कोई  रोजगार  नहीं  था  ,  शासन  से  जो  मदद  मिलती  थी  , उससे  गुजारा   हो  जाता  था   l   चारों  और  सन्नाटा  था , कहीं  कोई  उमंग  नहीं  थी  l  कई  वर्ष  ऐसे  ही  सन्नाटे  में  गुजर  गए  l   कुछ  श्रद्धालुओं  ने   वहां  एक  प्राचीन  खंडहर  हुए  मंदिर  का  जीर्णोद्धार  किया  ,  उसमे  शनि महाराज  और  हनुमानजी  व  अन्य  देवी - देवताओं  की  मूर्तियां  थीं ,  साफ - सफाई  कर  के  वहां  पूजा - प्रार्थना  शुरू  करा  दी  l  श्रद्धालु  दर्शन  के  लिए  आने  लगे  l  गाँव  के  लोगों  में  उमंग  जगी  l   सुबह  जल्दी  उठकर   महिलाएं , बच्चे  सब  फूल - मालाएं  तैयार  करते ,  भजन - पूजन  की  सामग्री ,  प्रसाद    आदि   तैयार  कर  के   मंदिर  से  मुख्य  सड़क  तक  सब  खड़े  रहते   l   दिन - भर  में  सबकी      फूल - माला    आदि  की  जो  बिक्री  होती  ,  वह  उन  के  मन  को  खुश   करने  के  लिए  पर्याप्त  थी   l   शनिवार , मंगलवार  को  मेला  भरता   l  खेल - खिलौना , गुब्बारे , मिठाई  , झूला   सभी  की  कुछ  न  कुछ  बिक्री  होती   l    दिनभर  मेहनत  के  बाद  जो  पैसा  मिलता  ,  उसकी  ख़ुशी  ही  अलग  है l    मात्र  एक - दो  महीने  में  ही  उस  गाँव  का  काया कल्प  हो  गया   l   लोगों  के  जीवन  में  उमंग  आ  गई  ,  जिस  गाँव  में  सन्नाटा  पसरा  था  ,  वहां   महिलाओं  की  हंसी , बच्चों  की  खिलखिलाहट  गूंजने  लगी   l
   इसे  हम  केवल  ईश्वर  की  कृपा  नहीं  कह  सकते  l   कर्मकांड  चाहे  किसी  भी  धर्म  के  हों  ,    उनमे  अच्छाई - बुराई  हो  सकती  है   लेकिन  उनके  माध्यम  से  लोगों  को  रोजगार  मिलता  है  ,  आय  प्राप्त  होती  है  ,  गरीबों  के  जीवन  में  छोटी - छोटी  खुशियां  आ  जाती  हैं   l   उनका  सामान  खरीदकर ,  उन्हें  थोड़ी  सी  ख़ुशी  देकर    हमारे  लिए  भी     ईश्वर  की  कृपा  पाने  का   रास्ता  खुल  जाता  है   l 

24 May 2020

WISDOM ------

 भारतवर्ष   के  महामहिम  राष्ट्रपति   ए. पी. जे. कलाम  के  जीवन  का  एक  प्रसंग  है  ----  एक  बार  एक  बच्चे  ने  उनसे  पूछा    कि   क्या  उन्होंने  महाभारत  पढ़ी   है  ?   जब  उन्होंने  इसका  जवाब  ' हाँ '  में  दिया   तो  बच्चे  ने  उनसे  अगला  प्रश्न  किया   कि   इसमें  से  कौन  सा   चरित्र    उन्हें  सबसे  ज्यादा  प्रिय  है  l
 इस  महाकाव्य  के  मर्म  को  जानने  वाले   राष्ट्रपति  महोदय  ने   उस  बच्चे  को  बताया  कि   वे  महात्मा  विदुर  के   चरित्र  से   बहुत  प्रभावित  हुए  l   बच्चे  ने  उनसे  फिर  पूछा  -- ' क्यों  ? '
  उत्तर  में  उन्होंने  कहा  --- " क्योंकि  महात्मा  विदुर  ने   सत्ता  की  गलत  हरकतों  के  खिलाफ  आवाज  उठाई   और  जिन्होंने   अधर्म  की  ज्यादतियों   के  विरुद्ध   उस  स्थिति  में  भी  मोरचा   खोलने  का  साहस  किया   जब  पितामह  भीष्म ,  आचार्य  द्रोण ,  महावीर  कर्ण   आदि  सब  वीरों  ने  हथियार  डाल  दिए  थे  l  "
   महामहिम  राष्ट्रपति  के   इस  उत्तर  में   उनका  निज  का  स्वप्न  भी  शामिल  था  ,  जो  कल्पनाशील  मन   और  साहसी  विवेक  से  उपजा  था  l  महात्मा  विदुर   की  ही  भांति  स्वयं  के  चरित्र  का  निर्माण  l

23 May 2020

WISDOM ---- सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना करें

  जब  दसों   दिशाओं  में  रावण  का  आतंक  था  ,  आसुरी  शक्तियों   की  प्रमुखता  थी   l   रावण  इस  बात  को  अच्छी  तरह  जनता  था  कि   यदि  ऋषियों  ने  यज्ञ , हवन   आदि  किया  , प्रार्थना - पूजा  की  तो  उसकी  आसुरी  शक्ति  कमजोर  पड़   जाएगी   l   इसलिए  उसने  ऋषियों  के  यज्ञ , हवन  - पूजन  को  अपवित्र  करना  ,  उनमे  व्यवधान  डालना   शुरू  कर  दिया  था  l   इसी  तरह  हिरण्यकश्यप  ने  स्वयं  को  भगवान    मानकर   सारे  धार्मिक  स्थलों  को  बंद  कर के   जनता  को  अपनी ( हिरण्यकश्यप ) की  पूजा  करने  को विवश  किया  l
 आज  संसार  पर  आसुरी  शक्तियों  का  ऐसा  असर  हो  गया   कि   सभी  धर्मों  के  धार्मिक  स्थल  बंद  हो  गए   l   उनके  आसपास    जो  बहुत  से   छोटे - छोटे  व्यवसायी  थे  ,  ईश्वर  की  कृपा  से  जिनके  परिवार  का  भरण - पोषण  हो  रहा  था  ,  उन  सब  पर  भी  गाज  गिर  गई  l   आसुरी  शक्तियां  इसी  तरह  कमजोर  को  परेशान    कर   चारों  ओर   भय  व्याप्त  कर  देती  हैं  l   जहाँ  से  भी  थोड़ी - बहुत  सकारात्मक  ऊर्जा  उत्पन्न  होती  है    उसे  बंद  कर  नकारात्मक  ऊर्जा    जैसे  नशा  आदि  को  प्रश्रय  देती  हैं   
  इन  समस्याओं  से  निपटने  के  लिए  जागरूकता  जरुरी  है  ,  सद्बुद्धि  ही  इसका  एकमात्र  हल  है  l 

WISDOM ------

   धन  का  आकर्षण  बड़ा  जबरदस्त  होता  है   l   जब  लोभ  सवार  होता  है  ,  तो    मनुष्य    अँधा  हो  जाता  है   और  पाप - पुण्य   में   कुछ  भी  फर्क  नहीं  देखता  है   l   लोभ  के  आते  ही  पाप  की  भावनाएं  बढ़ती  हैं   और   ऐसा  व्यक्ति  स्वयं  भी  उस  पाप  के  परिणाम  से  नष्ट  हो  जाता  है  l 
  एक  कथा  है  ------ तीन    बुद्धिमान  व्यक्ति   आपस  में  विचार - विमर्श  कर  रहे  थे   कि   दुनिया  में  इतना  पाप  कैसे  बढ़ता  जा  रहा  है  ,  जिसके  कारण  लोग  इतना   दुःखी   हैं   l   यह  पता  करें  कि   आखिर  यह  पाप  कहाँ  से  उत्पन्न  होता  है   ?  इस  पाप  का  बाप  कौन  है  ?    इस  प्रश्न  के  उत्तर  की  खोज  में  वे  आगे  बढ़ते  गए  l  उन्हें  एक  वृद्ध  अनुभवी  पुरुष  मिला   l   उन्होंने  उससे  प्रार्थना  की  कि   वह  उन्हें  पाप  के  बाप  का  पता  बता  दे  l   वृद्ध  ने  ऊँगली  का  इशारा  करते  हुए   पर्वत  की  एक  गुफा  दिखाई   और  कहा  ---- "  देखो  उस  कंदरा   में  पाप  का  बाप  रहता  है  l   पर  देखो  !  सावधान  वह  तुम्हे  भी  पकड़  न  ले  l
      तीनो  मित्रों  ने  गुफा  में  पहुंचकर  देखा  ,  वहां  सोने  के  बड़े - बड़े  ढेर  हैं  ,  हजारों  मन  सोना  बिखरा  पड़ा  है  l  उन्होंने  निश्चय  किया  कि   रात्रि  में  इस  सोने  को  ले  चलेंगे ,  कोई  नहीं  देख  सकेगा  l  अभी  भोजन  कर  के    आराम  कर  लें  l
तीनों  के  मन  में  स्वर्ण  का  लालच  आ  गया  ,  वे  सोचने  लगे  कि   दो  मर  जाएँ  तो  सारा  सोना  उसे  मिल  जाये  l    जो  दो  साथी  भोजन  लेने  गए  थे  ,  उनमे  से  एक  ने  दूसरे  को  तलवार  से  मार  डाला   और  भोजन  सामग्री  में  जहर  मिला  दिया  l   तीसरा  साथी  और  भी  होशियार  था  ,  उसने   उस  साथी  के  आते  ही  उस  पर  वार  कर  उसे  मार  डाला   और  अब  वह  बड़ा  प्रसन्न  था  कि  सारा  सोना  उसे  मिल  जायेगा  l   उसने  भरपेट  भोजन  किया  l   भोजन  में  जहर  था  ,  उसके  भी  हाथ - पैर    ऐंठने  लगे  और  वह  भी  मर  गया   l   लोभ  के  आते  ही  तीनो  के  मन  में  पाप  आ  गया   और  इस  पाप  ने  ही  उन  तीनों  का  अंत  कर  दिया  l 

22 May 2020

WISDOM -----

   '  आधी  छोड़  सारी   को  धावे ,  आधी  मिले  न  सारी   पावे   l 
  यह  उक्ति  इस  संदर्भ   में  है   कि   युगों  की  दासता  के  कारण  हम  अपनी  संस्कृति  को  भुला  बैठे  l   चिकित्सा  के  क्षेत्र  में  हमारे  यहाँ  आयुर्वेद है , नाड़ी   विज्ञानं  , प्राकृतिक  चिकित्सा , योग    आदि  में   आज  भी  देश  में  इतने  अनुभवी  हैं   कि   उनके  मार्गदर्शन  में   स्वस्थ  रहा  जा  सकता  है  l 
 ऐलोपैथी  में  भी  बहुत   गुण   हैं   लेकिन  हमें  अपनाना  वही  चाहिए  जो   हमारे  देश  की  जलवायु  , हमारे  रहन - सहन   और  उन  पांच  तत्वों --- पृथ्वी , जल , अग्नि, वायु  और  आकाश   जिनसे  हमारा  शरीर  बना  ,  उसके  अनुकूल  हो  l
यही  स्थिति  उन  देशों  की  भी  है   जिन्होंने  वर्षों  की  गुलामी  झेली  है   और  अपनी  संस्कृति  को  भी  खो  दिया   है  l   और  आज  ऐसे  सभी  देश   विज्ञान   और   आधुनिक   तकनीक    के  आगे   स्वयं  के  अस्तित्व  को  मिटाने   पर  उतारू  हैं  l
  आचार्य श्री  का  कहना  है  -- हमारी  हंस वृति   होनी  चाहिए  l '  जैसे  हंस  दूध  पी   लेता  है ,  उसका  पानी  छोड़  देता  है  l   उसी  तरह  हम  श्रेष्ठ  को  ग्रहण  करें  l  

WISDOM -------

  ईश्वर  दो  बार  हँसते  हैं   l   एक  बार  उस  समय  हँसते  हैं  ,  जब  दो  भाई  जमीन     बांटते  हैं   और  रस्सी  नापकर  कहते  हैं  ---- " इस  ओर   की  जमीन  मेरी   और  उस  ओर   की  तुम्हारी  l  "  ईश्वर  यह  सोचकर  हँसते  हैं   कि   संसार  है  तो  मेरा    और  ये  लोग   थोड़ी  सी  मिटटी  लेकर    इस  ओर   की  मेरी  ,  उस  ओर   की  तुम्हारी   कर  रहे  हैं   l
 फिर  ईश्वर  एक  बार  और  हँसते  हैं   l   बच्चे  की  बीमारी  बड़ी  हुई  है  l   उसकी  माँ  रो  रही  है  l   वैद्य  आकर  कह  रहा  है  --- "  डरने  की  क्या  बात  है  ,  माँ  !  मैं  अच्छा  कर  दूंगा  l  "  वैद्य  नहीं  जानता   कि   ईश्वर  यदि  मारना  चाहे    तो  किसकी  शक्ति  है  ,  जो  अच्छा  कर  सके  ?  ---- रामकृष्ण   परमहंस  l 
             रामकृष्ण  परमहंस   सिद्ध  पुरुष  थे  ,  वे  भविष्य द्रष्टा  थे  l   आज  से  इतने  वर्ष  पूर्व  उन्होंने  जो  कहा  ,  वह  आज  की  परिस्थितियों  में  सटीक  बैठता  है  l   आज  बड़े - बड़े  वैज्ञानिक  और  शक्तिशाली  सरकारें  कहती     हैं   कि   वैक्सीन   लग  जायेगा  ,  फिर  सब  स्वस्थ  होंगे  ,  कोई  नहीं  मरेगा  l   यदि  ऐसा  संभव  होता  तो    चिकित्सा  विज्ञान   ने  कितनी  तरक्की  कर  ली  है  ,  एक से  बढ़कर  एक  अमीर ,  तानाशाह ,  राजा - महाराजा  सब  अमर  हो  गए  होते  l   इसलिए  हमारे  ऋषियों  ने  कहा  है  ---' मौत  के  अनेक  बहाने  होते  हैं  ,  और  जीवन  रक्षा  के  अनेक  सहारे  होते  हैं  l '
  पं.  श्रीराम  शर्मा  आचार्य  जी  ने  लिखा  है  --- ' यह  संसार  गणित  से  चलता  है   l  '
जो  ईश्वर  की  सत्ता  में  विश्वास  करते  हैं   , वे  इस  कथन  की  सत्यता  को  , उसकी  गहराई  को  समझते  हैं  l 

WISDOM -----

   कथा  है  ---- राजा  भोज   अपने  रथ  से  उद्दान   की  ओर   जा  रहे  थे  ,  तभी  उस  काल  के   योगी , तपस्वी  , गायत्री  सिद्ध  साधक  गोविन्द   को  देखकर  उन्होंने  रथ  रोकने  का  आदेश  दिया  और  रथ  से  उतरकर   राजा  ने  योगी  का  अभिवादन  किया  l   गोविन्द  ने  राजा  के  अभिवादन  का  उत्तर  न  देते  हुए   अपनी  दोनों  आँखें  मूँद   ली  l   गोविन्द  की  प्रतिक्रिया  से  विस्मित  राजा  ने  कहा ---- " हे  महातपस्वी  !  आपने  हमें  आशीर्वाद  देना   तो  दूर  ,  अपनी  आँखें  ही  बंद  कर  लीं  l   हमसे  ऐसी  क्या  भूल  हो  गई  l   इसे  स्पष्ट  करने  की  कृपा  करें  l "
 गोविन्द  ने  कहा  --- " महाराज  ! यदि  आप  सत्य  सुनना  चाहते  हैं   तो  मैं  सत्य  वचन  कहता  हूँ  ,  पर  ध्यान  रखें ,  सत्य  को  सह  पाना  अत्यंत  कठिन  है  l "
महाराज  भोज  ने  कहा --- " आप  सत्य  ही  कहें  l   राजदरबार  में  हमें  प्रसन्न  करने  के  लिए   गाये   गए   अतिशयोक्तिपूर्ण   गान  से  हमें  वितृष्णा  सी  हो  गई  है   l   आप  सत्य  कहें  ,  हमें  स्वीकार  है  l "
 गोविन्द  ने  कहा --- " राजन  !  लोकोक्ति  है  कि   प्रात:  किसी  कृपण  का  मुख  देखकर   नेत्र  बंद  कर   लेना  चाहिए  l   इसी   कारण  मैंने   अपनी  आँखें  मूँद   ली  हैं  l  '
   अपनी  गलती  सुनना   भी  अत्यंत  साहस  का  काम  है  l  राजा  के  माथे  पर  पसीने  की  बूंदे   दीखने   लगी  l   किसी  तरह  राजा  भोज  ने  अपने  को  संयत  किया  और  कहा  --- ' हे  तपस्वी  !  हमने  कइयों  को  दान  किया  l   क्या  हम  कृपण  हैं  ? "
 गोविन्द  ने  कहा --- " महाराज  !  आपने  जो  दान  दिया ,  वह  अपने   अहंकार  की  तुष्टि  के  लिए  दिया  है   l   जबकि  दान  किसी   सत्पात्र  को  उदारता  के  साथ   प्रदान  किया  जाता  है  l  आपने  दान  उसे  दिया  है  जिसे  उसकी  आवश्यकता  ही  नहीं  थी   l   केवल  चाटुकारों  को  आपने  दान  दिया  है  l   आप  राजा  हैं  ,  राजा  प्रजा  का  भगवान  होता  है   l   जो  राजा  अपने  इस  धर्म  का  पालन  नहीं  करता  उसकी  दुर्गति  सुनिश्चित  है   l   जो  राजकोष  का  उपयोग  केवल   अपने  सुख - भोग , वासना - तृष्णा  की  पूर्ति  के  लिए  करता  है  ,  एक  दिन  उसका  पतन  सुनिश्चित  है  ,  फिर  चाहे   वह   कितना   ही   धनबल ,  जनबल  एवं   बाहुबल    से  संपन्न  क्यों  न  हो    l   अत:  ऐसे  राजा  का  मुख  नहीं  देखना  चाहिए   और  इसलिए  हमने  अपनी  आँखें  मूँद   ली  हैं  l  "
  राजा  भोज   का  हृदय  सत्य  के  बाणों   से  बिंधता  जा  रहा  था   l   गोविन्द  आगे  बोले  ----  " महाराज  !  प्रगल्भ  की  विद्दा ,   कृपण  का  धन    और  कायर  का  बाहुबल   ----  ये  तीनों  पृथ्वी  पर  व्यर्थ  हैं  l   पृथ्वी  पर  सद्गुण  देह  छूटने  के  बाद  भी   अमर  रहता  है  l   धन  तो  चंचल  है  ,  इसका  विनिमय  तो  होना  ही  है  ,  परन्तु  उसका  सदुपयोग  सर्वोच्च  है  l   उदारता  हृदय  का  गुण   है  l   यदि  उदारता  है   तो  दधीचि ,  शिवि  और  कर्ण   के  समान  दानवीर   हुआ  जा  सकता  है  ,  जिनकी  अमर गाथा  अभी  भी  इस  धरा  पर  गायी   जाती  हैं   l  "
  गोविन्द  की  दी  गई  शिक्षा  ने  राजा  भोज  का  हृदय  परिवर्तित  कर  दिया  ,  इसके  उपरांत  उन्होंने  अपने  धन  का   अधिकतम    उपयोग   प्रजा  के  कल्याण  के  लिए  किया  l   उस  दिन  का  सूर्योदय  उनके  जीवन  में  भाग्योदय    के  रूप  में  परिवर्तित  हो  गया    l